Wednesday, November 4, 2026
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डॉक्टर गए थे कोर्ट पेशी पर, ड्राइवर ने संभाल ली OPD; वायरल VIDEO से स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप

उत्तर प्रदेश के कानपुर स्थित एक सरकारी अस्पताल से स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोलने वाला हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां अस्पताल की ओपीडी में डॉक्टर की जगह उनका निजी ड्राइवर मरीजों की जांच करता और धड़ल्ले से दवाइयों के पर्चे लिखता नजर आया। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही हड़कंप मच गया है। मामले ने न केवल अस्पताल प्रबंधन की गंभीर लापरवाही उजागर की है, बल्कि यह सवाल भी खड़ा कर दिया है कि आखिर एक अनधिकृत व्यक्ति ओपीडी में बैठकर मरीजों की जान से खिलवाड़ कैसे कर रहा था।

डॉक्टर गए थे कोर्ट पेशी पर, ड्राइवर ने संभाल ली ओपीडी
यह सनसनीखेज मामला कांशीराम अस्पताल एवं ट्रॉमा सेंटर का है। बताया जा रहा है कि अस्पताल के आपातकालीन चिकित्सा अधिकारी (ईएमओ) डॉ. रामकेश एक अदालती सुनवाई के सिलसिले में बाहर गए हुए थे। उनकी अनुपस्थिति में उनका निजी ड्राइवर ‘देव’ डॉक्टर की कुर्सी पर जा बैठा। वायरल वीडियो में वह ओपीडी में एक-एक कर मरीजों को अंदर बुलाते, उनकी नब्ज टटोलते और बाकायदा पर्चे पर दवाइयां लिखते हुए साफ दिखाई दे रहा है।

तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित, ड्राइवर पर एफआईआर
वीडियो सामने आने और मामला उच्चाधिकारियों तक पहुंचने के बाद अस्पताल प्रशासन में खलबली मच गई है। प्रशासन ने पूरे प्रकरण की तहकीकात के लिए तीन सदस्यीय जांच समिति गठित कर दी है। यह समिति जांच कर रही है कि ड्राइवर को ओपीडी के भीतर जाने की अनुमति कैसे मिली, उसने कितने मरीजों को देखा और क्या ऐसा खेल पहले भी होता रहा है। इसके साथ ही अस्पताल प्रबंधन ने आरोपी ड्राइवर के खिलाफ स्थानीय पुलिस में औपचारिक शिकायत भी दर्ज कराई है।

मरीजों की जान के साथ बड़ा खिलवाड़, कानून का खुला उल्लंघन
राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (एनएमसी) अधिनियम के तहत किसी भी ऐसे व्यक्ति को चिकित्सा सेवा या परामर्श देने की मनाही है जो मेडिकल काउंसिल में पंजीकृत डॉक्टर न हो। चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि मौसमी बुखार और डेंगू जैसी बीमारियों के चरम दौर में इस तरह की लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है। मिसाल के तौर पर, डेंगू में एस्पिरिन या इबुप्रोफेन जैसी सामान्य दर्द निवारक दवाएं देने से ब्लीडिंग का खतरा बढ़ जाता है और मरीज की जान जा सकती है। ऐसे में बिना योग्यता के किसी ड्राइवर द्वारा दवाएं लिखना सीधे-सीधे मरीजों की जान को जोखिम में डालने का संगीन अपराध है। फिलहाल स्वास्थ्य विभाग जांच रिपोर्ट के आधार पर कड़ी कार्रवाई की तैयारी कर रहा है।

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