देश के उपराष्ट्रपति पद के लिए आगामी 9 सितंबर को मतदान होना है। इसको लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों ही अपने-अपने संभावित उम्मीदवारों के नामों पर मंथन कर रहे हैं। इसी बीच खबर है कि विपक्षी गठबंधन ‘इंडी’ इस बार उपराष्ट्रपति चुनाव में एक गैर-कांग्रेसी उम्मीदवार उतारने पर गंभीरता से विचार कर रहा है।
सूत्रों के अनुसार, इस रणनीति का मुख्य उद्देश्य सभी विपक्षी दलों को एकजुट करना है, ताकि भाजपा विरोधी मतों का विभाजन रोका जा सके और साझा ताकत के रूप में चुनौती पेश की जा सके। इस चुनाव में आम आदमी पार्टी के भी कम से कम 11 वोट शामिल हैं, जो समीकरण को प्रभावित कर सकते हैं।
INDIA alliance is preparing to make a big move in the Vice Presidential election, a non-Congress candidate can be made the candidate : गुरुवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी के आवास पर हुई डिनर बैठक में विपक्ष के कई वरिष्ठ नेताओं ने हिस्सा लिया। इस दौरान उपराष्ट्रपति चुनाव पर विशेष चर्चा हुई। बैठक में कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, सपा प्रमुख अखिलेश यादव, शिवसेना (उद्धव गुट) के उद्धव ठाकरे, नेशनल कॉन्फ्रेंस नेता फारूक अब्दुल्ला, टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी और डेरेक ओ’ब्रायन, तथा माकपा महासचिव एमए बेबी सहित कुल 14 वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।
सूत्रों के मुताबिक, बैठक में मौजूद एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि पिछली बार की गलती दोहराई नहीं जानी चाहिए। उन्होंने पूर्व केंद्रीय मंत्री मार्गरेट अल्वा का उदाहरण देते हुए कहा कि पिछली बार तृणमूल कांग्रेस ने कांग्रेस उम्मीदवार का समर्थन नहीं किया था, जिससे विपक्ष की एकता पर सवाल खड़े हुए थे।
बताया जा रहा है कि इस बार तृणमूल कांग्रेस ने अपना उम्मीदवार न उतारने का संकेत दिया है। वहीं कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे पहले ही मीडिया को बता चुके हैं कि उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए इंडी गठबंधन सामूहिक रूप से निर्णय लेगा।
गुरुवार की बैठक में अधिकांश नेताओं की राय थी कि गठबंधन को एकजुट होकर चुनाव में उतरना चाहिए। हालांकि कुछ नेताओं ने यह भी तर्क दिया कि एनडीए के पास बहुमत है, ऐसे में केवल संख्या के आधार पर नहीं, बल्कि वैचारिक स्पष्टता और विपक्षी एकजुटता के आधार पर चुनाव लड़ा जाना चाहिए।
इस बीच उम्मीदवार के नाम को लेकर अंतिम निर्णय अगले कुछ दिनों में लिए जाने की संभावना है। सभी की निगाहें अब इंडी गठबंधन की अगली बैठक पर टिकी हैं।


