Monday, April 20, 2026
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शैलपुत्री की आराधना के साथ शुरू हुई नवरात्रि पूजा, भक्तिमय माहौल में डूबी राजधानी

30 मार्च 2025 को चैत्र नवरात्रि का महापर्व शुरू हो रहा है, जो रामनवमी तक चलेगा। इस दौरान मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा होती है, और इसे खासतौर पर कलश स्थापना और मां शैलपुत्री की पूजा से शुरू किया जाता है।

आज माता शैलपुत्री की पूजा के साथ दिल्ली के मंदिरों में नवरात्रि का पर्व शुरू हो गया। सुबह से ही मंदिरों में भक्तों की लंबी कतारें देखी गईं। लोग अपने पूरे परिवार के साथ मंदिर पहुंचे और देवी के प्रथम स्वरूप की पूजा की। मंदिरों को खूब सजाया गया है। कई मंदिरों को सजाने में विदेशों से मंगवाए गए विशेष फूलों का उपयोग किया गया है। 

मंदिर में पूजा पाठ और दर्शन की पूरी सुविधा सोशल मीडिया चैनलों पर भी उपलब्ध कराई जा रही है। मंदिरों में सुरक्षा की पूरी व्यवस्था की गई है और सभी मार्गों को सीसीटीवी कैमरों की नजर में रखा गया है।
झंडेवालान मंदिर के न्यासी रविन्दर गोयल ने बताया है कि आज सुबह चार बजे से ही मंदिर का कपाट खोल दिया गया था और उसी समय से भक्तों का आना जारी है। मंदिर खुलने के साथ ही मंदिर परिसर माँ के जयकारों से गूंज उठा। हजारों उपस्थित भक्तों ने पूरे जोश के साथ माँ झंडेवाली का जयघोष किया।
उन्होंने कहा कि मंदिर प्रबंधन ने आने वाले भक्तों की सुविधा को ध्यान मे रखते हुए व्यापक प्रबंध किये हैं। भक्तों को मंदिर में प्रवेश करने में अधिक असुविधा न हो, इसे ध्यान में रखते हुए विभिन्न मार्गों से प्रवेश द्वार बनाये गए हैं। भक्तों को लाइनों मे कोई असुविधा न हो उसके लिए लाइनों मे पट्टियाँ  बिछायी गई हैं और बहुत ही सुंदर व मधुर संगीत की व्यवस्था की गई है।
वाहन पार्किंग की भी व्यवस्था की गई है जिससे लोगों को परेशानी न हो। मुख्य रूप से रानी झाँसी मार्ग, पुराना नाज सिनेमा और फ्लैटिड फैक्ट्री कोम्पलेक्स में भक्तों के वाहन खड़े करने की निःशुल्क व्यवस्था की गई है। छह स्थानों पर भक्तों के लिये जूता स्टैंड बनाये गये हैं। मंदिर की सुरक्षा को लेकर दिल्ली पुलिस के सहयोग से व्यापक रूप से व्यवस्था की गयी है। पूरे परिसर व आसपास पास 260 सीसीटीवी लगाए गए हैं। मंदिर परिसर व आसपास के क्षेत्र की सज्जा भी आकर्षण का केंद्र है।
हालांकि, सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बाहर से प्रसाद, फूलमाला और किसी अन्य वस्तु को लाने और देवी को चढ़ाने की मनाही की गई है। आने वाले  हर भक्त को निकासी द्वार पर माँ के भण्डारे का पैकेट बंद प्रसाद दिया जा रहा है। विभिन्न कीर्तन मंडलियों द्वारा मुख्य प्रांगण  में माँ का गुणगान किया जा रहा है।
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