Tuesday, October 27, 2026
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अक्षय तृतीया पर शुरू हुआ भगवान जगन्नाथ का रथ निर्माण, 27 जून को निकलेगी प्रसिद्ध भव्य रथ यात्रा

ओडिशा के पुरी में अक्षय तृतीया के अवसर पर भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा की तैयारी शुरू हो गई है। हर साल की तरह इस बार भी अक्षय तृतीया के पावन मौके पर यानी 30 अप्रैल को रथ निर्माण की परंपरा के साथ यात्रा की तैयारी की शुरुआत हुई।

ओडिशा में स्थित जगन्नाथ पुरी की विश्वप्रसिद्ध वार्षिक रथ यात्रा की तैयारी शुरू हो गई है। हर साल की तरह इस बार भी अक्षय तृतीया के पावन मौके पर यानी 30 अप्रैल को रथ निर्माण की परंपरा के साथ यात्रा की तैयारी की शुरुआत हुई। बता दें कि हिंदू कैलेंडर के अनुसार यह त्योहार आषाढ़ माह में शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है। इसके तहत इस बार रथ यात्रा 27 जून से शुरू होगी।

रथ बनाने की तैयारी के साथ प्रशासन भी सतर्क
रथों के निर्माण के साथ ही रथ यात्रा की तैयारियां भी जोरों से चल रही हैं। जगन्नाथ मंदिर प्रशासन यह सुनिश्चित करने के लिए पूरी लगन से काम कर रहा है कि उत्सव की सही संचालन हो और रथ यात्रा के समय सभी व्यवस्थाएं पूरी हो।

रथों का त्योहार से जाना जाता
रथ यात्रा  को ‘रथों का त्योहार’ भी कहा जाता है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार यह महत्वपूर्ण त्यौहार है। भगवान जगन्नाथ, अपने भाई-बहन बलभद्र और सुभद्रा के साथ, पुरी की सड़कों पर रथ पर एक भव्य जुलूस के रूप में निकाले जाते हैं। यह त्यौहार दुनिया भर से लाखों भक्तों को आकर्षित करता है। भगवान जगन्नाथ और उनके भाई-बहन की रथ यात्रा का भक्त बेसब्री से इंतजार करते  हैं। यह त्योहार ओडिशा की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं का प्रमाण है। प्रशासन को उम्मीद है कि इस बार पुरी में इस यात्रा में शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में लोग आएंगे।

रथ बनाने के पारंपरिक तकनीकी
जगन्नाथ पुरी की प्रसिद्ध रथ यात्रा के लिए रथों का निर्माण सावधानी से किया जाता है। रथ बनाने के लिए कुशल कारीगर, शिल्पकार और जटिल डिजाइन करने के लिए परिश्रम करते हैं। रथों का निर्माण पारंपरिक तकनीकों और सामग्रियों के उपयोग से किया जाता है, जो त्योहार से जुड़े प्राचीन अनुष्ठानों और रीति-रिवाजों का पालन करते हैं।

पूरी दुनिया में धूमधाम से मनाया जाता रथ यात्रा
यह त्यौहार न्यूजीलैंड से लेकर लंदन और दक्षिण अफ्रीका तक बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। इसमें पवित्र त्रिदेवों की अपनी मौसी देवी गुंडिचा देवी के मंदिर तक की यात्रा और आठ दिनों के बाद उनकी वापसी यात्रा को दर्शाया गया है। यह उत्सव अक्षय तृतीया के दिन से शुरू होता है और पवित्र त्रिदेवों की श्री मंदिर परिसर में वापसी की यात्रा के साथ समाप्त होता है।

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