भारतीय चुनाव आयोग (ECI) ने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर अपने फैसले में एक बार फिर बदलाव किया है। आयोग ने नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6 से SIR से संबंधित घोषणा वाले विवादित कॉलम को हटा दिया है। अब नए मतदाताओं को वोटर रजिस्ट्रेशन और SIR की प्रक्रिया के लिए ECINet पोर्टल पर अलग-अलग फॉर्म भरने होंगे। यह फैसला उन राज्यों में भी लागू होगा, जहां फिलहाल SIR की प्रक्रिया जारी है। पिछले छह हफ्तों में यह तीसरी बार है, जब आयोग ने फॉर्म-6 को लेकर अपना रुख बदला है।
दरअसल, आयोग ने ऑनलाइन फॉर्म-6 में SIR से जुड़ा एक अतिरिक्त कॉलम जोड़ा था, जिसे भरना अनिवार्य था। इसमें आवेदक को तीन विकल्पों में से एक चुनकर बताना होता था कि क्या उसका नाम वर्ष 2000 के बाद हुई SIR की मतदाता सूची में था, क्या उसके माता-पिता या दादा-दादी का नाम उस सूची में था या फिर इनमें से किसी का नाम पिछली मतदाता सूची में नहीं था। इस घोषणा के बिना आवेदन की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकती थी। अब इस कॉलम को हटाकर SIR के लिए अलग फॉर्म उपलब्ध करा दिया गया है।
फॉर्म-6 में SIR घोषणा जोड़ने के फैसले पर चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने आपत्ति जताई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, विवेक जोशी ने 16 मई को कहा था कि निर्धारित फॉर्म में बदलाव के लिए कानूनी संशोधन जरूरी है। वहीं, सुखबीर सिंह संधू ने 13 अगस्त को इस बदलाव को अनधिकृत और अवैध बताते हुए इसे हटाने की मांग की थी। इसके बावजूद जुलाई में ऑनलाइन फॉर्म-6 में यह कॉलम जोड़ दिया गया था।
दरअसल, फॉर्म-6 का प्रारूप मतदाता पंजीकरण नियम, 1960 के तहत निर्धारित है और इसमें संशोधन का अधिकार केंद्र सरकार के पास है। ऐसे में आयोग द्वारा अपने स्तर पर बदलाव किए जाने पर सवाल उठे थे।
चुनाव आयोग ने 26 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में दाखिल जवाबी हलफनामे में बताया था कि उसकी इलेक्टोरल रोल डिवीजन ने 21 अक्टूबर को फॉर्म-6 और SIR घोषणा को अलग करने का फैसला लिया था। आयोग के अनुसार, दोनों प्रक्रियाओं को एक फॉर्म में रखने का उद्देश्य आवेदकों की सुविधा था, ताकि उन्हें दो बार ओटीपी और ई-सिग्नेचर की जरूरत न पड़े। हालांकि, आयोग ने माना कि ऑनलाइन फॉर्म में घोषणा को जिस तरह शामिल किया गया, उससे ऐसा प्रतीत हो सकता था कि निर्धारित फॉर्म में संशोधन कर दिया गया है। इसी वजह से दोनों प्रक्रियाओं को अलग करने का निर्णय लिया गया।
फॉर्म-6 का मामला आयोग के भीतर दर्ज अन्य आपत्तियों के बीच सामने आया है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले 10 महीनों में दोनों चुनाव आयुक्तों ने आयोग के फैसलों पर कम से कम 14 बार लिखित आपत्तियां दर्ज कराई थीं। इनमें मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने और बहाल करने के साथ-साथ सॉफ्टवेयर और प्रशासनिक कामकाज से जुड़े मुद्दे शामिल थे।
इसके बाद ECINet सॉफ्टवेयर में भी कई बदलाव किए गए हैं। अब दस्तावेजों में कमी या तार्किक विसंगतियों के मामलों में मतदाताओं की व्यक्तिगत सुनवाई अपवादस्वरूप होगी और बूथ लेवल अधिकारी (BLO) उनके घर जाकर दस्तावेज जुटाएंगे। मतदाता निर्धारित 13 श्रेणियों के अलावा अन्य दस्तावेज भी जमा कर सकेंगे। इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (ERO) को भी ऐसे मामलों में खुद निर्णय लेने का अधिकार दिया गया है।
इसके अलावा आयोग की बैठकों से पहले एजेंडा साझा करने और बाद में कार्यवाही का विवरण जारी करने का फैसला हुआ है। अधिकारियों के विदेश दौरों के लिए आयोग की मंजूरी अनिवार्य कर दी गई है। वहीं, नए आईटी मॉड्यूल और पोर्टल को लागू करने से पहले अधिकारियों की समिति और फिर आयोग की मंजूरी लेनी होगी। ECINet की कार्यप्रणाली और कानूनी प्रावधानों के अनुपालन की जांच के लिए विशेषज्ञ समिति भी गठित की गई है।


