दिवाली से पहले पटाखों के इस्तेमाल को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। अदालत ने संकेत दिया कि वह ऐसा संतुलित रास्ता अपनाना चाहती है, जिसमें वायु और ध्वनि प्रदूषण पर नियंत्रण के साथ लोगों की धार्मिक एवं सांस्कृतिक भावनाओं तथा पटाखा उद्योग से जुड़े लोगों की आजीविका का भी ध्यान रखा जा सके। सुप्रीम कोर्ट पहले भी पटाखों के मामले में पूर्ण प्रतिबंध के बजाय नियंत्रित और संतुलित व्यवस्था की बात कह चुका है।
समय और पटाखों की श्रेणी पर हो सकता है फैसला
कोर्ट ने साफ कहा कि वह देशभर में पूरी तरह बैन के पक्ष में नहीं है। लेकिन साथ ही 24 घंटे पटाखे जलाने की इजाजत भी नहीं दी जा सकती, क्योंकि इससे बुजुर्गों, बीमार लोगों और बच्चों को परेशानी होती है। कोर्ट ने कहा कि वह ऐसा समाधान निकालेगा जिसमें पटाखे चलाने के लिए तय समय होगा और यह भी तय किया जाएगा कि किस तरह के पटाखों की इजाजत होगी।
बेरियम और शोर स्तर की होगी जांच
अदालत ने पटाखों में इस्तेमाल होने वाले बेरियम तथा उनके शोर के स्तर की जांच से जुड़े परीक्षण कराने पर भी जोर दिया है। सितंबर 2026 की कार्यवाही में केंद्र की ओर से बताया गया था कि सीएसआईआर-नीरी को अलग-अलग स्थानों पर नई पीढ़ी के ग्रीन पटाखों में बेरियम की मात्रा के प्रभाव का अध्ययन करने की जिम्मेदारी दी गई है। साथ ही नए संयुक्त पटाखों के लिए निर्धारित 125 डेसिबल ध्वनि मानक और अन्य शर्तों पर भी विचार चल रहा है।
प्रदूषण के साथ आजीविका का भी सवाल
पटाखों पर होने वाली सुनवाई में अदालत के सामने मुख्य तौर पर दो पक्ष हैं। एक तरफ दिवाली के दौरान वायु और ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने की जरूरत है, वहीं दूसरी ओर पटाखा कारोबार से जुड़े निर्माताओं, विक्रेताओं और श्रमिकों की आजीविका तथा लोगों की धार्मिक-सांस्कृतिक भावनाओं का मुद्दा है। सुप्रीम कोर्ट ने पहले भी इन पहलुओं के बीच संतुलन की आवश्यकता बताई है।
2025 में ग्रीन पटाखों को मिली थी सीमित अनुमति
पिछले वर्ष सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में सीमित अवधि के लिए स्वीकृत ग्रीन पटाखों की बिक्री और इस्तेमाल की अनुमति दी थी। 15 अक्टूबर 2025 के आदेश में 18 से 20 अक्टूबर तक निर्धारित स्थानों से बिक्री और सीमित समय में इस्तेमाल की अनुमति दी गई थी। बेरियम वाले और गैर-स्वीकृत पटाखों पर रोक बरकरार रखी गई थी। यह छूट स्पष्ट रूप से सीमित अवधि के लिए थी।
2026 की व्यवस्था पर नजर
इस साल दिवाली से पहले होने वाली सुनवाई पर दिल्ली-एनसीआर समेत अन्य राज्यों की नजर है। अदालत के सामने अब यह तय करने का सवाल है कि प्रदूषण नियंत्रण, निर्धारित समय, पटाखों की संरचना और उनके शोर स्तर को लेकर इस वर्ष क्या व्यवस्था लागू की जाए। फिलहाल 2026 के लिए 2025 जैसी कोई अंतिम देशव्यापी या दिल्ली-एनसीआर व्यवस्था मान लेना उचित नहीं होगा; अंतिम स्थिति अदालत के आगामी आदेशों से स्पष्ट होगी।


