Sunday, April 19, 2026
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पंजाब का अपना डैम सेफ्टी एक्ट ही जल संकट का स्थायी समाधान: परगट सिंह

पंजाब के जालंधर कैंट से विधायक परगट सिंह ने आज पंजाब विधानसभा में बाधों की सुरक्षा के लिए केन्द्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) से जिम्मेदारी लेकर पंजाब पुलिस को सौंपने के प्रस्ताव पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह प्रस्ताव केवल ‘सुरक्षा तैनाती’ का मामला है, न कि पंजाब के जल अधिकारों की रक्षा का।

सिंह ने कहा कि सीआईएसएफ हो या पंजाब पुलिस, वे सिर्फ सुरक्षा कर्मी हैं। वे यह तय नहीं कर सकते कि पानी किसका है। अगर हम पंजाब के हक बचाना चाहते हैं, तो तैनाती नहीं, कानूनी ताकत चाहिए। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव सरकार की उस कहानी को झूठा साबित करता है, जिसमें दावा किया गया कि यह कदम जल विवाद को सुलझा देगा। उन्होंने कहा, “ यह प्रस्ताव सिर्फ सतही समाधान है। पंजाब को चाहिए कि वह अपना डैम सेफ्टी एक्ट लाए, ताकि केंद्र सरकार के दखल का कानूनी रूप से विरोध किया जा सके। ” उन्होंने याद दिलाया कि मुख्यमंत्री पहले ही पिछली विधानसभा में यह स्वीकार कर चुके हैं कि राज्य अपना कानून लायेगा, और अब समय आ गया है कि उसे लागू किया जाये। सिंह ने कहा कि यदि पंजाब को इस मुद्दे पर मजबूत कानूनी स्थिति बनानी है, तो उसे पंजाब पुनर्गठन अधिनियम की धारायें 78, 79 और 80 को चुनौती देनी होगी।

उन्होंने कहा, “ जब तक हम इन संवैधानिक खामियों को नहीं चुनौती देंगे, तब तक ऐसे प्रस्ताव सिर्फ दिखावा रहेंगे। ” उन्होंने यह भी बताया कि जून 2023 में सरकार ने एक राज्य स्तरीय डैम सेफ्टी कमेटी का गठन किया था, लेकिन उसके बाद कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। बिना कानून के, कमेटियां सिर्फ औपचारिकता हैं। हमें ठोस कानूनी आधार चाहिए ताकि भविष्य में पंजाब के हक को न्यायिक तौर पर प्रस्तुत किया जा सके। ”
श्री सिंह ने हाल ही में केंद्र सरकार की मध्यस्थता में पंजाब और हरियाणा के मुख्यमंत्रियों के बीच हुई बैठक को निरर्थक बताया। “इंडस वाटर ट्रीटी पहले ही सस्पेंड हो चुकी है। अब जल बंटवारा कभी इधर जाएगा, कभी उधर। यह सिर्फ मुंगेरीलाल के हसीन सपने हैं। केवल पंजाब का अपना कानून ही हमें कानूनी ताकत देगा। ”

उन्होंने मीडिया कर्मियों से एक बार फिर लैंड पूलिंग नीति को लेकर आप सरकार और दिल्ली के नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा कि दिल्ली के नेता पंजाब के किसानों की 50,000 एकड़ जमीन पर नजर गड़ाये हुये हैं, ताकि अपने चुनावों के लिए पैसा इकट्ठा कर सकें। पंजाब में इस नीति की कोई मांग नहीं है। हमने जालंधर से विरोध की शुरुआत कर दी है और पूरे पंजाब में इसे लेकर जनजागरण करेंगे। ” सिंह ने बेअदबी मामलों में सरकार की निष्क्रियता को लेकर भी हमला बोला। उन्होंने कहा, “ साढ़े तीन साल में एक भी ठोस कदम नहीं उठाया गया। सारे केस दूसरे राज्यों को ट्रांसफर कर दिए गए। मौड़ ब्लास्ट केस पर कोई बात नहीं।” 

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