Punjab

2.50 लाख रुपए लेकर भट्‌टी ट्रांसपोर्ट मालिक की 3 कार को लगा दिया फर्जी विंटेज वीआईपी नंबर

जालंधर में ट्रांसपोर्ट विभाग के आरटीए ऑफिस में तैनात क्लर्क का बड़ा फर्जीवाड़ा

डीटीओ की मुहर फर्जी पाई गई
जालंधर (अमरजीत सिंह लवला)
जालंधर में ट्रांसपोर्ट विभाग के आरटीए ऑफिस में तैनात क्लर्क का बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। क्लर्क ने 2.50 लाख रुपए लेकर भट्‌टी ट्रांसपोर्ट के मालिक समेत तीन की कार को फर्जी विंटेज वीआईपी रजिस्ट्रेशन नंबर अलॉट कर दिए। इसकी पोल तब खुली, जब उसमें लगी डीटीओ
की मुहर फर्जी पाई गई।
पुलिस ने जांच की तो पता चला कि क्लर्क ने जो नंबर उन्हें दिए, वह आरटीए के रिकॉर्ड में किसी दूसरे के ही नाम पर चल रहे हैं। तब डीटीओ ऑफिस में तैनात था क्लर्क फतेहगढ़ साहिब के रेलवे रोड हुमायूंपुर में रहने वाले नरेश कुमार ने बताया कि 299 डी-ब्लॉक, रणजीत एवेन्यू में रहने वाला अमृतपाल सिंह बतौर क्लर्क रीजनल ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी (आरटीए) में तैनात है। साल 2011 में वह डीटीओ (अब आरटीए) ऑफिस जालंधर में तैनात था।
उन्हें पता चला कि क्लर्क अमृतपाल सिंह विंटेज (पुराने) फैंसी वीआईपी नंबर लगाकर देता है। उनकी अमृतपाल से जान-पहचान हो गई।नरेश ने कहा कि इसी दौरान उनके दोस्त भट्‌टी ट्रांसपोर्ट के मालिक जंग सिंह लिबड़ा ने अपनी स्विफ्ट और दो और दोस्तों अमरीक सिंह व नरिंदर सिंह ने कहा कि हमें भी फैंसी नंबर लेना है। इस बारे में अमृतपाल से बात हुई तो उसने सिंगल डिजिट वाले पुराने वीआईपी नंबर लगाने का भरोसा दिया। उसने कहा कि सारी फॉर्मेलिटी पूरी कर देगा। इसके बदले उसने रजिस्ट्रेशन फीस के साथ 2.50 लाख रुपए मांगे।
ऑफिस जाकर दिए रुपए, फिर करने लगा बहाने बाजी उसने एक महीने का वक्त मांगा। इसके बाद तब डीटीओ (अब आरटीए) ऑफिस पहुंचकर उन्होंने क्लर्क अमृतपाल को 2.50 लाख रुपए दे दिए। रुपए लेने के बाद अमृतपाल ने उन्हें टालमटोल शुरू कर दिया। कभी कह देता कि छुटि्टयां आ गई तो कभी अफसर के ऑफिस न होने की बात कहता। इसमें काफी समय निकल गया। उन्होंने दबाव बनाया तो अमृतपाल ने उन्हें 3 गाड़ियों की आरसी और रजिस्ट्रेशन फीस के कागजात दे दिए।
उन्हें एक स्विफ्ट के लिए 1पीएएक्स 81,दूसरी के लिए पीएक्यू 81 और क्रूज के लिए पीएएक्स 9 नंबर की आरसी बनाकर दी गई। जब उन्होंने अपने स्तर पर इन दस्तावेजों की सच्चाई पता कराई तो यह सारे कागजात, आरसी रजिस्ट्रेशन फीस और डीटीओ की मुहर भी जाली निकली। उन्होंने जब अमृतपाल को कानूनी कार्रवाई की बात कही तो उसने नौकरी व इज्जत का वास्ता देकर कहा कि वो यह पैसे वापस लौटा देगा।
उसने 29 हजार रुपए वापस किए और 15-15 हजार के चैक दे दिए लेकिन उसके खाते में पैसे ही नहीं थे। किसी दूसरे के नाम पर थे नंबर पुलिस ने शिकायत मिलने के बाद इन नंबरों की जांच की तो पता चला कि पीएएक्स 9 नंबर रोपड़ के बलबीर सिंह के नाम पर था जबकि पीएएक्स 81 नंबर हरबंस के नाम पर है। इसके बाद पुलिस ने आरोपी क्लर्क अमृतपाल सिंह के खिलाफ ठगी व एंटी करप्शन एक्ट का केस दर्ज कर लिया है।

Sidhi Galbaat
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