नीट (NEET) पेपर लीक और अन्य परीक्षाओं में धांधली को लेकर तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे छात्रों पर हुई पुलिसिया कार्रवाई का मामला अब और गहरा गया है। सीजेपी (CJP) के ‘संसद चलो’ आह्वान के तहत दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों, विशेषकर महिला प्रदर्शनकारियों के साथ हुए कथित यौन उत्पीड़न को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत ने साफ तौर पर निर्देश दिया है कि इस मामले की जांच के लिए गठित पांच सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति यौन उत्पीड़न और छेड़छाड़ के मामलों को सर्वोच्च प्राथमिकता पर रखेगी।
वकीलों ने उठाया छात्राओं से बदसलूकी का मुद्दा
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान एडवोकेट शोभा गुप्ता ने जंतर-मंतर पर महिला प्रदर्शनकारियों के साथ हुए दुर्व्यवहार का मुद्दा उठाया। उन्होंने अदालत से आग्रह किया कि पुलिसकर्मियों द्वारा छात्राओं के साथ की गई छेड़छाड़ और यौन उत्पीड़न पर स्वतः संज्ञान लिया जाए। वकील ने कोर्ट को बताया कि खुद कई लड़कियों ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपने साथ हुई गलत हरकतों का दर्द बयां किया है। उन्होंने मांग की कि इस सेक्शुअल असॉल्ट की जांच के लिए किसी जिला जज की नियुक्ति होनी चाहिए, ताकि पीड़ित लड़कियां बिना किसी डर के सीधे अपनी शिकायत दर्ज करवा सकें।
नोडल अधिकारी के पास सीधे दर्ज होगी शिकायत
वकीलों की इस चिंता पर प्रतिक्रिया देते हुए जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने बताया कि इस मामले को लेकर एक अलग रिट याचिका भी दाखिल की गई है। वहीं, सीजेआई सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि हाई पावर्ड जांच कमेटी को इन संवेदनशील मामलों पर जल्द से जल्द अपनी अंतरिम रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है। पीड़ित छात्राओं को न्याय दिलाने और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कोर्ट ने कमेटी के चेयरपर्सन को एक विशेष नोडल अधिकारी नियुक्त करने की भी छूट दी है, जिसके पास बिना किसी बाधा के सीधे शिकायतें दर्ज कराई जा सकेंगी।
इन दिग्गजों के हाथों में है जांच की कमान
आपको बता दें कि 20 जुलाई को जंतर-मंतर सहित देश के अन्य हिस्सों में हुए इन विरोध प्रदर्शनों के दौरान पुलिस की ज्यादती और लक्षित हिंसा की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एक बेहद मजबूत पांच सदस्यीय कमेटी बनाई है। इस उच्चस्तरीय जांच समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश आर. सुभाष रेड्डी कर रहे हैं। उनके साथ इस टीम में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश रवि शंकर झा, दिल्ली हाईकोर्ट की पूर्व न्यायाधीश शालिंदर कौर, सीबीआई के पूर्व निदेशक ऋषि कुमार शुक्ला और मेघालय के पूर्व पुलिस महानिदेशक एल.आर. बिश्नोई जैसे बड़े चेहरे शामिल हैं। कोर्ट ने साफ कहा है कि यह समिति महिलाओं के उत्पीड़न जैसी घटनाओं से जुड़ी संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए निष्पक्ष जांच करे।


