Sunday, April 19, 2026
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2 करोड़ का लेनदेन…, 400 बांग्लादेशियों को बनाया भारतीय नागरिक, फर्जी पासपोर्ट रैकेट में बड़ा खुलासा

पश्चिम बंगाल में अवैध बांग्लादेशी नागरिकों को भारतीय बताकर फर्जी पासपोर्ट बनवाने के संगठित रैकेट का बड़ा खुलासा हुआ है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच में अब तक 400 से अधिक बांग्लादेशी घुसपैठियों की पहचान हुई है, जिन्होंने फर्जी दस्तावेज़ों के आधार पर भारतीय पासपोर्ट हासिल किए थे।

ईडी ने यह जानकारी कोलकाता के क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय से प्राप्त की है और इस पूरे नेटवर्क की जड़ें अब सीमापार तक फैली होने का शक है।

पाकिस्तान कनेक्शन भी आया सामने
ईडी ने हाल ही में नदिया जिले के चकदाहा शहर में चल रहे इस फर्जी पासपोर्ट रैकेट के एक प्रमुख संचालक इंदुभूषण हलदर को गिरफ्तार किया है। वह पाकिस्तानी नागरिक आजाद मलिक का करीबी सहयोगी बताया गया है। आजाद मलिक को इसी साल की शुरुआत में इसी मामले में पकड़ा गया था। वह पहले बांग्लादेश में फर्जी पहचान पत्रों के जरिये वहां का नागरिक बना और बाद में भारत में घुसकर भारतीय दस्तावेजों के आधार पर पासपोर्ट बनवाने लगा। मलिक ने कोलकाता में किराए के मकान से हवाला और फर्जी पासपोर्ट का नेटवर्क चला रखा था। पूछताछ में उसने इंदुभूषण का नाम अपने सहयोगी के तौर पर बताया।

2 करोड़ से अधिक का लेनदेन और 300 पासपोर्टों की फर्जीबाज़ी
ईडी सूत्रों के अनुसार, इंदुभूषण ने अवैध रूप से 300 से अधिक बांग्लादेशियों के पासपोर्ट बनवाए। जांच में 2 करोड़ रुपये से अधिक के वित्तीय लेनदेन का भी खुलासा हुआ है। इंदुभूषण ने इस रैकेट को चलाने के लिए एक साइबर कैफे किराए पर लिया था और फर्जी दस्तावेज़ों से पासपोर्ट आवेदन तैयार करता था। उसे कोलकाता की अदालत में पेश करने के बाद 27 अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।

पांच लाख रुपये में बनता था ‘भारतीय पासपोर्ट’
ईडी की जांच में सामने आया है कि प्रत्येक फर्जी पासपोर्ट के लिए 5 लाख रुपये वसूले जाते थे। इसके लिए पहले बांग्लादेशी नागरिकों के नाम पर आधार और पैन कार्ड बनाए जाते, फिर मतदाता सूची में नाम जुड़वाया जाता, और अंत में इन फर्जी पहचान पत्रों के आधार पर पासपोर्ट तैयार किया जाता था। इस पूरे खेल में डाक विभाग के कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत भी सामने आई है, जो पासपोर्ट की डिलीवरी के दौरान दस्तावेज़ सीधे रैकेट संचालकों को सौंप देते थे।

ईडी की कार्रवाई जारी
ईडी अब इस पूरे नेटवर्क के सरगनाओं और सरकारी मिलीभगत के एंगल की जांच कर रही है। एजेंसी का मानना है कि यह रैकेट न केवल बांग्लादेश बल्कि पाकिस्तान और नेपाल तक फैला हुआ है, और इसमें कई स्थानीय एजेंट और अधिकारी भी शामिल हो सकते हैं।

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