देश की सर्वोच्च अदालत में रोजाना कई मामलों की सुनवाई होती है, लेकिन कई बार जजों की टिप्पणियां और फैसले चर्चा का विषय बन जाते हैं। ऐसा ही एक दिलचस्प और हैरान करने वाला मामला सुप्रीम कोर्ट में सामने आया, जहां एक पति को अदालत में दलीलें देना भारी पड़ गया। दिलचस्प बात यह रही कि पत्नी ने तलाक के एवज में कोई गुजारा भत्ता (एलिमनी) नहीं मांगा था, लेकिन कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए पति को 50 लाख रुपये देने का कड़ा आदेश सुना दिया। सुनवाई के दौरान पति के बेरोजगार होने की दलील पर सुप्रीम कोर्ट ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि तलाक की कार्यवाही शुरू होते ही अचानक हर कोई बेरोजगार क्यों हो जाता है।
सॉफ्टवेयर इंजीनियर से अचानक बन गया ‘फ्रीलांसर’
बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट में एक तलाक के मामले की सुनवाई चल रही थी। पत्नी ने क्रूरता और परित्याग के आधार पर तलाक की अर्जी दी थी, लेकिन पति अदालत में रट लगाए हुए था कि उसे तलाक नहीं चाहिए। जब कोर्ट ने पति से पूछा कि क्या वह एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर है, तो उसने जवाब दिया कि वह अब एक ‘फ्रीलांसर’ है। इस जवाब पर जज ने तंज कसते हुए कहा कि तलाक का केस शुरू होने के बाद हर कोई बेरोजगार बन जाता है। जज ने कहा कि कभी पत्नी कहती है कि उसने इस्तीफा दे दिया है, तो कभी पति कहता है कि उसने नौकरी छोड़ दी है या उसे निकाल दिया गया है, और अब इस मामले में आप अचानक फ्रीलांसर बन गए हैं।
झूठे आरोप साबित न कर पाने पर लगाई क्लास
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पति से कड़े सवाल किए। कोर्ट ने पूछा कि क्या वह अपनी पत्नी पर लगाए गए व्यभिचार के आरोपों को साबित कर पाया है? इस पर पति का जवाब ‘ना’ में था। सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि व्यभिचार का झूठा आरोप लगाना, जिसे आप अदालत में साबित ही न कर सकें, यह अपने आप में तलाक दिए जाने का एक बड़ा आधार है। इसी बीच जब कोर्ट ने पूछा कि क्या पत्नी गुजारा भत्ता मांग रही है, तो पति ने कहा कि वह ऐसी कोई डिमांड नहीं कर रही है। इस पर कोर्ट ने कहा कि तब तो आपको इस बात से खुश होना चाहिए।
बिना मांगे पत्नी को दिलाए 50 लाख, कस्टडी की मांग भी खारिज
मामले की सुनवाई के दौरान पत्नी की तरफ से अदालत को बताया गया कि ट्रायल कोर्ट और हाई कोर्ट द्वारा तलाक के फैसले को सही ठहराए जाने के बाद उसने दूसरी शादी कर ली है। इसके बावजूद पति बार-बार अपनी बात रखने की कोशिश कर रहा था। कोर्ट ने इसके बाद सीधा आदेश देते हुए कहा कि पति अपनी पत्नी को 50 लाख रुपये एलिमनी के तौर पर दे। पति ने हैरान होते हुए कहा कि पत्नी ने तो इसकी मांग ही नहीं की है! इस पर सुप्रीम कोर्ट ने दो टूक जवाब देते हुए कहा- “यह उसकी मांग नहीं है, यह हम कह रहे हैं।” आखिर में जब घबराए पति ने बच्चे की कस्टडी को लेकर मध्यस्थता की गुहार लगाई, तो अदालत ने उसकी इस अपील को भी सिरे से खारिज कर दिया।


