Monday, April 20, 2026
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पंजाब सरकार बाढ़ पीड़ितों के पुनर्वास हेतु – राहत कार्यों में पूरी ताकत से जुटी

मुख्यमंत्री स भगवंत सिंह मान की अगुवाई में पंजाब सरकार बाढ़ से प्रभावित लोगों की सहायता के लिए हर संभव उपाय कर रही है। कैबिनेट मंत्री, विधायक तथा पूरा प्रशासन जमीनी स्तर पर लोगों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है। इस संकट की घड़ी में समाजसेवी संस्थाओं और आम जनता की भी महत्वपूर्ण भागीदारी मिल रही है।

कैबिनेट मंत्री स हरजोत सिंह बैंस ने आज श्री आनंदपुर साहिब के बेलिया के दर्जनों बाढ़ प्रभावित गांवों का दौरा किया। उन्होंने गांव डाढ़ा में चल रहे राहत कार्यों का जायजा लिया और पशुओं के लिए चारा वितरित किया। उन्होंने अधिकारियों को तुरंत निरीक्षण पूरा करने, नुकसान हुए मकानों का मूल्यांकन करने, सड़कों की मरम्मत करने और जल-विद्युत आपूर्ति को निर्बाध रूप से सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

हरजोत सिंह बैंस ने कहा कि मुख्यमंत्री स भगवंत सिंह मान की अगुवाई वाली पंजाब सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि बाढ़ के कारण प्रभावित लोगों को किसी भी प्रकार की कमी महसूस न हो। उन्होंने कहा कि सरकार प्रभावित परिवारों के पुनर्वास के लिए भी कार्य कर रही है ताकि लोगों की जिंदगी पुनः पटरी पर आ सके।

कैबिनेट मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने लुधियाना में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा करते हुए कहा कि पानी और मच्छरों से फैलने वाली बीमारियों से बचाव के लिए सक्रिय उपाय किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि जैसे ही बाढ़ का पानी हटेगा, स्वास्थ्य टीमें गांव-गांव घर-घर सर्वेक्षण करेंगी। पानी के स्रोतों की क्लोरीनेशन, प्रभावित इलाकों में फॉगिंग, और स्कूलों में आर.ओ. सिस्टम लगाकर लोगों को साफ पीने का पानी उपलब्ध कराया जा रहा है ताकि किसी भी बीमारी का खतरा न रहे।

कैबिनेट मंत्री तरुनप्रीत सिंह सौंद ने मंगलवार को मंडी गोबिदगढ़ से राहत सामग्री से भरा एक और ट्रक बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में भेजा। इससे पहले उन्होंने तीन ट्रक खन्ना से फाजिल्का भेजे थे। मंडी गोबिदगढ़ स्थित एच.एफ. सुपर मिल्क प्लांट से भेजे गए राहत सामग्री के ट्रक में सोलर लाइटें, तिरपाल आदि शामिल थे। इस सहायता के लिए उन्होंने मिल्क प्लांट के मालिक विनोद कुमार दत्त का विशेष धन्यवाद किया।

वहीं, जल स्रोत मंत्री बरिंदर कुमार गोयल हलका लहरागागा से होकर घग्गर नदी के नजदीकी क्षेत्रों का दौरा कर पूरे दिन राहत और बचाव कार्यों का निरीक्षण करते रहे।

उन्होंने बताया कि 10 सितंबर तक घग्गर नदी में 4-5 इंच पानी घट जाएगा। उन्होंने कहा कि 9 सितंबर को घग्गर नदी में 750.5 फुट (14425 क्यूसेक्स) पानी बह रहा था। विभाग द्वारा लगाए गए अनुमानानुसार कल तक 4-5 इंच पानी कम होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि यदि परिस्थितियाँ इसी तरह बनी रहीं तो अगले 4-5 दिनों में घग्गर नदी का पानी खतरे के निशान से नीचे आ जाएगा। उन्होंने बताया कि विभाग द्वारा जिला प्रशासन और आम लोगों के सहयोग से 18 किलोमीटर में फैले घग्गर क्षेत्र की 24 घंटे निगरानी की जा रही है। विभाग के बेलदार से लेकर निगरानी इंजीनियर तक अधिकारी बांध पर लगातार ड्यूटी पर तैनात हैं।

डेरा बस्सी क्षेत्र के विधायक स कुलजीत सिंह रंधावा ने आज लालड़ू अनाज मंडी से बाढ़ पीड़ित लोगों के लिए राहत सामग्री रवाना की। उन्होंने बताया कि डेरा बाबा नानक के गांव शाहपुर जाजां में बाढ़ के कारण लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी बुरी तरह प्रभावित हुई है। गांव के कई परिवार अपना घर, पशु पालन और रोजमर्रा के उपयोग की वस्तुएं बाढ़ में खो बैठे हैं। उन्होंने कहा कि इस संकट की घड़ी में उनकी सहायता हेतु अन्य सहयोगियों के साथ आज लालरू से दो ट्रक भेजे गए हैं, जिनमें एक ट्रक पशुओं के लिए फीड और दूसरा ट्रक चोकर का भेजा गया है।

विधायक ने कहा कि बाढ़ ने प्रदेश के कई इलाकों में बड़ा नुकसान किया है। इस समय सभी लोगों, संस्थाओं और सरकार को मिलकर काम करने की जरूरत है ताकि बाढ़ पीड़ित लोगों को जल्द से जल्द सामान्य जीवन में वापस लाया जा सके।

जलालाबाद के विधायक श्री जगदीप कांबोज गोल्डी ने अपने क्षेत्र के गांव आतू वाला के लिए 5.63 लाख रुपए की कश्ती उपलब्ध करवाई। उन्होंने कहा कि सरकार जरूरतमंद लोगों को राशन और पशुओं के लिए कैटल फीड उपलब्ध करा रही है। इसके अलावा उन्होंने राज्य सरकार द्वारा लिए गए अहम फैसलों का भी उल्लेख किया, जैसे किसानों को प्रति एकड़ 20,000 रूपये का मुआवजा प्रदान करना और जिस का खेत उसकी रेत संबंधी भी प्रकाश डाला।

इसी कड़ी में फाजिल्का में वरिष्ठ आईएएस अधिकारी कनवलप्रीत बराड़ और डिप्टी कमिश्नर अमरप्रीत कौर संधू ने फाजिल्का के गांव मौजम, राणा और सलेम शाह के राहत कैंपों का दौरा कर बच्चों में पोषण सामग्री और महिलाओं में स्वच्छता सामग्री का वितरण किया। डिप्टी कमिश्नर ने बताया कि मेडिकल और वेटरनरी टीमें तैनात हैं, पशुओं के लिए चारा उपलब्ध है। बच्चों के लिए आरजी क्लास और मोबाइल लाइब्रेरी भी शुरू की गई है। इस समय 14 कैंपों में 2761 लोग रह रहे हैं, जिनकी देखरेख के लिए वरिष्ठ अधिकारी तैनात हैं।

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