Thursday, October 15, 2026
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इन राज्यों में सबसे ज्यादा बाल विवाह, दिल्ली-केरल में आंकड़ा शून्य के करीब; SRS रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा

लड़कियों की उच्च शिक्षा और देर से शादी को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा चलाए जा रहे तमाम देशव्यापी अभियानों और सख्त कानूनों के बावजूद भारत के कई राज्यों में बाल विवाह की कुप्रथा आज भी पैर पसारे हुए है। ‘सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम’ (SRS) की सांख्यिकीय रिपोर्ट 2024 के ताजा आंकड़ों के अनुसार, पश्चिम बंगाल और झारखंड में आज भी देश भर में सबसे अधिक बाल विवाह हो रहे हैं। इन राज्यों में कानून को ठेंगा दिखाकर बड़ी संख्या में लड़कियों की शादी 18 साल की कानूनी उम्र पूरी होने से पहले ही की जा रही है।

भारत के रजिस्ट्रार जनरल द्वारा जारी इस आधिकारिक रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रीय स्तर पर जहां जागरूक समाज के कारण महिलाओं की शादी की औसत उम्र बढ़कर 23.1 साल तक पहुंच गई है और 73.5 प्रतिशत महिलाएं 21 साल की उम्र पार करने के बाद शादी कर रही हैं, वहीं पूर्वी और मध्य भारत के कुछ राज्यों में यह सामाजिक समस्या आज भी बेहद गंभीर बनी हुई है।

देश में हर चौथी लड़की की शादी 21 साल से कम उम्र में

रिपोर्ट के राष्ट्रीय आंकड़ों पर गौर करें तो साल 2024 में शादी के बंधन में बंधने वाली कुल महिलाओं में से 2.1 प्रतिशत लड़कियां 18 साल से कम उम्र की थीं। वहीं, 24.5 प्रतिशत लड़कियों ने 18 से 20 साल की उम्र के बीच फेरे लिए। कुल मिलाकर देखा जाए तो साल 2024 के दौरान भारत में हर चार में से एक से ज्यादा महिला ने 21 साल की उम्र पूरी करने से पहले ही शादी कर ली, जो महिला सशक्तिकरण के दावों के बीच एक चिंताजनक पहलू है।

बाल विवाह में पश्चिम बंगाल नंबर वन, झारखंड दूसरे स्थान पर

आंकड़ों का विश्लेषण करें तो पश्चिम बंगाल में 18 साल से कम उम्र में ब्याही जाने वाली लड़कियों का अनुपात पूरे देश में सबसे ज्यादा 6.3 प्रतिशत दर्ज किया गया है। इस शर्मनाक सूची में झारखंड 4.9 प्रतिशत के साथ दूसरे पायदान पर है। वहीं, छत्तीसगढ़ भी उन राज्यों में शामिल है जहां लड़कियों का एक बड़ा हिस्सा (2.9 प्रतिशत) 18 साल से पहले ही शादी के मंडप में बिठा दिया जाता है।

अगर ग्रामीण और शहरी भारत की तुलना करें, तो देश के ग्रामीण इलाकों में 18 साल की उम्र पूरी होने से पहले शादी करने वाली लड़कियों का अनुपात 2.4 प्रतिशत था, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह आंकड़ा 1.1 प्रतिशत रहा।

गांवों से ज्यादा पश्चिम बंगाल के शहरों में कुप्रथा का असर

इस रिपोर्ट में सबसे चौंकाने वाला खुलासा पश्चिम बंगाल के शहरी क्षेत्रों को लेकर हुआ है। ग्रामीण इलाकों की बात करें तो पश्चिम बंगाल में बाल विवाह का अनुपात सबसे अधिक 5.9 प्रतिशत रहा, जिसके ठीक बाद झारखंड (5.8 प्रतिशत) का स्थान है। लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि शहरी इलाकों में भी बाल विवाह के मामले में पश्चिम बंगाल पूरे देश में सबसे आगे है, जहां यह अनुपात 7.6 प्रतिशत तक पहुंच गया है। यह आंकड़ा शहरी भारत के राष्ट्रीय औसत (1.1 प्रतिशत) के मुकाबले कई गुना ज्यादा है।

दिल्ली और केरल ने पेश की सबसे बेहतरीन नजीर

सकारात्मक पहलू यह है कि देश के कुछ राज्यों ने इस कुप्रथा पर पूरी तरह लगाम लगाने में कामयाबी हासिल की है। ‘सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम’ के इस राष्ट्रव्यापी सर्वेक्षण में देश की राजधानी दिल्ली में बाल विवाह का एक भी मामला (शून्य) सामने नहीं आया है। वहीं, साक्षरता के मामले में अग्रणी राज्य केरल में यह दर सबसे कम महज 0.04 प्रतिशत दर्ज की गई है। इसके अलावा हरियाणा और हिमाचल प्रदेश में भी बाल विवाह के आंकड़े बेहद न्यूनतम स्तर पर रहे।

स्वास्थ्य और सामाजिक विशेषज्ञों का साफ कहना है कि कम उम्र में शादी होने का सीधा और घातक असर लड़कियों की पढ़ाई बीच में ही छूटने, कम उम्र में मां बनने के कारण होने वाले शारीरिक खतरों और उनके व नवजात के खराब स्वास्थ्य के रूप में सामने आ रहा है, जिसे रोकने के लिए सामाजिक जागरूकता और कड़े प्रशासनिक कदमों की सख्त जरूरत है।

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