अमेरिका और ईरान के बीच 107 दिनों तक चले लंबे संघर्ष के बाद आज शुक्रवार को स्विट्जरलैंड के बर्गेनस्टाक रिजॉर्ट में ऐतिहासिक शांति वार्ता होने जा रही है। इस अहम बैठक में दोनों देशों के बीच समझौते के क्रियान्वयन और आगे की रणनीति पर चर्चा होगी। अमेरिका और ईरान के बीच होने जा रहा यह शांति समझौता सिर्फ एक वैश्विक कूटनीतिक सफलता ही नहीं है, बल्कि भारत के लिए भी यह एक बहुत बड़ी आर्थिक संजीवनी साबित होने वाला है। इस समझौते से भारत में महंगाई का मीटर तेजी से नीचे आ सकता है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खुलने से पेट्रोल-डीजल की कीमतों में आएगी भारी गिरावट
भारत अपनी जरूरत का 85 प्रतिशत से ज्यादा कच्चा तेल आयात करता है। 28 फरवरी को संघर्ष शुरू होने के बाद ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) में लगाई गई पाबंदियों से तेल आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई थी, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आग लग गई थी। अब इस शांति समझौते के बाद तेल का आयात एक बार फिर निर्बाध रूप से हो सकेगा। बाजार में तेल की उपलब्धता बढ़ने से कच्चे तेल की कीमतें नीचे आएंगी, जिसका सीधा और बड़ा फायदा आम जनता को पेट्रोल और डीजल के सस्ते दामों के रूप में मिलेगा।
रसोई गैस (LPG) और खाद्य पदार्थों की महंगाई से मिलेगी बड़ी राहत
भारत की लगभग 88 प्रतिशत एलपीजी आपूर्ति भी इसी मार्ग से जुड़ी हुई है। होर्मुज का रास्ता पूरी तरह साफ होने से एलपीजी सिलेंडरों की पर्याप्त खेप भारत पहुंच सकेगी, जिससे सरकार का सब्सिडी बोझ घटेगा और घरेलू उपभोक्ताओं को गैस की कीमतों में बड़ी राहत मिलेगी। इसके साथ ही डीजल सस्ता होने से ट्रांसपोर्टेशन और कोल्ड स्टोरेज की लागत में कमी आएगी। फल, सब्जियां और अन्य खाद्य सामग्री को एक राज्य से दूसरे राज्य तक पहुंचाना सस्ता हो जाएगा। खाड़ी देशों से आने वाले फर्टिलाइजर की लागत घटने से कृषि कार्य भी सस्ते होंगे, जिससे ओवरऑल खाने-पीने की चीजें आम आदमी के बजट में आ जाएंगी।
कॉस्मेटिक्स, कपड़े और मेडिकल प्रोडक्ट्स के घटेंगे दाम
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से सिर्फ ईंधन ही नहीं, बल्कि पेट्रोलियम आधारित कच्चे माल जैसे सिंथेटिक धागे, रबर, प्लास्टिक और पेट्रोकेमिकल्स भी सस्ते होंगे। इसका सीधा असर बाजार पर पड़ेगा। कोल्ड क्रीम, बॉडी लोशन, लिपस्टिक और काजल जैसे कॉस्मेटिक उत्पाद सस्ते हो जाएंगे। जूते-चप्पलों के साथ-साथ स्पोर्ट्स वियर, रेडीमेड कपड़े, पर्दे और कालीन की कीमतों में भी बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है। स्वास्थ्य क्षेत्र में भी इसका असर दिखेगा, जहां दवाइयां, सिरिंज, ग्लूकोज की बोतलें, मेडिकल ट्यूब, दस्ताने और मास्क जैसे उत्पाद सस्ते हो जाएंगे। इसके अलावा किसानों के लिए कीटनाशक और पेस्टिसाइड्स की लागत भी कम हो जाएगी।
रोजमर्रा का सामान, हवाई सफर और EMI का बोझ भी होगा कम
आम जरूरत की चीजों जैसे कपड़े धोने का पाउडर, डिटर्जेंट, नहाने का साबुन, प्लास्टिक पैकेजिंग और डिब्बे बनाने में इस्तेमाल होने वाले पॉलीप्रोपाइलीन और पॉलीथीन की लागत कम होने से ये रोजमर्रा के सामान सस्ते हो जाएंगे। टायर बनाने में इस्तेमाल होने वाला सिंथेटिक रबर पूरी तरह पेट्रोलियम आधारित होता है, इसलिए टायर और ऑटो पार्ट्स की कीमतें भी गिरेंगी। दूसरी ओर, एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) के दाम कम होने से एयरलाइंस कंपनियां यात्रियों को सस्ते टिकट ऑफर कर सकती हैं। कच्चे तेल की इन गिरती कीमतों से देश की कुल महंगाई दर में कमी आएगी, जिससे भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को ब्याज दरों में कटौती करने का मौका मिलेगा। ऐसा होने पर भविष्य में आम लोगों को होम लोन, कार लोन और बिजनेस लोन की ईएमआई में भी जबरदस्त राहत मिल सकती है।


