जम्मू-कश्मीर के सरकारी स्कूलों की लाइब्रेरी में रखी गई ‘पर्सनैलिटीज एंड लीजेंड्स ऑफ जेएंडके’ (Personalities and Legends of J&K) नाम की किताब को लेकर एक बेहद गंभीर और बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने नेशनल कॉन्फ्रेंस सरकार पर प्रदेश के स्कूलों में ‘एकेडमिक जिहाद’ चलाने का आरोप लगाते हुए इस किताब पर तत्काल प्रतिबंध लगाने की मांग की है। विवाद के तूल पकड़ते ही उपराज्यपाल (LG) मनोज सिन्हा ने इस मामले में सख्त कार्रवाई करते हुए 8 अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है, जबकि कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाले कर्मचारियों को सेवा से हटाने के आदेश जारी किए हैं। इसके साथ ही सरकार ने सरकारी स्कूलों से इस विवादित किताब की सभी प्रतियों को वापस मंगा लिया है।
मकबूल भट्ट को बताया ‘शहीद’, पत्थरबाजों और उग्रवाद का महिमामंडन
जम्मू में शनिवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और बीजेपी विधायक सुनील शर्मा ने इस किताब को लेकर कई चौंकाने वाले खुलासे किए। उन्होंने आरोप लगाया कि ‘समग्र शिक्षा, जम्मू-कश्मीर’ के लोगो वाली इस किताब में प्रतिबंधित आतंकी संगठन जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) के टेररिस्ट मकबूल भट्ट को ‘शहीद’ के रूप में पेश किया गया है। इतना ही नहीं, किताब में सैयद अली शाह गिलानी, मसरत आलम और मीरवाइज उमर फारूक जैसे अलगाववादी नेताओं के विचारों को बढ़ावा दिया गया है। बीजेपी का कहना है कि किताब में आतंकियों और पत्थरबाजों का खुलेआम महिमामंडन किया गया है, जबकि आतंकवाद के खिलाफ लड़ने वाले सुरक्षा बलों को नकारात्मक रोशनी में दिखाया गया है। सबसे आपत्तिजनक बात यह है कि किताब में जम्मू-कश्मीर को ‘इंडियन हेल्ड कश्मीर’ और ‘इंडियन ऑक्यूपाइड कश्मीर’ लिखा गया है। सुनील शर्मा ने इसे राष्ट्र के खिलाफ एक गंभीर अपराध बताते हुए कहा कि यह शिक्षा नहीं बल्कि भारत के खिलाफ ‘एकेडमिक जिहाद’ है।
स्कूलों से वापस मंगाई गईं सभी प्रतियां, लाइब्रेरी और पब्लिशर्स की जांच शुरू
विवाद बढ़ने के बाद जम्मू-कश्मीर सरकार ने इस किताब को सरकारी स्कूलों की लाइब्रेरी से तुरंत वापस लेने का फैसला किया है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, जून महीने में समग्र शिक्षा योजना के तहत स्कूलों में भेजी गई इस किताब की शिकायतें मिलने के बाद 3 जुलाई को ही इसे वापस मंगाने के आदेश दे दिए गए थे। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने मामले की गंभीरता को देखते हुए न सिर्फ 8 अधिकारियों पर निलंबन की गाज गिराई है, बल्कि ब्लैकलिस्ट किए गए लेखकों, पब्लिशर्स और लाइब्रेरी की किताबों से जुड़े पूरे विवाद की उच्चस्तरीय जांच के आदेश भी दे दिए हैं। स्कूल शिक्षा विभाग ने यह पता लगाने के लिए विभागीय जांच शुरू कर दी है कि किताब के चयन, समीक्षा और खरीद में गठित विशेषज्ञ समिति के किन अधिकारियों की भूमिका थी, ताकि उन पर सख्त कार्रवाई की जा सके।
बीजेपी की शिक्षा मंत्री को बर्खास्त करने की मांग, CM उमर अब्दुल्ला ने झाड़ा पल्ला
बीजेपी विधायक सुनील शर्मा ने इस पूरे मामले की न्यायिक जांच की मांग करते हुए प्रदेश की शिक्षा मंत्री सकीना इटू को तत्काल बर्खास्त करने की मांग की है। दूसरी तरफ, इस गंभीर विवाद पर मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला का भी बयान सामने आया है। मुख्यमंत्री ने फिलहाल इस मामले से पल्ला झाड़ते हुए कहा कि उन्होंने अभी तक न तो यह किताब पढ़ी है और न ही इसके बारे में विस्तार से कोई जानकारी ली है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच पूरी होने और तथ्य सामने आने के बाद ही वह इस विषय पर कोई टिप्पणी करेंगे। गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर में 2019 में अनुच्छेद 370 हटने के बाद से ही शिक्षण संस्थानों की किताबों की लगातार समीक्षा की जा रही है और पिछले साल ही गृह विभाग ने झूठे नैरेटिव और अलगाववाद को बढ़ावा देने के आरोप में 25 किताबों को जब्त किया था।


