Wednesday, August 12, 2026
Google search engine
Homedelhiसरकारी महिला कर्मचारियों को हाईकोर्ट का बड़ा झटका, दो से ज्यादा बच्चे...

सरकारी महिला कर्मचारियों को हाईकोर्ट का बड़ा झटका, दो से ज्यादा बच्चे होने पर नहीं मिलेगी मैटरनिटी लीव

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महिला सरकारी कर्मचारियों के मातृत्व अवकाश (मैटरनिटी लीव) को लेकर एक बेहद अहम और कड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने अपने आदेश में बिल्कुल स्पष्ट कर दिया है कि अगर किसी महिला कर्मचारी की पहले से दो या उससे अधिक जीवित संतानें हैं, तो उसे मातृत्व अवकाश का लाभ नहीं मिलेगा। अदालत ने साफ किया है कि यह नियम हर हाल में लागू होगा, भले ही महिला अपने सेवाकाल में किसी विशेष प्रसव के लिए पहली बार ही इस छुट्टी की मांग क्यों न कर रही हो।

चौथे बच्चे के लिए मांगी थी छुट्टी, वकील ने दी ये दलील
यह महत्वपूर्ण आदेश जस्टिस मंजू रानी चौहान की सिंगल बेंच ने शशि कुमारी नामक महिला की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। जानकारी के मुताबिक, याचिकाकर्ता ने 19 जून 2026 के उस विभागीय आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, जिसमें उनके चौथे बच्चे के लिए मातृत्व अवकाश देने से साफ इनकार कर दिया गया था। याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट में दलील दी कि उनकी मुवक्किल ने अपने पहले तीन बच्चों के जन्म के समय कोई छुट्टी नहीं ली थी। चूंकि वह चौथी संतान के लिए जीवन में पहली बार इस सुविधा का लाभ उठा रही हैं, इसलिए विभाग द्वारा छुट्टी न देना पूरी तरह से मनमाना और गैरकानूनी है।

सरकार ने रखा नियमों का हवाला, कोर्ट ने मानी बात
इस मामले में राज्य सरकार ने याचिका का कड़ा विरोध किया और अदालत को बताया कि महिला पहले ही मातृत्व अवकाश ले चुकी है। सरकार ने वित्तीय हस्त पुस्तिका के खंड-II के प्रावधानों का हवाला देते हुए बताया कि प्रसूति अवकाश प्रसव की तारीख से 180 दिनों के लिए ही स्वीकृत किया जाता है। इसके साथ ही, दो छुट्टियों के बीच कम से कम दो साल का अंतर होना अनिवार्य है। सरकार ने कोर्ट के सामने सबसे अहम नियम रखा जिसके तहत अगर महिला की दो या अधिक जीवित संतानें हैं, तो उसे किसी भी स्थिति में प्रसूति अवकाश नहीं दिया जा सकता, चाहे वह अवकाश तकनीकी रूप से देय ही क्यों न हो।

गर्भपात के मामलों में मिलती है विशेष राहत, कागजातों में मिली खामियां
सुनवाई के दौरान अदालत को यह भी अवगत कराया गया कि गर्भपात (मिसकैरेज) होने की स्थिति में महिला कर्मचारियों के लिए 6 सप्ताह के विशेष अवकाश का अलग से प्रावधान रखा गया है। साल 1990 में एक अधिसूचना जारी कर इसमें ‘अधिकतम तीन बार’ की सीमा को भी पूरी तरह से खत्म कर दिया गया था। सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि याचिकाकर्ता ने अदालत में मूल दस्तावेजों की फोटोकॉपी लगाने के बजाय केवल टाइप की गई प्रतियां संलग्न की थीं, जिनमें कई टाइपिंग की गलतियां मौजूद थीं। इन सभी तथ्यों को देखने के बाद अदालत ने स्पष्ट कर दिया कि दो से ज्यादा बच्चों के मामले में मातृत्व अवकाश का लाभ नहीं दिया जाएगा।

Our Best Partners: paynplay talleta ja pelaa uudet pikakasinot 2023 pay n play casino nye danske online casinoer plataforma mines ক্রেজি টাইম লাইভ ট্র্যাকার pay n play vedonlyönti pelaa casino https://luckyjetwins.com/strategy/
RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments