अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने सोमवार को एक बड़ा एलान करते हुए बताया कि उसने भारत की दिग्गज कंपनी अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड (Adani Enterprises Ltd) के साथ 275 मिलियन डॉलर (करीब ₹2,600 करोड़) के समझौते पर सहमति जताई है। यह समझौता ईरान पर लगे अमेरिकी प्रतिबंधों के 32 स्पष्ट उल्लंघनों से जुड़ी संभावित नागरिक देनदारी (civil liability) के मामलों को पूरी तरह सुलझाने के लिए किया गया है।
दुबई के कारोबारी के जरिए खरीदी थी प्रतिबंधित ईरानी गैस
ट्रेजरी विभाग के विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय (OFAC) द्वारा जारी किए गए एक आधिकारिक बयान के अनुसार, अडानी एंटरप्राइजेज ने दुबई के एक व्यापारी से तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (LPG) की कुछ खेप खरीदी थीं। इस सौदे के दौरान कागजों पर यह दावा किया गया था कि यह गैस ओमान और इराक से आ रही है, लेकिन अमेरिकी जांच में सामने आया कि यह पूरी खेप वास्तव में ईरान से मंगवाई गई थी। चूंकि अमेरिका ने ईरान पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगा रखे हैं, इसलिए इस गैस डील को अमेरिकी नियमों का सीधा उल्लंघन माना गया।
अमेरिकी कोर्ट से गौतम अडानी को मिली बड़ी राहत
इस बड़े जुर्माने के बीच अडानी समूह के लिए राहत की खबरें भी सामने आ रही हैं। अमेरिकी प्रतिभूति और विनिमय आयोग (SEC) ने भारतीय अरबपति गौतम अडानी के खिलाफ चल रहे एक सिविल मुकदमे को भी अलग से सुलझा लिया है। पिछले हफ्ते सामने आए अदालती दस्तावेजों के मुताबिक, भारतीय सरकारी अधिकारियों को कथित तौर पर रिश्वत देने की योजना से जुड़े इस सिविल मामले को दोनों पक्षों ने आपसी सहमति से खत्म करने का फैसला किया है। हालांकि, इस समझौते को अभी अमेरिकी अदालत की अंतिम मंजूरी मिलना बाकी है।
10 अरब डॉलर के निवेश के वादे के बाद खत्म होंगे आपराधिक मामले
इस पूरे कानूनी विवाद के बीच अडानी समूह के लिए सबसे बड़ी खुशखबरी अमेरिकी न्याय विभाग से आ रही है। सूत्रों के मुताबिक, अमेरिकी न्याय विभाग (DOJ) अब गौतम अडानी के खिलाफ लगे धोखाधड़ी के गंभीर आपराधिक आरोपों को भी वापस लेने के बेहद करीब पहुंच गया है। इस मामले की जानकारी रखने वाले दो सूत्रों ने सनसनीखेज खुलासा करते हुए बताया कि यह नरमी तब देखने को मिल रही है जब गौतम अडानी ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था में 10 बिलियन डॉलर (लगभग ₹95,000 करोड़) का भारी-भरकम निवेश करने और हजारों नौकरियां पैदा करने का बड़ा वादा किया है। यदि न्याय विभाग इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर देता है, तो अमेरिकी अदालतों में अडानी ग्रुप पर मंडरा रहे सभी बड़े कानूनी संकट पूरी तरह खत्म हो जाएंगे।


