आम आदमी पार्टी (AAP) से बगावत कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थामने वाले राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा को जनता के गुस्से का सामना करना पड़ रहा है। पार्टी छोड़ने का उनका यह फैसला सोशल मीडिया पर उन्हें भारी पड़ रहा है। इंस्टाग्राम पर राघव चड्ढा के फॉलोअर्स की संख्या में अचानक भारी गिरावट दर्ज की गई है, जिसने सियासी गलियारों में एक नई बहस छेड़ दी है। एक तरफ जहां राघव की लोकप्रियता का ग्राफ गिर रहा है, वहीं दूसरी ओर आम आदमी पार्टी ने इन बागी सांसदों के खिलाफ कड़ा एक्शन लेने की तैयारी कर ली है।
24 घंटे में छिन गए 11 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स
सोशल मीडिया पर युवाओं के बीच खासे लोकप्रिय माने जाने वाले राघव चड्ढा के इंस्टाग्राम अकाउंट पर अनफॉलो करने वालों की झड़ी लग गई है। आंकड़ों के मुताबिक, 23 अप्रैल तक उनके इंस्टाग्राम पर करीब 14.6 मिलियन (1 करोड़ 46 लाख) फॉलोअर्स थे। लेकिन 24 अप्रैल को जैसे ही उनके आम आदमी पार्टी छोड़ने और भाजपा में जाने की खबर सामने आई, उनके फॉलोअर्स तेजी से घटने लगे। महज कुछ ही घंटों में 11 लाख से ज्यादा यूजर्स ने उन्हें अनफॉलो कर दिया है। फिलहाल उनके फॉलोअर्स का आंकड़ा गिरकर 13.5 मिलियन पर आ गया है और यह संख्या लगातार नीचे की तरफ लुढ़क रही है।
भड़की AAP, संजय सिंह ने दल-बदल को बताया गैरकानूनी
इस बड़े सियासी उलटफेर के बाद आम आदमी पार्टी ने अपने बागी सांसदों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता संजय सिंह ने कड़ा ऐतराज जताते हुए आरोप लगाया है कि उनके 7 सांसद गैरकानूनी तरीके से बीजेपी में शामिल हुए हैं। संजय सिंह ने इसे सीधे तौर पर ‘दल-बदल कानून’ का उल्लंघन करार दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि देश का कानून ऐसी किसी भी टूट को वैधानिक मान्यता नहीं देता है, इसलिए इस असंवैधानिक कृत्य के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
सदस्यता रद्द करने की मांग, 4 सांसदों पर अब भी सस्पेंस
संजय सिंह ने साफ कर दिया है कि पार्टी चुप बैठने वाली नहीं है और वह जल्द ही राज्यसभा के सभापति को पत्र लिखकर इन सभी बागी सांसदों की सदस्यता रद्द करने की औपचारिक मांग करेंगे। आपको बता दें कि बीते दिन राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल ने औपचारिक रूप से भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली है। हालांकि, राघव चड्ढा ने दावा किया है कि उनके साथ हरभजन सिंह, स्वाति मालीवाल, राजिंदर गुप्ता और विक्रमजीत सिंह साहनी भी हैं, लेकिन इन चारों सांसदों ने अभी तक सार्वजनिक रूप से भाजपा में शामिल होने की कोई पुष्टि नहीं की है।


