दिल्ली आबकारी नीति (शराब घोटाले) मामले में आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल की मुश्किलें एक बार फिर से बढ़ती हुई नजर आ रही हैं। दिल्ली हाई कोर्ट ने शराब मामले की सुनवाई कर रही जज के खिलाफ एडिटेड (छेड़छाड़ किए गए) वीडियो सर्कुलेट करने के गंभीर आरोप में अरविंद केजरीवाल के खिलाफ अवमानना (Contempt of Court) की सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। इस पूरे मामले पर बेहद कड़ा रुख अपनाते हुए हाई कोर्ट की जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने स्पष्ट शब्दों में संदेश दिया है कि अरविंद केजरीवाल उन्हें किसी भी तरह डरा नहीं सकते हैं।
‘मैं चुप नहीं रह सकती…’ जज ने लिया अत्यंत मानहानिकारक सामग्री का संज्ञान
जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने गुरुवार को कड़े शब्दों में कहा कि उन्होंने उत्पाद शुल्क नीति मामले में कुछ आरोपियों द्वारा उनके और अदालत के खिलाफ पोस्ट की गई अत्यंत अपमानजनक, निंदनीय और मानहानिकारक सामग्री का संज्ञान लिया है। न्यायमूर्ति शर्मा ने सख्त लहजे में कहा, “मुझे यह जानकारी मिली है कि कुछ प्रतिवादियों और अन्य अवमानना करने वालों द्वारा मेरे खिलाफ बेहद अपमानजनक सामग्री पोस्ट की जा रही है। मैं इस पर चुप नहीं रह सकती। मेरा आदेश पूरी तरह तैयार है, मैं इसे शाम लगभग 5 बजे सुनाऊंगी और उसके बाद ही तय करूंगी कि आगे क्या कानूनी कदम उठाना है।” सुनवाई के दौरान जस्टिस ने यह भी बताया कि कुछ वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और पूर्व विधायक दुर्गेश पाठक का प्रतिनिधित्व करने का अनुरोध स्वीकार कर उदारता दिखाई है।
‘सत्याग्रह’ का दावा और जज पर लगाए गए थे पक्षपात के गंभीर आरोप
यह पूरा विवाद सीबीआई की उस पुनरीक्षण याचिका की सुनवाई के इर्द-गिर्द घूम रहा है, जिसमें फरवरी में निचली अदालत द्वारा शराब नीति घोटाले के 23 आरोपियों को बरी किए जाने को हाई कोर्ट में चुनौती दी गई है। इसी साल अप्रैल 2026 में केजरीवाल, सिसोदिया और दुर्गेश पाठक ने एक पत्र जारी कर सार्वजनिक रूप से ऐलान किया था कि जब तक जस्टिस शर्मा इस मामले से खुद को अलग नहीं कर लेतीं, वे ‘सत्याग्रह’ करते हुए बिना किसी वकील के अपना केस खुद लड़ेंगे। इन नेताओं ने जस्टिस शर्मा के आरएसएस के कानूनी मोर्चे ‘अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद’ से कथित सार्वजनिक जुड़ाव पर भारी आपत्ति जताई थी, जिसका AAP वैचारिक रूप से विरोध करती है।
सॉलिसिटर जनरल और बच्चों के नाम पर उठाया था सवाल, पहले भी खारिज हो चुकी है मांग
आम आदमी पार्टी के नेताओं ने अदालत में यह कहकर सनसनी फैला दी थी कि उन्हें जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की अदालत में पक्षपात का डर है। आप नेताओं का तर्क था कि जज के बच्चे केंद्र सरकार के अधिवक्ताओं के पैनल में शामिल हैं और उन्हें सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता द्वारा केस सौंपे जाते हैं। गौरतलब है कि तुषार मेहता खुद इसी आबकारी नीति मामले में हाई कोर्ट में सीबीआई की ओर से पेश हो रहे हैं। हालांकि, अरविंद केजरीवाल और पांच अन्य आरोपियों द्वारा जज को इस मामले से हटाने की मांग को अदालत पहले ही सिरे से खारिज कर चुकी है। अदालत ने उस वक्त भी आरोपियों द्वारा लगाए गए इन निराधार आरोपों और संदेहों की कड़ी निंदा की थी और अब वीडियो सर्कुलेट होने के बाद मामले ने एक नया और गंभीर मोड़ ले लिया है।


