मिडिल ईस्ट में ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच भड़के भीषण तनाव ने अब पूरी दुनिया की धड़कनें बढ़ा दी हैं। युद्ध की इस आंच से भारत की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा को महफूज रखने के लिए केंद्र की मोदी सरकार ने एक अहम कदम उठाया है। वैश्विक हालातों की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने मिडिल ईस्ट संकट से पैदा होने वाले तमाम मुद्दों पर पैनी नजर रखने और उनका त्वरित समाधान निकालने के लिए एक उच्च स्तरीय ‘इंटर-मिनिस्ट्रियल ग्रुप’ (अंतर-मंत्रालयी समूह) का गठन कर दिया है।
राजनाथ सिंह करेंगे अगुवाई, शाह और सीतारमण भी शामिल
देश की सुरक्षा और अर्थव्यवस्था को किसी भी संभावित झटके से बचाने के लिए बनाए गए इस बेहद खास ग्रुप की अध्यक्षता रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह खुद करेंगे। इस अहम समिति में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी समेत अन्य संबंधित विभागों के दिग्गज मंत्रियों को भी सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। यह ग्रुप मुख्य रूप से इस बात पर अपनी नजर बनाए रखेगा कि मिडिल ईस्ट में छिड़े इस महायुद्ध का भारत की ऊर्जा सुरक्षा, तेल-गैस की आपूर्ति और देश की समग्र आर्थिक स्थिरता पर क्या और कितना प्रभाव पड़ रहा है।
कच्चे तेल की सप्लाई पर मंडरा रहा खतरा, सरकार पूरी तरह अलर्ट
भारत सरकार के लिए यह त्वरित कदम उठाना इसलिए भी बेहद जरूरी हो गया था क्योंकि देश अपनी जरूरत का लगभग 88 प्रतिशत कच्चा तेल और आधी से ज्यादा प्राकृतिक गैस का आयात होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के रास्ते ही करता है। हालिया हमलों के बाद इस संवेदनशील समुद्री क्षेत्र में तनाव अपने चरम पर है, जिसके चलते तेल टैंकरों की सुरक्षित आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई है और वैश्विक ऊर्जा संकट गहराने का डर सता रहा है। ऐसे में यह नया ग्रुप पूरी तरह से एक्टिव रहकर यह सुनिश्चित करेगा कि अंतरराष्ट्रीय तनाव के चलते भारत में ईंधन की कीमतों में अचानक कोई बड़ा उछाल न आए और देश में किसी भी तरह की पैनिक स्थिति पैदा न हो।


