प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को तमिलनाडु में जयगोपाल गरोडिया हिंदू विद्यालय के स्वर्ण जयंती समारोह को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि आज नवरात्रि के प्रथम दिन शिव और शक्ति की पवित्र धरती तमिलनाडु आने का ये सौभाग्य और मां सरस्वती के साधकों से मिलने का ये अवसर मेरे लिए नवरात्रि का अद्भुत शुभारंभ है।
उन्होंने कहा कि मेरे युवा साथियों का ये जो उत्साह देख रहा हूं, ये जो पॉजिटिव एनर्जी है, मैं इसे महसूस कर रहा हूं। मुझे आप सभी के आंखों में भारत का भविष्य दिखाई दे रहा है।
उन्होंने कहा कि आज का युवा ‘विकसित भारत’ के विजन की ताकत बनना चाहता है। विकसित भारत के लिए जो नए आइडियाज चाहिए… जो नए सॉल्यूशन चाहिए… उनसे भारत ही नहीं, विश्व का भविष्य भी तय होगा। आज भारत में जो अनंत अवसर है, मैं चाहता हूं कि हर युवा अपने भविष्य को उसी बड़े कैनवॉश पर देखें। यह आपका समय है, यह आपका अवसर है। मुझे ये पूरा विश्वास है कि हमारा ये सपना पूरा होकर रहेगा।
उन्होंने कहा कि आज दुनिया समाधान ढूंढ रही है, और आपमें उन्हें प्रदान करने की क्षमता है। मैं चाहता हूं कि हर युवा भारत द्वारा प्रदत्त अनंत अवसरों के विशाल परिदृश्य में खुद को देखे क्योंकि यही आपका समय है। यही आपका अवसर है। मुझे पूरा विश्वास है कि यह सपना साकार होगा। साथ मिलकर, हम इसे कर दिखाएंगे!
उन्होंने कहा कि विश्व हिंदू विद्या केंद्र अपना गोल्डेन जुबली मना रहा है। ये माइलस्टोन जितना बड़ा है, इसकी यात्रा भी उतनी ही इंस्पायरिंग है। मैं इस अवसर पर जयगोपाल गरोडिया जी के योगदान को भी मैं आदरपूर्वक याद करता हूं। उन्होंने विद्यालय के भवन निर्माण में महत्वपूर्ण सहयोग दिया। आज मैं उन सभी शिक्षकों, कर्मचारियों, अभिभावकों और पूर्व विद्यार्थियों का भी अभिनंदन करता हूं, जिन्होंने हिंदू विद्यालय की यात्रा को सफल बनाया है। उन्होंने कहा कि एक छोटे से विद्यालय के रूप में इस संस्थान की शुरूआत हुई थी। उस समय इसमें केवल 7 छात्र थे। आज जैसी सुविधाएं भी नहीं थीं, संसाधन भी सीमित थे लेकिन एक चीज थी, दृढ़ इच्छा शक्ति और अटूट सेवा भावना, इसलिए ये संस्थान हर कठिनाई के बावजूद आगे बढ़ता रहा।
उन्होंने कहा कि इस अवसर पर मैं जयगोपाल गरोडिया जी के योगदान को आदरपूर्वक याद करता हूं। उन्होंने विद्यालय के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया…50 वर्षों का समर्पण, 50 वर्षों की प्रतिबद्धता और 50 वर्षों तक युवा जीवन को संवारना।
उन्होंने कहा कि एक संस्थान कैसे शिक्षा के साथ-साथ राष्ट्रभक्त नागरिकों का निर्माण करता है, ये स्थान इसका भी उदाहरण है। मैंने मन की बात में इसकी चर्चा भी की थी कि कैसे गिरिजा अम्मा ने बच्चों को एक आइडिया दिया… हर बच्चा रोज सिर्फ एक रुपये बचाए और उसे देश के सैनिकों के लिए समर्पित करे। जब हजारों बच्चे इस संकल्प से जुड़े तो लगभग 40 लाख रुपये जुटा लिए… ये कितना इंस्पायरिंग उदाहरण है।
उन्होंने कहा कि छोटे-छोटे योगदान भी बड़ा बदलाव ला सकते हैं। चाहे संकट के समय जरूरतमंदों की सहायता करना हो या स्वच्छता अभियान में भाग लेना हो, सेवा के ये मूल्य हिंदू विद्यालय परिवार की समृद्ध विरासत का अभिन्न अंग हैं।
उन्होंने कहा कि हाल ही में मैंने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को तिरुक्कुरल का रूसी संस्करण भेंट किया। तिरुक्कुरल उन लोगों के लिए एक अनूठा मार्गदर्शक है जो जीवन भर सीखते रहना चाहते हैं। तिरुवल्लुवर जी, इस प्रसिद्ध कुरल के माध्यम से हमें सिखाते हैं कि कुछ नया सीखना ही पर्याप्त नहीं है। हमें उस ज्ञान को व्यवहार में भी लाना चाहिए। यह सभी विद्यार्थियों के लिए एक महत्वपूर्ण सीख है।
आज देश में एजुकेशन का पूरा परिदृश्य बदल रहा है। 2014 में भारत में करीब 750 यूनिवर्सिटी थीं, आज इनकी संख्या बढ़कर 1,300 से भी ज्यादा हो गई हैं। कॉलेजों की संख्या भी करीब 38,000 से बढ़कर 52,000 से भी अधिक हो चुकी है। बीते वर्षों में देश को अनेक आईआईटी, आईआईएम, ट्रिपल आईटी और एम्स मिले हैं। युवा खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण और सहयोग मिल रहा है। आज इंटरनेशनल स्पोर्ट्स में भारत का कद बहुत बढ़ रहा है। भारत में 2030 राष्ट्रमंडल खेलों के आयोजन की तैयारी चल रही है। हम 2036 ओलिंपिक खेलों का सपना भी लेकर आगे बढ़ रहे हैं।


