Sunday, April 19, 2026
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ED: पाकिस्तानी नागरिक, जिसने खुद को बांग्लादेशी बताकर खड़ा किया हवाला नेटवर्क, यूं बनाए नकली भारतीय पहचान पत्र

ईडी ने विदेशी अधिनियम, 1946 की धारा 14 और 14 ए के तहत अजाद मल्लिक और अज्ञात लोगों के खिलाफ विदेशी अधिनियम, 1946 के उल्लंघन के लिए पश्चिम बंगाल पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर जांच शुरू की थी। इस केस में ईडी ने 15 अप्रैल को तलाशी अभियान चलाया।

पाकिस्तान का एक नागरिक आजाद हुसैन, पश्चिम बंगाल में अजाद मल्लिक बनकर रह रहा था। फर्जी दस्तावेजों के आधार पर उसने खुद को बांग्लादेश का नागरिक बताया। मल्लिक ने पश्चिम बंगाल में हवाला नेटवर्क खड़ा कर लिया। वह बांग्लादेश के लोगों के नकली भारतीय पहचान पत्र बनाने लगा। इनका इस्तेमाल, पासपोर्ट प्राप्त करने के लिए होता था। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के कोलकाता जोनल कार्यालय ने विशेष न्यायालय (पीएमएलए), कोलकाता के समक्ष 13 जून को अजाद मल्लिक उर्फ अहमद हुसैन आजाद उर्फ आजाद हुसैन, पाकिस्तानी नागरिक के खिलाफ अभियोजन शिकायत (पीसी) दायर की है। न्यायालय ने आरोपी व्यक्ति पर पूर्व-संज्ञान नोटिस जारी किया है और सुनवाई की तारीख तय की है।

बता दें कि ईडी ने विदेशी अधिनियम, 1946 की धारा 14 और 14 ए के तहत अजाद मल्लिक और अज्ञात लोगों के खिलाफ विदेशी अधिनियम, 1946 के उल्लंघन के लिए पश्चिम बंगाल पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर जांच शुरू की थी। इस केस में ईडी ने 15 अप्रैल को तलाशी अभियान चलाया। उस दौरान मालूम हुआ कि अजाद मल्लिक उर्फ अहमद हुसैन आजाद, जिन्हें शुरू में एक बांग्लादेशी नागरिक माना जाता था, वह मोना मल्लिक का बेटा है और वैध दस्तावेजों के बिना भारत में रह रहा है। इसके बाद उसे पीएमएलए के प्रावधानों के तहत गिरफ्तार किया गया। 14 दिनों तक ईडी की हिरासत में रहने के बाद अजाद मल्लिक उर्फ अहमद हुसैन आजाद उर्फ आजाद हुसैन, न्यायिक हिरासत में है।

ईडी की जांच में पता चला कि अहमद हुसैन आजाद उर्फ आजाद हुसैन एक पाकिस्तानी नागरिक था। वह अवैध रूप से भारत में रह रहा था। उसके मोबाइल फोन से 1994 का एक पाकिस्तानी ड्राइविंग लाइसेंस बरामद किया गया, जिस पर आजाद हुसैन नाम लिखा था। उस पर आजाद मल्लिक उर्फ अहमद हुसैन आजाद की तस्वीर थी। उसके पिता का नाम मुमताज-उल-हक था। दस्तावेज पर पाकिस्तान में दर्ज स्थायी पता भी अंकित था। दस्तावेज में उसकी जन्मतिथि 14.08.1971 दर्ज थी। इसे हैदराबाद, पाकिस्तान में लाइसेंसिंग अथॉरिटी द्वारा जारी किया गया था। अपनी असली पहचान छिपाने के लिए, आजाद हुसैन ने ‘अजाद मल्लिक’ उपनाम रखा। आरोपी ने जाली और मनगढ़ंत दस्तावेज जमा करके आधार कार्ड, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस हासिल कर लिया। साथ ही फर्जी दस्तावेजों की मदद से उसने वोटर आईडी और पासपोर्ट सहित कई दूसरे भारतीय पहचान दस्तावेज बनवाए।

ईडी की जांच के दौरान, यह पाया गया कि अहमद हुसैन आजाद उर्फ अजाद मल्लिक, भारत और बांग्लादेश के बीच अवैध सीमा पार धन प्रेषण की सुविधा के लिए हवाला नेटवर्क संचालित करता था। इसके लिए नकद और यूपीआई में भुगतान एकत्र करता था। बीकेश जैसे प्लेटफ़ॉर्म का उपयोग करके बांग्लादेश में बराबर राशि स्थानांतरित करता था। वह अवैध धन हस्तांतरण और दस्तावेज़ जालसाजी में भी शामिल था। उसने दुबई, कंबोडिया और मलेशिया जैसे देशों की यात्रा करने के इच्छुक बांग्लादेशी नागरिकों के लिए वीजा और पासपोर्ट तैयार कराए। 
आरोपी मल्लिक ने बांग्लादेशी टका, यूएसडी या भारतीय रुपये में भुगतान एकत्र किया। इसके लिए उक्त राशि को वह अपने बैंक खाते में जमा कर देता था। बाद में उसे धोखाधड़ी वाले वीज़ा/पासपोर्ट प्रसंस्करण में लगे सहयोगियों के खातों में स्थानांतरित कर देता था। आजाद हुसैन ने कोलकाता स्थित कुछ विदेशी मुद्रा विनिमयकर्ताओं (एफएफएमसी) में की गई धोखाधड़ी गतिविधियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उसमें भारी नकदी जमा को ग्राहकों की वैध विदेशी मुद्रा बिक्री से प्राप्त आय के रूप में गलत तरीके से दर्शाया गया था। वास्तव में यह अपराध की आय (पीओसी) थी, जो गैरकानूनी प्रथाओं से जुड़ी थी। इसमें पासपोर्ट प्राप्त करने के लिए बांग्लादेशी व्यक्तियों के लिए नकली भारतीय पहचान का निर्माण करना भी शामिल था।
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