भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) की नौकरी छोड़कर जनसेवा की राह चुनने वाली पूर्व जिलाधिकारी दिव्या मित्तल ने राजनीति में औपचारिक रूप से कदम रख दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लाइव आकर आगामी चुनाव लड़ने की घोषणा करने के साथ ही अपनी नई राजनीतिक पार्टी ‘जननीति भारत’ के गठन का ऐलान किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि पारंपरिक राजनीति जनता पर राज करती आई है, लेकिन यह नया दल जनता के अपने राज की स्थापना के लिए बनाया गया है।
जन-केंद्रित नीतियां और पार्टी के तीन मुख्य संकल्प
दिव्या मित्तल ने पार्टी की मूल कार्यप्रणाली को स्पष्ट करते हुए तीन मुख्य वचन सामने रखे हैं। उनका पहला वचन है जन से नीति और नीति से भारत, दूसरा वचन हर फैसला जरूरत देखकर लिया जाएगा और तीसरा वचन जरूरत से फैसला तथा फैसले में बराबरी सुनिश्चित करना है। उन्होंने रेखांकित किया कि देश के नीति-निर्माण के केंद्र में आम नागरिकों की वास्तविक आवश्यकताओं को रखा जाएगा। किसानों और छोटे व्यापारियों की समस्याओं का हल उनके व्यावहारिक अनुभवों व सुझावों के आधार पर तैयार किया जाएगा। इसके अलावा, विकास कार्यों और प्रशासनिक निर्णयों में जाति, पंथ, धर्म या पहचान के स्थान पर लोगों की वास्तविक जरूरतों को प्राथमिकता दी जाएगी। महिलाओं की सुरक्षा और स्थानीय विकास योजनाओं में आम जनता की सीधी भागीदारी सुनिश्चित करने पर भी उन्होंने विशेष जोर दिया।
‘उम्मीद का दीया लेकर निकली थी, जनता ने सूरज बना दिया’
लाइव वीडियो संदेश में दिव्या मित्तल ने बताया कि राजनीति में आने की मंशा जाहिर करने के बाद उन्होंने जनता से संपर्क के लिए एक फोन नंबर जारी किया था। उस नंबर पर इतने बड़े पैमाने पर लोगों के संदेश आए कि व्हाट्सएप ने उसे अस्थायी रूप से रोक दिया। जनसमर्थन के प्रति आभार जताते हुए उन्होंने कहा कि वह उम्मीद का एक छोटा सा दीया लेकर निकली थीं, लेकिन जनता के अभूतपूर्व समर्थन ने उन्हें सूरज के सामने खड़े होने जैसा संबल दिया है। उन्होंने कहा कि देश में राजनीतिक दलों की कोई कमी नहीं है, बल्कि समस्या यह है कि आम जनता की कोई सुनवाई नहीं होती। गंगा नदी का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि जिस तरह गंगा में हर बूंद बराबर होती है, उसी समानता के सिद्धांत पर ‘जननीति भारत’ का संचालन होगा।
राजा भैया की पार्टी और सपा के ऑफर की भी रही थी सियासी चर्चा
दिव्या मित्तल के प्रशासनिक सेवा छोड़ने के बाद से ही उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही थीं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा थी कि रघुराज प्रताप सिंह उर्फ ‘राजा भैया’ की पार्टी ‘जनसत्ता दल’ ने उन्हें अपने साथ जुड़ने का प्रस्ताव दिया था। वहीं, समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी एक सवाल के जवाब में दिव्या मित्तल को सपा में शामिल होने का खुला ऑफर देते हुए कहा था कि अब उन्हें तय करना पड़ेगा कि वे हरा गमछा पहनेंगी या लाल गमछा। हालांकि, सभी कयासों को विराम देते हुए पूर्व नौकरशाह ने किसी मौजूदा दल में शामिल होने के बजाय अपनी स्वतंत्र पार्टी बनाकर चुनावी मैदान में उतरने का फैसला किया।
13 साल के प्रशासनिक करियर में मिर्जापुर और देवरिया में रहीं चर्चित DM
दिव्या मित्तल ने लगभग 13 वर्षों तक भारतीय प्रशासनिक सेवा में रहने के बाद स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) लेकर राजनीति में आने का निर्णय लिया है। वे उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर और देवरिया जैसे प्रमुख जिलों में जिलाधिकारी के पद पर तैनात रह चुकी हैं। अपने सेवाकाल के दौरान वे सख्त प्रशासनिक कार्यशैली, त्वरित जनसुनवाई और सख्त फैसलों के चलते काफी चर्चा में रहीं। हालांकि, मिर्जापुर में तैनाती के दौरान विकास कार्यों और प्रशासनिक फैसलों को लेकर स्थानीय जनप्रतिनिधियों व नेताओं के साथ उनके टकराव की खबरें भी अक्सर सुर्खियों में रही थीं।


