Monday, April 20, 2026
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शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने दी सीएम को 40 दिनों का अल्टीमेटम, हिंदू होने का दें प्रमाण

वाराणसी। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और प्रयागराज प्रशासन के बीच हुए माघ मेले में स्नान को लेकर विवाद थमता नजर नहीं आ रहा है। इस बीच स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने वाराणसी में शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस किया और सीधे सीएम योगी आदित्यनाथ के हिंदू होने का प्रमाण मांगते हुए 40 दिनों का अल्टीमेटम दिया। यह अल्टीमेटम शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने उत्तर प्रदेश में गौ हत्या और निर्यात को बंद करने को लेकर दिया है। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने 40 दिनों के अंदर उत्तर प्रदेश में गौ हत्या पर रोक के साथ गौ को राज्य माता का दर्जा देने और निर्यात को बंद करने का शासनादेश जारी करने की मांग किया है। यदि फिर दिए समय के अंदर ऐसा नहीं होता है, तो शंकराचार्य ने 10 और 11 मार्च को लखनऊ में संतो के समागम करने की चेतावनी दिया है। इस समागम में सीएम योगी आदित्यनाथ को “नकली हिंदू” घोषित किए जाने की बात कही है।

महाराष्ट्र और उत्तराखंड से सीख लेने की सलाह, उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा मांस का निर्यात : अविमुक्तेश्वरानंद

वाराणसी में शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने उत्तर प्रदेश सरकार को महाराष्ट्र और उत्तराखंड से सीख लेने की सलाह देते हुए गौ को राज्यमाता का दर्जा देने की मांग की है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र और उत्तराखंड में गौ को राज्यमाता का दर्जा दिया जा चुका है, लेकिन प्रभु श्री राम और भगवान श्री कृष्ण की नगरी वाले प्रदेश में ऐसा नहीं है। इसके साथ ही अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने दावा किया कि भारत से जितना मांस का निर्यात होता है, उसमें 40 प्रतिशत मांस उत्तर प्रदेश से निर्यात किया जाता है। इसे रोकना चाहिए, क्योंकि गौ मांस के निर्यात से राम राज्य नहीं आ सकता है। यदि इसे रोका नहीं जाता तो हम मानेंगे कि आपका हिंदुत्व केवल दिखावटी है।

माघ मेले में इस वर्ष दोबारा नहीं जाएंगे शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद

माघ मेले में स्नान को लेकर अधिकारियों द्वारा माफी मांगे जाने के दावों के साथ दोबारा प्रयागराज में स्नान के लिए जाने के सवाल पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि जब मेरा अपमान हुआ तो मैं वहां था, तब अधिकारियों ने माफी नहीं मांगी, माफी मांगने का भी एक तरीका होता है, लेकिन अधिकारियों को तनिक भी इसका अफसोस नहीं है। एक बार फिर स्नान के लिए काशी से प्रयागराज जाने पर कहा कि अब अगले साल ही माघ स्नान के लिए जाएंगे। इस बार जब प्रयागराज से वापस आ गए तो क्यों जाएंगे ।

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