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नवरात्रों के नौ दिनों में सृष्टि होती है जागृत—नवजीत भारद्वाज

नवरात्रों के चतुर्थ नवरात्र मां कुष्मांडा देवी जी की विशेष पूजा अर्चना
जालंधर ग्लोबल आजतक
मां बगलामुखी धाम नजदीक लम्मां पिंड चौंक होशियारपुर रोड़ पर स्थित गुलमोहर सिटी में धाम के संस्थापक एवं संचालक नवजीत भारद्वाज की अध्यक्षता में साप्ताहिक मां बगलामुखी हवन यज्ञ करवाया गया। सबसे पहले ब्राह्मणों ने नवग्रह, पंचोपचार, षोढषोपचार, गौरी, गणेश, कुंभ पूजन, मां बगलामुखी जी के निमित्त माला जाप कर मुख्य यजमान मधुकर कत्याल से सपरिवार पूजा अर्चना उपरांत हवन यज्ञ में आहुतियां डलवाईं।

इस यज्ञ में उपस्थित मां भक्तो को आहुतियां डलवाने के बाद नवजीत भारद्वाज ने उपस्थित मां भक्तो को कहा कि चतुर्थ नवरात्र के दिन मां कुष्मांडा देवी जी की विशेष पूजा अर्चना का विधान है, देवी को कुष्मांडा के रूप में पूजा जाता है। अपनी मंद, हल्की हंसी के द्वारा ब्रह्मांड को उत्पन्न करने के कारण इस देवी को कुष्मांडा नाम से अभिहित किया गया है। जब सृष्टि नहीं थी, चारों तरफ अंधकार ही अंधकार था, तब इसी देवी ने अपने हास्य से ब्रह्मांड की रचना की थी। इसीलिए इसे सृष्टि की आदिस्वरूपा या आदिशक्ति कहा गया है।

इस देवी की आठ भुजाएं हैं, इसलिए अष्टभुजा कहलाईं। इनके सात हाथों में क्रमशः कमण्डल, धनुष, बाण, कमल-पुष्प, अमृतपूर्ण कलश, चक्र तथा गदा हैं। आठवें हाथ में सभी सिद्धियों और निधियों को देने वाली जप माला है। इस देवी का वाहन सिंह है और इन्हें कुम्हड़े की बलि प्रिय है। संस्कृति में कुम्हड़े को कुष्मांड कहते हैं इसलिए इस देवी को कुष्मांडा।
इस देवी का वास सूर्यमंडल के भीतर लोक में है। सूर्यलोक में रहने की शक्ति क्षमता केवल इन्हीं में है। इसीलिए इनके शरीर की कांति और प्रभा सूर्य की भांति ही दैदीप्यमान है। इनके ही तेज से दसों दिशाएं आलोकित हैं। ब्रह्मांड की सभी वस्तुओं और प्राणियों में इन्हीं का तेज व्याप्त है।

 

इससे भक्तों के रोगों और शोकों का नाश होता है तथा उसे आयु, यश, बल और आरोग्य प्राप्त होता है। यह देवी अत्यल्प सेवा और भक्ति से ही प्रसन्न होकर आशीर्वाद देती हैं। सच्चे मन से पूजा करने वाले को सुगमता से परम पद प्राप्त होता है।
यह देवी आधियों-व्याधियों से मुक्त करती है गया।
नवजीत भारद्वाज ने बताया कि मां बगलामुखी धाम गुलमोहर सिटी में नवरात्रों के शुभ अवसर पर रोजाना मां नवदुर्गा एवं मां बगलामुखी जी का हवन यज्ञ किया जाता है उन्होंने कहा कि नवरात्रों में सृष्टि जागृत होती है अतः हमें इस अवसर का पूर्ण सदुपयोग कर मां भगवती नवदुर्गा एवं मां बगलामुखी जी का गुणगान, चिंतन, मनन एवं हवन यज्ञ जरुर करना चाहिए।

इस अवसर पर राकेश प्रभाकर, सोनू छाबड़ा, बावा खन्ना, रोहित बहल, एडवोकेट राज कुमार, मोहित बहल, अशोक शर्मा, विक्रात शर्मा, गोपाल मालपानी, राघव चढ्ढा, समीर कपूर, अश्विनी शर्मा, संजीव शर्मा, मुकेश चौधरी, संजीव सांविरया, मुनीश शर्मा, यज्ञदत्त, रोहित भाटिया, राकी, ओंकार सिंह,राकी, पंकज, करन वर्मा, मुकेश चौधरी, राजेश महाजन, मानव शर्मा, संजीव शर्मा, राजीव, दिशांत शर्मा, अशोक शर्मा, राकेश, ठाकुर बलदेव सिंह, साबी, लक्की, सुनील जग्गी, प्रिंस, सुनील वर्मा, पंकज, प्रवीण सहित भारी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे। आरती उपरांत प्रसाद रूपी लंगर भंडारे का भी आयोजन किया गया।

 

Sidhi Galbaat
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