इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से फैला संक्रमण अब जानलेवा साबित हो रहा है। शुक्रवार को इलाज के दौरान एक और बुजुर्ग महिला की मौत हो गई, जिसके बाद इस त्रासदी में जान गंवाने वालों का कुल आंकड़ा बढ़कर 15 तक पहुंच गया है। मृतिका का इलाज अरविंदो अस्पताल में चल रहा था, लेकिन तमाम कोशिशों के बाद भी उन्हें बचाया नहीं जा सका। वहीं, गुरुवार को 338 नए मरीज सामने आए, जिससे स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। अब तक करीब 2800 लोग इस संक्रमण की चपेट में आ चुके हैं।
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, अस्पतालों में मरीजों की भारी भीड़ है। अभी भी विभिन्न अस्पतालों में 201 मरीज भर्ती हैं, जिनमें से 32 मरीजों की हालत गंभीर बनी हुई है और वे आईसीयू में जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं। हालांकि, राहत की बात यह है कि 272 भर्ती मरीजों में से 71 को ठीक होने के बाद डिस्चार्ज कर दिया गया है। भागीरथपुरा स्थित स्वास्थ्य केंद्र में सुबह से लेकर देर रात तक बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक उल्टी-दस्त की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं। कई परिवारों में तो घर के सभी सदस्य बीमार पड़े हैं, जिससे स्थानीय लोगों में गहरा आक्रोश है।
इलाके में दहशत का माहौल इतना गहरा गया है कि प्रशासन द्वारा सुविधा के लिए भेजे जा रहे पानी के टैंकरों का उपयोग करने से भी लोग कतरा रहे हैं। संक्रमण के डर से रहवासी अपनी जेब ढीली कर बाहर से आरओ का पानी मंगवाकर पीने को मजबूर हैं। स्थिति को संभालने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने 21 टीमें गठित की हैं, जिनमें डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ और आशा कार्यकर्ता शामिल हैं। इन टीमों ने गुरुवार को 1714 घरों का सर्वे कर 8571 लोगों की जांच की। घर-घर जाकर लोगों को उबला हुआ पानी पीने और बाहर का खाना न खाने की सख्त सलाह दी जा रही है।
दर्जनों मौतों के बाद अब नगर निगम प्रशासन की नींद टूटी है और जल संबंधित शिकायतों को गंभीरता से लिया जाने लगा है। साल के पहले दिन दोपहर तक इंदौर-311 हेल्पलाइन पर पिछले 24 घंटों में जल प्रदूषण से जुड़ी 206 शिकायतें दर्ज की गई हैं। आंकड़ों के मुताबिक, इनमें सबसे ज्यादा शिकायतें जोन नंबर पांच से आई हैं, जहां अधिकारी अब मुस्तैदी दिखाने का दावा कर रहे हैं।


