Friday, April 24, 2026
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निजी निवेश के लिए खुलेगा परमाणु ऊर्जा क्षेत्र, मानसून सत्र में संशोधन पेश किए जाने की संभावना

केंद्र सरकार परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में निजी निवेश को बढ़ावा देने के लिए बड़ा कदम उठाने जा रही है। इसके लिए केंद्र की तरफ से संसद के मानसून सत्र में परमाणु ऊर्जा अधिनियम में संशोधन लाया जा सकता है। भारत सरकार का लक्ष्य है कि 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा उत्पादन करना है ताकि ऊर्जा जरूरतों को पूरा किया जा सके।

केंद्र सरकार देश के परमाणु ऊर्जा क्षेत्र को नियंत्रित करने वाले कानूनों में महत्वपूर्ण संशोधन करने पर विचार कर रही है। ऐसा करने के पीछे सरकार की मंशा परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में निजी निवेश को आकर्षित करना और निजी क्षेत्र की भागीदारी सुनिश्चित करना है। इसके लिए सरकार संसद के आगामी मानसून सत्र में संशोधन पेश कर सकती है। सरकार का लक्ष्य 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा उत्पादन करना है ताकि ऊर्जा जरूरतों को पूरा किया जा सके।

सरकारी सूत्रों ने दी जानकारी
सरकारी सूत्रों ने बताया कि परमाणु ऊर्जा अधिनियम में संशोधन पर विचार किया जा रहा है ताकि निजी क्षेत्र की भागीदारी को अनुमति दी जा सके और परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के निर्माण के लिए उपकरणों के आपूर्तिकर्ताओं के दायित्व को सीमित करने के लिए परमाणु क्षति के लिए नागरिक दायित्व अधिनियम में भी बदलाव की तैयारी है। साथ ही सरकार नियामक सुधारों पर भी विचार कर रही है। सरकार भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन और प्राधिकरण केंद्र (आईएनएसपीएसीई) के मॉडल का भी मूल्यांकन कर रही है। यह अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए प्रमोटर और नियामक के रूप में कार्य करता है। इसे 2020 में निजी भागीदारी के लिए खोल दिया गया था।

सरकार ने बजट में की थी घोषणा
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आम बजट पेश करने के दौरान परमाणु ऊर्जा क्षेत्र को खोलने की घोषणा की थी। यह क्षेत्र अब तक सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों तक ही सीमित था। भारतीय परमाणु ऊर्जा निगम लिमिटेड देशभर में परमाणु ऊर्जा संयंत्रों का संचालन करता है। ये संयंत्र देश के ऊर्जा में 8.7 गीगावाट का योगदान करते हैं। वित्त मंत्री ने 20,000 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ लघु मॉड्यूलर रिएक्टरों (एसएमआर) के अनुसंधान और विकास के लिए परमाणु ऊर्जा मिशन की भी घोषणा की थी। साथ ही कहा था कि 2033 तक कम से कम पांच स्वदेशी रूप से विकसित एसएमआर चालू कर दिए जाएंगे।

समिति ने की थी संशोधनों की सिफारिश
एक संसदीय समिति ने मजबूत वित्तीय मॉडल स्थापित करने की भी सिफारिश की थी, जिसमें घरेलू और विदेशी दोनों तरह के निवेश को आकर्षित करने के लिए सरकारी प्रोत्साहन, व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण (वीजीएफ) और संप्रभु गारंटी शामिल हो। समिति ने सुझाव दिया था कि परमाणु ऊर्जा अधिनियम और परमाणु क्षति के लिए नागरिक दायित्व अधिनियम में विधायी संशोधनों में तेजी लाई जाए ताकि परमाणु ऊर्जा उत्पादन में निजी निवेश को प्रोत्साहित किया जा सके।

विदेशी कंपनियों ने दिखाई रुचि
परमाणु ऊर्जा विभाग के अधिकारियों ने हाल ही में कहा कि परमाणु ऊर्जा मिशन का उद्देश्य भारत की बढ़ती ऊर्जा मांगों को पूरा करने के लिए निजी क्षेत्र की भागीदारी का लाभ उठाना, नियामक ढांचे को सरल बनाना और परमाणु ऊर्जा उत्पादन को बढ़ाना है। भारत की ओर से वैश्विक परमाणु व्यापार में शामिल होने के लिए परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएससी) से छूट हासिल करने के बाद विदेशी परमाणु ऊर्जा कंपनियों ने भारत में परमाणु ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने में रुचि दिखाई थी। एनएसजी से छूट 2008 के ऐतिहासिक भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु समझौते के बाद मिली थी।

यह कानून निजी क्षेत्र की भागीदारी में रुकावट
वर्ष 2010 का परमाणु क्षति के लिए नागरिक दायित्व अधिनियम निजी क्षेत्र की भागीदारी के लिए बाधा साबित हुआ। निजी क्षेत्र का कहना है कि कानून के कुछ प्रावधान अस्वीकार्य हैं और ये परमाणु क्षति के लिए पूरक क्षतिपूर्ति पर अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशन (सीएससी) के विपरीत हैं। सरकार को उम्मीद है कि 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा उत्पादन के लक्ष्य को हासिल करने के लिए निजी क्षेत्र निवेश करेगा।

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