Monday, May 18, 2026
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बच्चा पैदा होने पर इस राज्य की सरकार देंगी 40,000 रुपये, जानिए क्यों दिया जा रहा बढ़ावा

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू द्वारा तीसरे और चौथे बच्चे के लिए वित्तीय प्रोत्साहन की घोषणा राज्य में लगातार घटती प्रजनन दर (टीएफआर) को लेकर बढ़ती चिंता के बीच की गई है।

श्रीकाकुलम जिले में एक जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि सरकार तीसरे बच्चे के लिए 30,000 रुपये और चौथे बच्चे के लिए 40,000 रुपये देगी। संयुक्त आंध्र प्रदेश में 1995 से 2004 तक मुख्यमंत्री रहने के दौरान जनसंख्या नियंत्रण के प्रबल समर्थक रहे चंद्रबाबू नायडू अब मानते हैं कि जनसंख्या बोझ नहीं, बल्कि एक संपत्ति है। अधिकारियों के अनुसार, दूसरे बच्चे से आगे दिए जाने वाले प्रोत्साहन फ्रांस और हंगरी जैसे देशों के मॉडल से प्रेरित हैं, जहां भविष्य में जनसांख्यिकीय संकट से बचने के लिए ऐसी नीतियां अपनाई गई हैं।

राज्य के स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक आंध्र प्रदेश भारत की तुलना में तेजी से वृद्धावस्था की ओर बढ़ रहा है। राज्य की औसत आयु 32.5 वर्ष है, जबकि राष्ट्रीय औसत 28.4 वर्ष है। अधिकारियों का कहना है कि आंध्र प्रदेश के पास 2040 तक ही जनसांख्यिकीय लाभ की स्थिति बनी रहेगी, इसके बाद बुजुर्ग आबादी का अनुपात तेजी से बढ़ सकता है। आंध्र प्रदेश की कुल प्रजनन दर (टीएफआर) 1993 में 3.0 थी, जो अब घटकर 1.5 रह गई है। यह 2.1 के रिप्लेसमेंट लेवल से काफी नीचे है। अधिकारियों के अनुसार, यह स्थिति विकसित देशों जैसे जापान, दक्षिण कोरिया और इटली की तरह जनसांख्यिकीय संकट की ओर संकेत करती है।

2024 में मुख्यमंत्री बनने के बाद से चंद्रबाबू नायडू लगातार जनसंख्या वृद्धि की वकालत कर रहे हैं और टीएफआर को 2.1 तक पहुंचाने को आवश्यक बता रहे हैं। इसी दिशा में पहला कदम उठाते हुए उनकी सरकार ने स्थानीय निकाय चुनाव लड़ने के लिए लागू दो-बच्चों की सीमा को समाप्त कर दिया था। मार्च में उन्होंने देश की पहली ‘पॉपुलेशन मैनेजमेंट पॉलिसी’ पेश की, जिसे जनसंख्या वृद्धि के लिए गेम-चेंजर बताया गया। इस नीति में तीसरे बच्चे के लिए पांच वर्षों तक प्रति माह 1,000 रुपये पोषण सहायता और 18 वर्ष तक मुफ्त शिक्षा जैसी योजनाएं प्रस्तावित की गई हैं।

मुख्यमंत्री ने विधानसभा में कहा था कि सरकार अधिक बच्चों के जन्म को प्रोत्साहित करने के लिए 12 महीने का मातृत्व अवकाश और दो महीने का पितृत्व अवकाश देने की योजना बना रही है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी थी कि यदि प्रजनन दर में और गिरावट आई तो कार्यशील आबादी कम हो जाएगी, जिससे आर्थिक विकास प्रभावित होगा। राज्य के स्वास्थ्य, चिकित्सा एवं परिवार कल्याण सचिव सौरभ गौर ने कहा था कि अब राज्य उसी समस्या का सामना कर रहा है, जिससे कई विकसित देश जूझ रहे हैं, जहां गैर-कार्यशील आयु वर्ग की आबादी तेजी से बढ़ रही है।

जनसंख्या प्रबंधन नीति के तहत सरकार ‘मातृत्व’, ‘शक्ति’, ‘क्षेम’, ‘नैपुण्यम’ और ‘संजीवनी’ जैसे पांच चरणों वाली जीवनचक्र प्रणाली लागू करने की तैयारी कर रही है। सरकार ने गर्भावस्था से लेकर वृद्धावस्था तक हर चरण में सहायता देने का आश्वासन दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि निःसंतान दंपतियों और प्रजनन संबंधी समस्याओं से जूझ रहे लोगों के लिए सरकारी अस्पतालों में पीपीपी मॉडल के तहत आईवीएफ सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। स्वास्थ्य विभाग ने प्रजनन चिकित्सा के लिए ‘फर्टिलिटी कॉलेज’ स्थापित करने की योजना भी पेश की है। इन केंद्रों पर विशेषज्ञों को प्रशिक्षण दिया जाएगा और निःसंतान दंपतियों को सरकारी सहायता से आईवीएफ उपचार उपलब्ध कराया जाएगा।

सरकार ने सिजेरियन डिलीवरी की संख्या कम करने और किशोरावस्था में गर्भधारण की दर को मौजूदा 8.8 प्रतिशत से घटाकर 3 प्रतिशत से नीचे लाने का लक्ष्य भी तय किया है। ‘स्वर्ण आंध्र विजन 2047’ के तहत ‘पदि सूत्रालु’ (10 सूत्र) में जनसंख्या प्रबंधन और मानव संसाधन विकास को तीसरा प्रमुख सूत्र बनाया गया है, जो जनसंख्या नियंत्रण से जनसंख्या स्थिरता की ओर नीति बदलाव को दर्शाता है।

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