उथप्पा ने बताई सच्चाई
उथप्पा ने क्या कहा
युवराज सिंह ने कैंसर को मात दी और राष्ट्रीय टीम में वापसी की कोशिश की। वो ऐसे शख्स हैं, जिन्होंने हमें दो वर्ल्ड कप खिताब दिलाए। उन्होंने भारत को दोनों खिताब दिलाने में प्रमुख भूमिका निभाई। जब उस व्यक्ति के लिए, आप कप्तान थे तो आपने कहा कि फेफड़े की क्षमता गुम हो गई है। जब वह संघर्ष कर रहे थे तब आपको उनके साथ होना चाहिए था। मुझे किसी ने यह बात नहीं कही, मैंने खुद ये ऑब्जर्व किया।
आपने उन्हें संघर्ष करते देखा और जब आप कप्तान बने तो हां आपको एक स्तर बरकरार रखने की जरुरत है, लेकिन हमेशा नियम में कुछ अपवाद होते हैं। यहां एक शख्स अपवाद बनने का हकदार था क्योंकि उसने सिर्फ बीमारी को नहीं हराया था बल्कि आपको टूर्नामेंट्स जीतकर दिए थे। उन्होंने अपनी जिंदगी की सबसे कड़ी चुनौती को मात दी थी। उनके लिए कुछ बदलाव किए जा सकते थे।
युवराज अकेले पड़ गए
उथप्पा ने बताया कि युवराज सिंह ने फिटनेस टेस्ट में कम अंक की गुजारिश की, लेकिन टीम प्रबंधन ने उनकी नहीं मानी। हालांकि, युवी ने टेस्ट पास किए और टीम में वापसी की। मगर इंग्लैंड में चैंपियंस ट्रॉफी के बाद खराब प्रदर्शन के कारण उनकी अनदेखी की गई।
तो जब युवी ने दो अंक कम करने की गुजारिश की तो उन्हें नहीं मिले। फिर उन्होंने टेस्ट किए क्योंकि टीम से बाहर थे और टीम प्रबंधन उन्हें टीम में सोच नहीं रहा था। उन्होंने फिटनेस टेस्ट पास किया, टीम में लौटे, टूर्नामेंट फीका रहा, फिर टीम से बाहर हुए। इसके बाद उन्हें किसी ने एंटरटेन नहीं किया।
उथप्पा ने बताई विराट की सोच
जो भी लीडरशिप ग्रुप में थे, उन्होंने युवी को एंटेरटेन नहीं किया। तब विराट लीडर थे और चीजें उनके हिसाब से होती थी क्योंकि उनका चरित्र मजबूत था। तब भी चीजें उनके मुताबिक हुई थी।


