Friday, November 6, 2026
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नयी शिक्षा नीति की आड़ में केंद्र राज्यों के अधिकार छीन रहा है

पंजाब के शिक्षा मंत्री स. हरजोत सिंह बैंस ने सख़्त विरोध दर्ज करवाते हुये कहा है कि केंद्र सरकार अपनी सीमाओं से बाहर जाकर नयी शिक्षा नीति की आड़ में राज्यों के अधिकार छीन रही है।

स. बैंस यहाँ के भारत मंडपम में केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा करवाए गए अखिल भारतीय शिक्षा सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए आए हुए थे। राष्ट्रीय स्तर के करवाए गए इस सम्मेलन में केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान ने मुख्य मेहमान के तौर पर शिरकत की। विभिन्न राज्यों के शिक्षा मंत्रियों द्वारा भी इस सम्मेलन में हाज़िरी भरी गई। स. बैंस ने कहा कि शिक्षा का विषय केंद्र और राज्यों की सांझी सूची में शामिल है परन्तु केंद्र अपना दबदबा राज्यों पर बढ़ाने के लिए नयी शिक्षा नीति की आड़ ले रहा है।

पंजाब के शिक्षा मंत्री ने कहा कि पंजाबी भाषा संविधान के अंतर्गत दर्ज 22 भाषाओं में शामिल होने और पंजाब के इलावा अन्य राज्यों में बोली और पढ़ी जाती होने के बावजूद सी.बी.एस.सी द्वारा शुरुआत में पंजाबी को जर्मन, थायी पर और मैंडरिन की तरह चुनिंदा विषयों के वर्ग में रखा गया। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार द्वारा इस सम्बन्धी सख़्त विरोध दर्ज करवाने के उपरांत ही पंजाबी को मुख्य भाषा के वर्ग में शामिल किया गया। उन्होंने कहा कि केंद्र द्वारा शुरुआत में दावे किये गए थे कि नयी शिक्षा नीति से क्षेत्रीय भाषाओं को उत्साहित किया जायेगा परन्तु इन दावों के विपरीत केंद्र क्षेत्रीय भाषाओं को चुनिंदा विषयों में रखकर क्षेत्रीय भाषाओं के दर्जे को घटा रहा है।

उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार द्वारा राज्य की अलग शिक्षा नीति बनाने का ऐलान किया हुआ है और यह जल्द बनाई जायेगी। उन्होंने कहा कि नयी शिक्षा नीति के पर्दे के तहत केंद्र के किसी भी ऐसे कदम को बर्दाश्त नहीं करेगा जिससे पंजाब, पंजाबियत और पंजाबी भाषाओं की अहमीयत घटे। उन्होंने कहा पंजाब पहले ही अपनी शिक्षा नीति का ऐलान कर चुका है और पंजाब सरकार शिक्षा क्षेत्र के सर्वांगीण विकास के लिए सहृदय और संजीदा प्रयास कर रही है।
स. बैंस ने कहा कि पंजाब के सरकारी स्कूलों के विद्यार्थी राष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा के हर क्षेत्र में मिसाली कारगुज़ारी दिखा रहे हैं और मुकाबले की परीक्षाओं में कामयाबी हासिल करके राज्य का नाम रौशन कर रहे हैं।
स. बैंस ने कहा कि इस समागम के दौरान राजस्थान में स्कूल की इमारत गिरने के कारण घटित दर्दनाक हादसे पर विचार-विमर्श तक नहीं किया गया और न ही मासूम बच्चों की मौत पर दो मिनट का मौन धारण किया गया जोकि बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि इस सम्मेलन में मिड-डे मील से जुड़े मसले और वर्करों के वेतन बढ़ाने, स्कूली वर्दियों के पैसे कई सालों से न बढ़ाए जाने जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा ही नहीं की गई जबकि पंजाब में गर्मी और सर्दियों के लिए अलग-अलग स्कूल वर्दियों की ज़रूरत होती है। उन्होंने कहा कि इस सम्मेलन में आज के समय में विद्या के नये तरीकों, ब्लॉक चेन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (ए. आई,) डिजिटल लर्निंग और अन्य मुद्दे पर विचार किया जाना चाहिए था।

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