Thursday, April 16, 2026
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हीमोफीलिया के लक्षणों को न करें नजरअंदाज, समय पर जांच बचा सकती है जीवन

हीमोफीलिया एक ऐसी बीमारी है जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं, लेकिन यह काफी गंभीर हो सकती है। इसमें शरीर में कुछ थक्के बनाने वाले कारकों की कमी के कारण खून सही तरीके से जम नहीं पाता, जिससे अगर चोट लग जाए तो सामान्य से ज्यादा खून बह सकता है। कई बार तो बिना किसी बड़ी चोट के भी अंदरूनी ब्लीडिंग होने लगती है, जो धीरे-धीरे खतरनाक रूप ले सकती है। इसलिए इसके लक्षणों को समय रहते पहचानना बेहद जरूरी है।

विश्व हीमोफीलिया दिवस हर साल 17 अप्रैल को मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य हीमोफीलिया और अन्य वंशानुगत रक्तस्राव विकारों के बारे में दुनियाभर के लोगों में जागरूकता फैलाना है। इस तिथि को फ्रैंक श्नाबेल के जन्मदिन के सम्मान में चुना गया था, जिन्होंने वर्ल्ड फेडरेशन ऑफ हीमोफिलिया की स्थापना की थी।

इस दिन का मकसद सिर्फ जानकारी देना नहीं है, बल्कि उन लोगों की परेशानियों को भी सामने लाना है जिन्हें समय पर बीमारी का पता नहीं चल पाता या सही इलाज नहीं मिल पाता। आज भी दुनिया में बहुत से लोग ऐसे हैं जो बिना निदान के जी रहे हैं। ऐसे में जागरूकता अभियान लोगों को लक्षण पहचानने, जल्दी जांच कराने और सही इलाज तक पहुंच बनाने के लिए प्रेरित करते हैं।

अक्सर लोग सोचते हैं कि अगर थोड़ा ज्यादा खून बह गया तो इसमें खास बात क्या है, लेकिन हीमोफीलिया के मामले में यही एक बड़ी समस्या बन सकता है। खासकर बच्चों में यह समस्या ज्यादा देखने को मिलती है। जब बच्चा रेंगना या चलना शुरू करता है, तब उसके शरीर पर बार-बार नीले निशान दिखने लगते हैं। कई बार ये निशान बिना किसी स्पष्ट चोट के भी आ जाते हैं। यही शुरुआती संकेत हो सकते हैं जिन्हें नजरंदाज नहीं करना चाहिए।

अगर किसी छोटे कट या चोट के बाद खून काफी देर तक बहता रहे और जल्दी बंद न हो, तो यह भी एक चेतावनी हो सकती है। इसी तरह, इंजेक्शन लगने या टीका लगने के बाद लंबे समय तक खून निकलना भी सामान्य नहीं है। कई बच्चों में नाक से बार-बार खून आना या मसूड़ों से खून बहना भी देखा जाता है। आमतौर पर लोग इसे हल्के में लेते हैं, लेकिन बार-बार ऐसा होना हीमोफीलिया का संकेत हो सकता है।

एक और अहम लक्षण है जोड़ों में दर्द और सूजन। कई बार बच्चे या बड़े बिना किसी चोट के ही घुटनों, कोहनियों या टखनों में दर्द की शिकायत करते हैं। यह दर्द अंदरूनी रक्तस्राव की वजह से हो सकता है। अगर समय पर इसका इलाज न किया जाए, तो जोड़ों को स्थायी नुकसान भी हो सकता है और चलने-फिरने में दिक्कत आने लगती है।

कुछ मामलों में पेशाब या मल में खून आना भी देखा जाता है, जो शरीर के अंदर हो रही ब्लीडिंग का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है। इसके अलावा अगर किसी सर्जरी या दांत निकलवाने के बाद खून ज्यादा समय तक बहता रहे, तो यह भी हीमोफीलिया की ओर इशारा कर सकता है।

हीमोफीलिया ज्यादातर आनुवंशिक होता है, यानी यह परिवार में पीढ़ी दर पीढ़ी चल सकता है। अगर परिवार में किसी को यह बीमारी रही है, तो बच्चों में इसके होने की संभावना बढ़ जाती है, हालांकि कुछ मामलों में यह बिना किसी पारिवारिक इतिहास के भी हो सकता है। अच्छी बात यह है कि हीमोफीलिया का पता लगाने के लिए खून की साधारण जांच ही काफी होती है। इसमें डॉक्टर यह देखते हैं कि खून जमने में कितना समय लग रहा है और शरीर में क्लॉटिंग फैक्टर का स्तर कितना है। अगर समय पर जांच हो जाए, तो इलाज शुरू किया जा सकता है और कई जटिलताओं से बचा जा सकता है।

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