अगर आपके नाम पर सिम कार्ड जारी है और आपने उसे किसी दूसरे व्यक्ति को इस्तेमाल करने के लिए दे रखा है, तो अब सावधान हो जाइए। आपके नाम पर चल रहे मोबाइल नंबर का इस्तेमाल अगर साइबर ठगी या किसी अन्य गैरकानूनी गतिविधि में होता है, तो जांच की आंच आप तक भी पहुंच सकती है। दूरसंचार विभाग (DoT) ने 21 सितंबर को जारी एडवाइजरी में सिम कार्ड, मोबाइल कनेक्शन और IMEI नंबर से जुड़े नियमों को लेकर लोगों को सतर्क किया है।
विभाग ने स्पष्ट किया है कि अपने नाम पर सिम लेकर उसे किसी दूसरे व्यक्ति को बेचने, किराये पर देने या जानबूझकर किसी अपराध में इस्तेमाल होने देने पर सिम धारक के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है। फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सिम लेना या किसी अन्य व्यक्ति की पहचान का गलत इस्तेमाल कर मोबाइल कनेक्शन हासिल करना भी गंभीर अपराध है। फर्जी पहचान से सिम खरीदने-बेचने और मोबाइल के IMEI नंबर से छेड़छाड़ करने पर तीन साल तक की जेल और 50 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।
ऐसे चेक करें आपकी आईडी पर कितने सिम एक्टिव हैं
दूरसंचार विभाग ने लोगों को सलाह दी है कि वे समय-समय पर यह जांच करते रहें कि उनके नाम और दस्तावेजों पर कितने मोबाइल नंबर सक्रिय हैं। अगर सूची में कोई ऐसा नंबर दिखाई देता है जिसे आपने कभी नहीं लिया या जिसका इस्तेमाल आप नहीं करते हैं, तो उसे चुनकर ‘Not My Number’ या ‘Report’ विकल्प के जरिए शिकायत की जा सकती है। इसके बाद विभाग उस कनेक्शन की जांच कर आवश्यक कार्रवाई कर सकता है।
छत्तीसगढ़ में 25 फर्जी सिम का मामला
DoT की यह एडवाइजरी छत्तीसगढ़ में सामने आए एक साइबर फ्रॉड मामले के बाद जारी की गई है। विभाग के मुताबिक, एक सिम विक्रेता एजेंट ने लोगों के दस्तावेजों का कथित तौर पर गलत इस्तेमाल कर उनकी जानकारी के बिना 25 फर्जी मोबाइल कनेक्शन सक्रिय कर दिए थे। मामला सामने आने के बाद DoT ने संबंधित एजेंट को ब्लैकलिस्ट कर दिया। री-वेरिफिकेशन में असफल रहने के बाद इन सभी 25 मोबाइल नंबरों को भी बंद कर दिया गया।
पैसे के लालच में सिम देना पड़ सकता है भारी
विभाग के मुताबिक, कई मामलों में साइबर अपराधी लोगों के पहचान पत्र का गलत इस्तेमाल कर उनके नाम पर सिम निकलवा लेते हैं। कुछ मामलों में लोगों को पैसे का लालच देकर उनके नाम पर जारी सिम किसी दूसरे व्यक्ति को इस्तेमाल करने के लिए दे दी जाती है। बाद में इन नंबरों का इस्तेमाल साइबर ठगी और अन्य अपराधों में किया जाता है। ऐसी सिम को आम तौर पर ‘म्यूल सिम’ कहा जाता है।
अगर किसी अपराध में आपके नाम पर जारी मोबाइल नंबर का इस्तेमाल होता है, तो जांच में सबसे पहले उस कनेक्शन के धारक की जानकारी सामने आ सकती है। इसलिए किसी दूसरे व्यक्ति को अपने नाम की सिम इस्तेमाल करने के लिए देना कानूनी और सुरक्षा संबंधी जोखिम पैदा कर सकता है।
IMEI नंबर से छेड़छाड़ भी अपराध
दूरसंचार विभाग ने मोबाइल के IMEI नंबर को लेकर भी चेतावनी दी है। जिस मोबाइल फोन के IMEI नंबर में छेड़छाड़ या बदलाव किया गया हो, उसका इस्तेमाल करना गैरकानूनी है। इसके अलावा ऐसे ऐप या वेबसाइट का इस्तेमाल भी अपराध है, जिनकी मदद से कॉल करते समय किसी दूसरे व्यक्ति का मोबाइल नंबर स्क्रीन पर दिखाया जा सकता है। सरकार ने ऐसे टूल्स को दूरसंचार नेटवर्क और देश की सुरक्षा के लिए खतरा बताया है।
एक व्यक्ति के नाम पर कितने सिम?
भारत में सामान्य तौर पर एक व्यक्ति के नाम पर अधिकतम 9 मोबाइल कनेक्शन रखने की सीमा है। जम्मू-कश्मीर, असम और पूर्वोत्तर राज्यों में यह सीमा 6 मोबाइल कनेक्शन है। नया सिम जारी करने से पहले टेलीकॉम कंपनियां यह जांच करती हैं कि संबंधित व्यक्ति के नाम पर पहले से कितने मोबाइल नंबर सक्रिय हैं।
ज्यादा सिम रखने वालों की पहचान में मदद करेगा नया फीचर
सरकार ने 23 अगस्त से डिजिटल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म पर एक नया फीचर भी जोड़ा है। इसके तहत निर्धारित सीमा से अधिक मोबाइल कनेक्शन रखने वाले लोगों की तस्वीर पोर्टल पर दिखाई जाएगी। इसका उद्देश्य सिम विक्रेताओं और डीलरों को ऐसे ग्राहकों की पहचान करने में मदद करना है, ताकि निर्धारित सीमा पूरी होने के बाद उनके नाम पर नया कनेक्शन जारी न किया जा सके।
30 नवंबर तक टेलीकॉम कंपनियों को सिस्टम अपडेट करने का निर्देश
दूरसंचार विभाग ने सभी टेलीकॉम कंपनियों को डिजिटल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म के साथ अपने सिस्टम को पूरी तरह एकीकृत करने के लिए 30 नवंबर 2026 तक का समय दिया है। कंपनियों को इस अवधि में अपने सिस्टम को अपडेट करना होगा, ताकि निर्धारित सीमा से अधिक मोबाइल कनेक्शन सक्रिय न हो सकें और फर्जी सिम के जरिए होने वाले साइबर अपराधों पर रोक लगाई जा सके।


