ताजिकिस्तान की राजधानी दुशांबे में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के शासनाध्यक्षों की परिषद की बैठक में भारत ने आतंकवाद के मुद्दे पर बेहद सख्त रुख अपनाया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान का सीधा नाम लिए बिना अंतरराष्ट्रीय मंच पर उसकी पोल खोलकर रख दी। खास बात यह रही कि जिस समय रक्षा मंत्री आतंक की पनाहगाहों को नेस्तनाबूद करने की बात कर रहे थे, उस वक्त पाकिस्तान के विदेश मंत्री और उप-प्रधानमंत्री इशाक डार ठीक उनके सामने टेबल पर बैठे हुए थे।
आतंकवाद को ठहराया विकास का सबसे बड़ा दुश्मन
बैठक को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री ने आतंकवाद को वैश्विक विकास और शांति के लिए सबसे गंभीर खतरों में से एक करार दिया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आतंक केवल निर्दोष नागरिकों की जान ही नहीं लेता, बल्कि देशों के निवेश, अर्थव्यवस्था और व्यापार तंत्र को भी तहस-नहस कर देता है। राजनाथ सिंह ने कहा कि आतंकवाद पूरे समाज को कट्टरता की ओर धकेलता है और युवाओं को उनके सुनहरे भविष्य और अवसरों से महरूम कर देता है।
दोहरे मापदंड बंद हों, आतंकियों को पनाह देने वालों के लिए कोई जगह नहीं
रक्षा मंत्री ने दुनिया के सामने यह बात मजबूती से रखी कि आतंकवाद का कोई भी औचित्य नहीं हो सकता और इससे निपटने में किसी भी तरह के दोहरे मापदंड नहीं अपनाए जाने चाहिए। उन्होंने साफ संदेश देते हुए कहा कि जो लोग या मुल्क आतंकवादियों को फंडिंग मुहैया कराते हैं, उन्हें समर्थन देते हैं या अपनी जमीन पर महफूज पनाहगाह देते हैं, उनके लिए इस दुनिया में कोई जगह नहीं होनी चाहिए। उन्होंने पूरे आतंकी इकोसिस्टम को सामूहिक और निर्णायक रूप से ध्वस्त करने का पुरजोर आह्वान किया।
आर्थिक सहयोग और 2026-2030 कार्य योजना का समर्थन
एससीओ सदस्य देशों के बीच आर्थिक साझेदारी पर जोर देते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत बहुपक्षीय व्यापार और आर्थिक सहयोग कार्यक्रम की 2026-2030 कार्य योजना का पूरी तरह समर्थन करता है। उन्होंने रेखांकित किया कि आर्थिक संबंध समावेशी होने चाहिए और इनसे हर सदस्य देश को बराबर लाभ मिलना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने ताशकंद में ‘यूनिवर्सल सेंटर’ और दुशांबे में ‘एंटी-ड्रग सेंटर’ को एससीओ के स्थायी निकाय बनाए जाने के फैसलों का भी स्वागत किया।


