हादसे का असर दिखना भी शुरू हो गया है क्योंकि एअर इंडिया ने अपनी लंबी दूरी की उड़ानों में 15 प्रतिशत की कटौती करने का एलान किया है। एअर इंडिया ने 21 जून से 15 जुलाई 2025 तक हर हफ्ते 38 अंतरराष्ट्रीय उड़ानें घटाने और तीन विदेशी मार्ग पर सेवाएं बंद करने का ऐलान किया है।
अहमदाबाद में बीती 12 जून को एअर इंडिया की फ्लाइट एआई-171 के साथ हुए हादसे को एक हफ्ते से ज्यादा का समय बीत चुका है, लेकिन अभी भी देश का नागरिक उड्डयन क्षेत्र अभी तक उस त्रासदी से उबर नहीं पाया है। हादसे के बाद से 80 से ज्यादा एअर इंडिया फ्लाइट्स अब तक रद्द हो चुकी हैं। एअर इंडिया हादसे का असर भारतीय नागरिक उड्डयन क्षेत्र पर बहुत गहरा हुआ है, जिससे उबरने में समय लग सकता है। तो आइए जानते हैं कि अहमदाबाद विमान हादसे के बाद से भारतीय एविएशन इंडस्ट्री में क्या बदलाव आ सकते हैं-
भारतीय नागरिक उड्डयन सेक्टर के लिए झटका
नागरिक उड्डयन उद्योग बीते कुछ दशकों में यात्रा का सबसे सुरक्षित माध्यम बनकर उभरा है। इसके चलते नागरिक उड्डयन उद्योग ने तेजी से विकास भी किया है, लेकिन अभी भी विमानन कंपनियों की वित्तीय स्थिति चिंता का विषय बनी हुई है। दरअसल उच्च लागत, जबरदस्त प्रतिस्पर्धा, खराब वित्तीय प्रबंधन ऐसे तथ्य हैं, जिनकी वजह से विभिन्न विमानन कंपनियां घाटे में हैं। ऐसे में विमानन कंपनियों के लिए ऐसा वित्तीय मॉडल तलाशने की जरूरत आन पड़ी है, जिससे इन्हें डूबने से बचाया जा सके। विमान सुरक्षा के लिहाज से यह फैक्टर अहम है। भारतीय नागरिक उड्डयन सेक्टर अगले 20 वर्षों में तेजी से बढ़ने वाला सेक्टर रहेगा, लेकिन अहमदाबाद के हादसे ने इस छवि पर दाग जरूर लगाया है।
विमानन बाजार नियामन में हो सकते हैं बड़े बदलाव
भारत का अब तक विमानन सुरक्षा रिकॉर्ड अच्छा रहा है। लेकिन एअर इंडिया हादसे ने बहुत कुछ बदल दिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने दुर्घटना के बाद एअर इंडिया के बोइंग 787 बेड़े की निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही कर्मचारियों की कमी, अपर्याप्त वित्तपोषण और अपर्याप्त पेशेवर विशेषज्ञता जैसी समस्याओं के अलावा भारत के विमानन बाजार नियामकों में बड़े बदलाव की जरूरत महसूस की जा रही है। यह बदलाव केवल एयरलाइंस के बारे में नहीं है, बल्कि हवाई यातायात नियंत्रण, हवाई अड्डों, प्रशिक्षण और एमआरओ (रखरखाव, मरम्मत और ओवरहाल) प्रणालियों सहित पूरे बुनियादी ढांचे में दिखेगा।
एअर इंडिया पर उठे सवाल
टाटा संस और सिंगापुर एयरलाइंस द्वारा अधिग्रहण के बाद से एयर इंडिया को घाटे से मुनाफे वाली निजी एयरलाइंस में बदलने की कोशिश हो रही है। अब अहमदाबाद विमान हादसे ने एअर इंडिया को पटरी पर लाने की कोशिशों को बड़ा झटका दिया है। हादसे में हुए अधिकतर नुकसान की भरपाई बीमा से हो जाएगी, लेकिन इसके बाद भी एअर इंडिया की वित्तीय स्थिति पर यह हादसा बड़ा बोझ बन सकता है, जो पहले से ही पुराने विमानों और खराब सर्विस की समस्या से जूझ रही है।
हादसे का असर दिखना भी शुरू हो गया है क्योंकि एअर इंडिया ने अपनी लंबी दूरी की उड़ानों में 15 प्रतिशत की कटौती करने का एलान किया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय मार्गों पर भारतीय विमानन कंपनियों की हिस्सेदारी 20 प्रतिशत से थोड़ी अधिक है। अब एअर इंडिया हादसे के बाद सरकार विदेशी एयरलाइंस के लिए अधिक द्विपक्षीय मार्ग खोलने पर विचार कर सकती है।
क्यों रद्द हो रही हैं उड़ानें
एअर इंडिया ने ‘वाइड बॉडी एयरक्राफ्टस’ की उड़ानों में कटौती की है। इन विमानों को लंबी दूरी वाली यात्राओं के लिए इस्तेमाल किया जाता है। एयर इंडिया के पास बोइंग-787 ड्रीमलाइनर विमान हैं, जो बड़े साइज के एयरक्राफ्ट्स हैं। गुजरात के अहमदाबाद में जो विमान हादसा हुआ, वह भी बोइंग-787 ड्रीमलाइनर प्लेन ही था। हादसे के बाद DGCA ने बोइंग-787 विमानों की जांच के आदेश दिए हैं। अभी जांच चल रही है, जो जुलाई महीने तक पूरी होगी। इसलिए एअर इंडिया ने बोइंग-787 ड्रीमलाइनर प्लेन की उड़ानें कैंसिल कर दी हैं। इसके अलावा तकनीकी और परिचालन संबंधी समस्याओं के चलते भी विभिन्न उड़ाने रद्द हो रही हैं। दरअसल हादसे के बाद विमानन कंपनियों के साथ ही हवाई यात्रियों का विश्वास भी कमजोर हुआ है। ऐसे में उड़ानें रद्द होने की बाढ़ सी आ गई है। इस्राइल के साथ जारी संघर्ष के चलते ईरान का हवाई क्षेत्र बंद है। इसके कारण भी उड़ान सेवाएं प्रभावित हुई हैं।
एअर इंडिया ने अंतरराष्ट्रीय उड़ाने घटाने का एलान किया
एअर इंडिया ने 21 जून से 15 जुलाई 2025 तक हर हफ्ते 38 अंतरराष्ट्रीय उड़ानें घटाने और तीन विदेशी मार्ग पर सेवाएं बंद करने का ऐलान किया है। हालिया विमान दुर्घटना के बाद सुरक्षा जांच बढ़ाई गई है, जिससे उड़ानों पर असर पड़ा है।
प्रभावित उड़ानों का विवरण
15 जुलाई 2025 तक निलंबित मार्ग:
दिल्ली-नैरोबी (AI961/962) – 4 साप्ताहिक उड़ानें*
अमृतसर-लंदन (गैटविक) (AI169/170) – 3 साप्ताहिक उड़ानें
गोवा (मोपा)-लंदन (गैटविक) (AI145/146) – 3 साप्ताहिक उड़ानें
15 जुलाई 2025 तक कम आवृत्ति वाले मार्ग:
उत्तरी अमेरिका
दिल्ली-टोरंटो: 13 साप्ताहिक से घटाकर 7 साप्ताहिक उड़ानें
दिल्ली-वैंकूवर: 7 साप्ताहिक से घटाकर 5 साप्ताहिक उड़ानें
दिल्ली-सैन फ्रांसिस्को: 10 साप्ताहिक से घटाकर 7 साप्ताहिक उड़ानें
दिल्ली-शिकागो: 7 साप्ताहिक से घटाकर 3 साप्ताहिक उड़ानें
दिल्ली-वाशिंगटन (डुलस): 5 साप्ताहिक से घटाकर 3 साप्ताहिक साप्ताहिक उड़ानें
यूरोप
दिल्ली-लंदन (हीथ्रो): साप्ताहिक 24 से घटाकर साप्ताहिक 22 उड़ानें
बंगलूरू-लंदन (हीथ्रो): साप्ताहिक 7 से घटाकर साप्ताहिक 6 उड़ानें
अमृतसर-बर्मिंघम और दिल्ली-बर्मिंघम: साप्ताहिक 3 से घटाकर साप्ताहिक 2 उड़ानें
दिल्ली-पेरिस: साप्ताहिक 14 से घटाकर साप्ताहिक 12 उड़ानें
दिल्ली-मिलान: साप्ताहिक 7 से घटाकर साप्ताहिक 4 उड़ानें
दिल्ली-कोपेनहेगन: साप्ताहिक 5 से घटाकर साप्ताहिक 3 उड़ानें
दिल्ली-वियना: साप्ताहिक 4 से घटाकर साप्ताहिक 3 उड़ानें
दिल्ली-एम्सटर्डम: साप्ताहिक 7 से घटाकर साप्ताहिक 5 उड़ानें
ऑस्ट्रेलिया
दिल्ली-मेलबर्न और दिल्ली-सिडनी: साप्ताहिक 7 से घटाकर साप्ताहिक 5 उड़ानें
सुदूर पूर्व
दिल्ली-टोक्यो (हनेडा): साप्ताहिक 7 से घटाकर 6 साप्ताहिक उड़ानें
दिल्ली-सियोल (इंचियोन): 5 साप्ताहिक से घटाकर 4 साप्ताहिक उड़ानें**


