Sunday, April 19, 2026
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विजीलैंस ब्यूरो द्वारा जंग-ऐ-आज़ादी यादगार करतारपुर के निर्माण संबंधी फंडों में घपलेबाजी के दोष अधीन 26 व्यक्तियों के विरुद्ध केस दर्ज, 15 गिरफ़्ता

पंजाब विजीलैंस ब्यूरो ने आज जंग-ए-आज़ादी यादगार, करतारपुर के निर्माण संबंधी फंडों में बड़े स्तर पर घपलेबाज़ी करके सरकारी खजाने को करोड़ों रुपए का वित्तीय नुकसान पहुँचाए जाने के दोष अधीन 26 मुलजिमों के विरुद्ध केस दर्ज करके 15 अधिकारियों/कर्मचारियों समेत प्राइवेट व्यक्तियों को गिरफ़्तार कर लिया है, जिनको कल अदालत में पेश किया जायेगा।
इस संबंधी जानकारी देते हुए विजीलैंस ब्यूरो के प्रवक्ता ने बताया कि विजीलैंस इन्क्वायरी नम्बर 05/2023 की पड़ताल से जंग-ए-आज़ादी यादगार, करतारपुर के निर्माण के लिए पंजाब सरकार द्वारा जारी किए गए फंडों में की गई घपलेबाज़ी के कारण सरकारी खजाने को करोड़ों रुपए का वित्तीय नुकसान पहुँचाए जाने सम्बन्धी विजीलैंस ब्यूरो द्वारा एफ.आई.आर. नम्बर 9 तारीख 22.05.2024 को आई.पी.सी की धारा 420, 406, 409, 465, 467, 468, 471, 120-बी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1) ए समेत 13 (2) थाना विजीलैंस ब्यूरो, रेंज जालंधर में दर्ज कर लिया गया है।
उन्होंने बताया कि कुल 26 मुलजिमों में से अब तक 15 मुलजिमों को गिरफ़्तार किया गया है, जिनमें से दीपक कुमार सिंगल (मालिक) मैसर्ज दीपक बिल्डर निवासी राज गुरू नगर, लुधियाना (प्राईवेट व्यक्ति), अरविन्दर सिंह, चीफ़ इंजीनियर (रिटायर्ड)-कम-इंडीपैंडिट इंजीनियर जंग-ऐ-अजादी निवासी सैक्टर 38-बी चंडीगढ़, तेज राम कटनौरिया, ऐक्सियन पी.डब्ल्यू.डी (बी. एंड आर.) शाखा-जालंधर (चीफ़ इंजीनियर रिटायर्ड) निवासी पार्क ऐवैन्यू, जालंधर, राजीव कुमार अरोड़ा, जे.ई (एस.डी.ओ. रिटायर्ड) पी.डब्ल्यू.डी (बी. एंड आर.) सब-डिविजऩ प्रोवैशियल डिविजऩ-3 जालंधर निवासी सैक्टर-11, पंचकुला, रोहित कुमार जे.ई, पी.डब्ल्यू.डी (बी. एंड आर.) कंस्ट्रक्शन डिविजऩ-जालंधर (अब जे.ई मकैनिकल डिविजऩ जालंधर निवासी गाँव नूसी, जि़ला जालंधर, रघुविन्दर सिंह ऐक्सियन, उप मंडल अफ़सर, लोक निर्माण विभाग (भ. एवं म. शाखा) इलैक्ट्रिकल डिवीजन नि वासी सैक्टर-110, मोहाली, संतोश राज, ऐक्सियन, इलैक्ट्रिकल डिविजऩ अमृतसर (रिटायर्ड) निवासी ग्रीन सिटी अकाश ऐवैन्यू, अमृतसर, हरपाल सिंह एस.डी.ओ, इलैक्ट्रिकल सब-डिविजऩ जालंधर (ऐक्सियन इलैक्ट्रिकल लुधियाना) निवासी प्रीत नगर लुधियाना, जतिन्दर अर्जुन एस.डी.ओ अब ऐक्सियन इलैक्ट्रिकल सब- डिविजऩ जालंधर (ऐक्सियन मकैनिकल डिविजऩ पी.डब्ल्यू.डी ( बी. एंड आर. जालंधर) निवासी जालंधर कैंट, हरप्रीत सिंह, जे.ई इलैक्ट्रिकल सब-डिविजऩ जालंधर कैंट निवासी गाँव जलाल भुलाना, जि़ला कपूरथला, मनदीप सिंह, जे.ई. इलैक्ट्रिकल सब-डिविजऩ जालंधर निवासी अर्बन एस्टेट फेज-2 जालंधर, एन.पी. सिंह, ऐक्सियन, वॉटर सप्लाई और सेनिटेशन विभाग निवासी छोटी बारांदरी जालंधर, रजत गोपाल, एस.डी.ओ, वॉटर सप्लाई और सेनिटेशन विभाग जालंधर (ऐक्सियन वॉटर सप्लाई और सेनिटेशन विभाग तरन तारन) निवासी गोपाल पार्क कपूरथला, गौरवदीप, जे.ई वॉटर सप्लाई और सेनिटेशन विभाग डिविजऩ-1 जालंधर नि वासी मास्टर तारा सिंह नगर, जालंधर और रोहित कौंडल, जे.ई वॉटर सप्लाई और सेनिटेशन विभाग डिविजऩ-3 जालंधर, सब-डिविजऩ नकोदर, जि़ला जालंधर निवासी मधूबन कॉलोनी, कपूरथला को गिरफ़्तार किया गया। जिनको कल अदालत में पेश करके रिमांड हासिल करके पूछताछ की जायेगी। इस मुकदमे के बाकी फरार मुलजि़म विनय बुबलानी, आई.ए.एस. पूर्व मुख्य कार्यकारी अफ़सर, जंग-ऐ-आज़ादी और अन्यों को गिरफ़्तार करने के लिए उनके आवास और अन्य ठिकानों पर दबिश की जा रही है। इस केस की आगे की जाँच जारी है।
इस सम्बन्धी जानकारी देते हुए विजीलैंस ब्यूरो के प्रवक्ता ने बताया कि पड़ताल में पाया गया कि साल 2012 में समकालीन पंजाब सरकार ने महाराजा रणजीत सिंह के समय से लेकर भारत की आज़ादी तक भाव साल 1947 तक भारत की आज़ादी के संघर्ष और आज़ादी में पंजाबियों की भूमिका को दिखाती यादगार बनाने का प्रस्ताव रखा था, जिससे आने वाली पीढिय़ाँ भारत के स्वतंत्रता संग्राम में पंजाबियों के इतिहास और योगदान संबंधी अवगत हों। पंजाब सरकार ने उपरोक्त प्रोजैक्ट को पूरा करने के लिए 315 करोड़ रुपए की राशि मंजूर की और नेशनल हाईवे करतारपुर जि़ला जालंधर पर स्थित 25 एकड़ प्रमुख ज़मीन इस मंतव्य के लिए अलॉट की गई थी।
उन्होंने बताया कि पंजाब सरकार द्वारा इस प्रोजैक्ट के काम को पूरा करने के लिए अलग-अलग कमेटियों का गठन किया गया था, जिसमें बरजिन्दर सिंह हमदर्द को प्रधान नियुक्त किया गया था। इस प्रोजैक्ट के निर्माण सम्बन्धी सारी देख-रेख बरजिन्दर सिंह हमदर्द प्रधान कार्यकारी कमेटी/प्रबंधकीय कमेटी और विनय बुबलानी आई.ए.एस. पूर्व मुख्य कार्यकारी अफ़सर, जंग-ऐ-आज़ादी द्वारा की गई, और बाकी किसी भी कमेटी सदस्यों को फाउडेशन के बनाए गए रूल्ज एंड बाई-लॉज़ और डीड ऑफ डैक्लारेशन के सीधे तौर पर कोई अधिकार नहीं दिए गए थे। बरजिन्दर सिंह हमदर्द और विनय बुबलानी द्वारा उक्त नियमों की उल्लंघना करते हुए जंग-ए-आज़ादी के निर्माण से सम्बन्धित सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट, लैंडस्केपिंग, संचालन और देखभाल/दस्तावेज़ी फि़ल्म बनाने के काम बिना टैंडर प्रणाली अपनाए अपने ख़ास ठेकेदार/व्यक्ति दीपक बिल्डजऱ्/शाम बैनेगल फि़ल्म निर्देशक को सौंप दिए गए।
अधिक विवरण देते हुए उन्होंने बताया कि बरजिंदर सिंह हमदर्द और विनय बुबलानी दोनों ने अपने निजी लाभ के लिए पंजाब फ्रीडम मूवमेंट मेमोरियल फाउंडेशन के डीड ऑफ डिक्लेरेशन (2012) के क्लॉज नंबर 9 और 10 में दी गई अपनी शक्तियों का दुरुपयोग किया और ठेकेदारों दीपक बिल्डर्स/गोदरेज एंड बॉयस कंपनी और सरकारी अधिकारियों/कर्मचारियों के साथ मिलीभगत करके जंग-ए-आज़ादी प्रोजैक्ट के निर्माण राज रावेल मास्टर टैक्निकल कंसलटेंट (एम.टी.सी.) एन.एस./ई.डी.सी., क्रिएटिव टेक्नोलोजी सोल्यूशन लिमिटेड (म्युजिय़म सलाहकार) से प्लान के मुताबिक प्रोजैक्ट को मुकम्मल करवाए बगैर नॉन शड्यूल आइटम की आड़ में उक्त ठेकेदारों/ कम्पनियों को उनकी बिडिंग राशियों से भी अधिक की अदायगियाँ कीं।
पड़ताल के दौरान सामने आया है कि जंग-ए-आज़ादी के निर्माण का नक्शा/प्लान तैयार करने के लिए राज रवेल मास्टर टैक्निकल कंसलटेंट को करीब 6 करोड़ और ई.डी.सी., क्रिएटिव टेक्नोलोजी सोल्यूशन लिमिटेड को करीब 3 करोड़ रुपए दिए गए थे, इसके बावजूद बरजिन्दर सिंह हमदर्द और विनय बुबलानी द्वारा असली बिलों (बी.ओ.क्यू.) को अनदेखा करते हुए और उक्त दोनों कंसलटैंट्स के साथ जाँचे शिड्यूल आईटम्स स्वीकृत कर दीं, जैसे कि जंग-ए-आज़ादी में बनने वाले 6 गुबन्दों को आर.सी.सी. स्ट्रक्चर की बजाय स्टील स्ट्रक्चर में बनाकर करोड़ों रुपए वसूल कर लिए गए। स्टोन क्लैडिंग के काम के लिए हिल्टी क्रैंप्स का प्रयोग, सैटरिंग और शटरिंग की आइटम को नॉन-शड्यूल आइटम बनाकर अधिक रेट देकर करोड़ों रुपए अतिरिक्त अदायगी सम्बन्धित ठेकेदार को की गई। इसके अलावा दीपक बिल्डजऱ् द्वारा प्राईमरी स्टील का मुद्दा उठाकर बरजिन्दर सिंह हमदर्द और विनय बुबलानी सी.ई.ओ की शह पर बिना कार्यकारी समिति की मंजूरी के बिना माह अप्रैल 2015 से प्राईमरी स्टील (टाटा स्टील) खरीद करना शुरू कर दिया। बरजिन्दर सिंह हमदर्द प्रधान और श्री विनय बुबलानी सी.ई.ओ द्वारा कार्यकारी समिति की मीटिंग में करीब तीन महीने बाद दीपक बिल्डर को प्राईमरी स्टील के नाम पर टाटा स्टील खरीदने की मंजूरी देकर करोड़ों रुपए की अदायगी कर दी गई।
प्रवक्ता ने बताया कि बताया कि जंग-ए-आज़ादी यादगार के निर्माण एम.टी.सी राज रावेल और म्युजिय़म कनसलटैंट ई.डी.सी क्रीएविट टेक्नोलोजी सोल्यूशन के प्लानों के मुताबिक नहीं हुई है, और एम.टी.सी राज रावेल द्वारा तैयार किये गए बिलों में सिविल की कुल 235 आइटमों में से 103 आइटमों को बिल/टैंडर को अनदेखा कर नॉन शड्यूल करके ठेकेदार दीपक बिल्डर को करोड़ों रुपए का अतिरिक्त वित्तीय लाभ दिया गया, जिस कारण इस पैसे से बनाए जाने वाले काफी निर्माण जैसे कि 10 प्रतिमाएं, पहली मंजिल पर स्थित 04 गैलरियाँ, मेमोरियल आइकन, फूड कोर्ट, ऐटरियम आदि आज भी अधूरे पड़े हुए हैं। इसके अलावा बरजिन्दर सिंह हमदर्द जो कि मैनेजमेंट कमेटी का भी प्रधान था, द्वारा करीब 14 करोड़ की लागत के साथ लेजर शो बनाया गया था, जो कि साल 2020 से बंद पड़ा है, जिससे सरकार को वित्तीय नुकसान हुआ है।
यह इमारत बिलों और डी.एन.आई.टी टैंडर के मुताबिक अभी भी मुकम्मल तौर पर तैयार नहीं हुई। जंग-ए-आज़ादी प्रोजैक्ट के कार्यों का अलग-अलग टैक्नीकल टीमों से विचार करवाया गया, जिनके द्वारा दी गई रिपोर्ट के मुताबिक ठेकेदारों को अतिरिक्त अदायगी करके सीधे तौर पर 27,23,62,615 रुपए का सरकार को वित्तीय नुकसान पहुँचाया है। जंग-ए-आज़ादी प्रोजैक्ट का जो काम अधूरा पड़ा है।
इसके अलावा जंग-ए-आज़ादी में लगभग 14 करोड़ रुपए की लागत के साथ लगाया गया लेजर शो 2020 से बंद पाया गया और बरजिन्दर सिंह हमदर्द प्रशासनिक समिति के प्रधान थे, परन्तु उन्होंने अपनी जि़म्मेदारी नहीं निभाई और इस लेजर शो को ग़ैर-कार्यशील रखा, जिससे सरकार का बहुत वित्तिय नुकसान हुआ।
उन्होंने कहा कि मुलजिम बरजिन्दर सिंह हमदर्द और विनय बुबलानी, आईएएस प्रधान और सी.ई.ओ कार्यकारी समिति क्रमवार एमटीसी के अनुसार स्मारक के निर्माण करवाने और योजना और बिल ऑफ क्वांटिटी/डीएआईटी टैंडर के मुताबिक काम करावाने में असफल रहे। कई टीमों द्वारा जंग-ए-आज़ादी प्रोजैक्ट के काम का जायज़ा लिया गया और उनके द्वारा दी गई रिपोर्ट के अनुसार यह निष्कर्ष निकला है कि निर्माण में ठेकेदारों को अतिरिक्त पैसे देकर जंग-ए-आज़ादी यादगार सरकारी खजाने को 27,23,62,615 रुपए का वित्तीय नुकसान हुआ है। इसके अलावा जंग-ए-आज़ादी प्रोजैक्ट का काम जो अभी भी अधूरा है या गलत तरीके से बनाया गया है, का और वित्तीय बोझ पड़ेगा।
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