इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निकाह, हलाला और तीन तलाक जैसी प्रथाओं को लेकर एक बेहद सख्त और ऐतिहासिक टिप्पणी की है। अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि इन प्रथाओं की आड़ में महिलाओं के यौन शोषण की बिल्कुल अनुमति नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने इसे समाज का “काला पन्ना” करार देते हुए कहा कि ऐसी प्रथाएं संवैधानिक मूल्यों, समानता और मानवीय गरिमा के पूरी तरह खिलाफ हैं। न्यायालय के मुताबिक, ऐसे घिनौने कृत्य न केवल कानून की नजर में गंभीर अपराध हैं, बल्कि यह पूरे समाज की सामूहिक अंतरात्मा को झकझोरने वाले हैं। हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपियों द्वारा मुकदमा रद्द करने की मांग वाली याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है।
पर्सनल लॉ की आड़ में अपराध को नहीं मिल सकता संरक्षण
न्यायमूर्ति जे.जे. मुनीर और न्यायमूर्ति तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने पीड़िता के पूर्व पति, चाचा और मौलाना समेत अन्य सभी आरोपियों की याचिकाएं खारिज कर दीं। सुनवाई के दौरान अदालत ने दो टूक कहा कि जब बात आपराधिक कानून (क्रिमिनल लॉ) की आती है, तो पर्सनल लॉ की दलील देने की कोई जगह नहीं बचती। कोर्ट ने प्रथम दृष्टया इस पूरे मामले को एक नाबालिग के साथ हुआ सुनियोजित सामूहिक दुष्कर्म (गैंगरेप) माना और इसके सभी पहलुओं की गहन व निष्पक्ष जांच की आवश्यकता जताई है। अदालत ने स्पष्ट किया कि जांच के इस शुरुआती चरण में एफआईआर को रद्द करने का कोई औचित्य नहीं बनता और पुलिस की विवेचना लगातार जारी रहेगी।
15 साल की उम्र में निकाह, फिर हलाला के नाम पर दरिंदगी
यह दिल दहला देने वाला मामला उत्तर प्रदेश में अमरोहा जिले के सैदनागली थाना क्षेत्र का है। एफआईआर में दर्ज तथ्यों के अनुसार, पीड़िता को अप्रैल 2015 में मुख्य आरोपी अजहर नवाज के साथ जबरन निकाह करने के लिए मजबूर किया गया था, तब उसकी उम्र मात्र 15 साल थी। इसके बाद जनवरी 2016 में आरोपी ने उसे तीन तलाक दे दिया। कुछ महीने बीतने के बाद नवाज ने फिर से शादी करने की इच्छा जताई और नवंबर 2016 में पीड़िता का सह-आरोपी मौलाना कयूम के साथ ‘निकाह हलाला’ कराया गया। पीड़िता ने मजिस्ट्रेट के सामने दिए अपने बयान में बताया कि उस वक्त वह महज 16 साल की थी और उसे हलाला का मतलब भी नहीं पता था। उसने आरोप लगाया कि हलाला के नाम पर उसके साथ रेप किया गया और फिर साल 2017 में नवाज के साथ उसका दोबारा निकाह करा दिया गया।
‘डबल हलाला’ का झांसा देकर परिवार के लोगों ने ही किया गैंगरेप
शादी के चार साल बाद मुख्य आरोपी नवाज ने पीड़िता को एक बार फिर से तलाक दे दिया और दूसरी महिला से शादी रचा ली। लेकिन जब नवाज की नई पत्नी मां बनने में असमर्थ रही, तो नवाज और उसके भाइयों ने पीड़िता को दोबारा वापस बुलाने की साजिश रची। आरोपियों ने पीड़िता से कहा कि चूंकि उसका निकाह दो बार टूटा है, इसलिए अब उसे परिवार में वापस आने के लिए ‘दो बार हलाला’ (डबल हलाला) करना पड़ेगा। आरोप है कि इसी डबल हलाला के नाम पर 19 फरवरी 2025 को मुख्य आरोपी के भाई और भतीजों ने पीड़िता के साथ कथित तौर पर गैंगरेप किया और उसी शाम को उसके साथ एक झूठा निकाह भी रचा दिया गया। इस अमानवीय और घिनौनी वारदात के बाद पीड़िता ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी, जिस पर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए आरोपियों को किसी भी तरह की राहत देने से साफ इनकार कर दिया है।


