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कलयुग में अहंकार रूपी राक्षस को मिटाकर भगवान को समर्पित करें—नवजीत भारद्वाज

मां बगलामुखी धाम में करवाया श्रृंखलाबद्ध मासिक मां बगलामुखी हवन यज्ञ

असत्य का प्रयोग कर हम निर्थक पाप के भागीदार बनते हैं स्वयं भी दुखी होते हैं एवं दूसरों को भी दुख पंहुचाते हैं                                                  जालंधर (अमरजीत सिंह लवला)                                                 मां बगलामुखी धाम नजदीक लम्मां पिंड चौंक होशियारपुर रोड़ पर स्थित गुलमोहर सिटी में धाम के संस्थापक एवं संचालक नवजीत भारद्वाज की अध्यक्षता में मासिक श्रंखलाबद्ध सम्पूर्ण फलदाई मां बगलामुखी हवन यज्ञ करवाया गया। सबसे पहले पं. अविनाश गौतम एवं पं. पिंटू शर्मा ने नवग्रह, पंचोपचार, षोढषोपचार, गौरी, गणेश, कुंभ पूजन, मां बगलामुखी के निमित्त माला जाप कर मुख्य यजमानो से सपरिवार पूजा अर्चना उपरांत हवन यज्ञ में आहुतियां डलवाईं। इस यज्ञ में उपस्थित मां भक्तो को आहुतियां डलवाने के बाद नवजीत भारद्वाज ने आए हुए मां भक्तों से अपनी बात करते हुए कहा कि सतयुग, त्रेतायुग, द्वापर और कलयुग में चार राक्षस रहे हैं।

सतयुग-हिरण्यकश्यप, त्रेतायुग- रावण, द्वापरयुग-कंस और कलयुग में अहंकार मनुष्य का शत्रु है। इसलिए जो मनुष्य कलयुगी राक्षसों से बचकर भगवान का जप-तप, पाठ-पूजा व स्मरण करेगा, वहीं भगवान के प्रति समार्पत हो सकता है। नवजीत भारद्वाज ने कहा कि हमारे सभी अवतारों एवं संत महात्माओं की वाणी पूर्णत: अध्यात्म को लेकर होती है। उनके वचनों में तनिक मात्र भी किसी भी प्रकार की सांसारिक बातों का उल्लेख ही नहीं मिलता उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में दुनिया के लोगों में वह भाषा नहीं आ पाती जो पूर्णत: आत्म कल्याण की होती है। कारण, संसारी जीवों में राग द्वेष का अंश मौजूद रहता है, जबकि वे पूर्णत: मुक्त होते हैं। यही कारण है कि उनका एक-एक शब्द मन में त्याग वैराग्य को जागृत करता है। नवजीत भारद्वाज ने कहा हमारी वाणी में असत्य, हिसा, लोभ और विकार का प्रयोग नहीं होना चाहिए। वाणी में मधुरता व मिठास होनी चाहिए। इतिहास गवाह है कि महाभारत का मूल कारण ही अपशब्द रहे हैं। अगर अपशब्द न बोले जाते तो शायद विनाश भी नहीं होता। आज घर परिवार संघ समाज में टूट फूट बढ़ती जा रही है। उसका मूल कारण वाणी व्यवहार ही है। सत्य वाणी को धर्म व असत्य वाणी को पाप कहा जाता है। दिनभर असत्य का प्रयोग कर हम निर्थक पाप के भागीदार बनते हैं स्वयं भी दुखी होते हैं एवं दूसरों को भी दुख पंहुचाते हैं। आज आवश्यकता है सर्वप्रथम हम अपनी वाणी में सुधार लाएं। तभी मन व तन में भी शांति उपलब्ध हो पाएगी। इस अवसर पर मुनीश शर्मा, एसटी ग्रुप के चेयरमैन हरीश कपूर, एसटी हस्पताल एवं टेस्ट ट्यूब बेबी सेंटर के डायरेक्टर डा अशीश कपूर, हकीम तिलक राज कपूर के डायरेक्टर डॉ. नवनीत कपूर, थ्रिल एवं राईड के डायरेक्टर अर्पित कपूर, गौरव कोहली, एडवोकेट राज कुमार, राजेंद्र कत्याल, बलजिंदर सिंह, समीर चोपड़ा, नवीन,अमरजीत सिंह, श्रीगोपाल मालपानी, विक्रांत शर्मा, संजीव शर्मा, राकेश महाजन, अमरेंद्र शर्मा, मानव शर्मा, बावा खन्ना,हितेश, रोहित बहल, गुरबाज, मुकेश चौधरी, अभिलक्षय चुघ, सुनील,राजीव, मोहित बहल ,राजन शर्मा, प्रिंस, राकेश, प्रवीण, दीपक ,अनीश शर्मा, अशोक शर्मा, रवि कुमार, विनोद खन्ना, कृष्णा गुप्ता,सौरभ मल्होत्रा, सुनील जग्गी सहित भारी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे। सोशल डिस्टेंस एवं सैनेटाइज़ेशन का विशेष ध्यान रखा गया। आरती उपरांत प्रसाद रूपी विशाल लंगर भंडारे का भी आयोजन किया गया।

Sidhi Galbaat
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