जम्मू-कश्मीर के उधमपुर जिले में एक महिला की उसके सौतेले बेटे द्वारा कथित तौर पर पेट्रोल छिड़ककर आग लगाए जाने से मौत हो गई।
पुलिस ने गुरुवार को बताया कि उधमपुर के हाउसिंग कॉलोनी इलाके में बुधवार शाम एक 42 वर्षीय महिला पर उसके सौतेले बेटे ने कथित तौर पर पेट्रोल डालकर हमला कर दिया था, जिसके बाद इलाज के दौरान महिला की मौत हो गई।
आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है। मृतका की पहचान सुषमा देवी के रूप में हुई है। आरोप है कि उसके सौतेले बेटे ने उस पर पेट्रोल छिड़ककर आग लगा दी थी।
महिला को पहले उधमपुर के एक अस्पताल ले जाया गया, जहां से बेहतर इलाज के लिए उसे जीएमसी जम्मू रेफर कर दिया गया। वहीं, इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
रिपोर्ट्स के अनुसार, घटना के बाद महिला की हालत बहुत गंभीर थी। पुलिस ने मामले का संज्ञान लिया है और इस हमले से जुड़ी परिस्थितियों की जांच शुरू कर दी है।
आरोपी की पहचान मोक्ष वर्मा के रूप में हुई है। आरोप है कि उसने अपने घर के अंदर अपनी सौतेली मां पर ज्वलनशील पदार्थ छिड़ककर आग लगा दी।
सुषमा देवी का शरीर लगभग 70 प्रतिशत तक बुरी तरह जल गया था। पड़ोसी और परिवार के सदस्य उसे उधमपुर के जिला अस्पताल ले गए, जहां से गंभीर हालत में उसे गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज, जम्मू रेफर कर दिया गया। बाद में अस्पताल में ही उसकी मौत हो गई।
एनसीआरबी के आंकड़ों के अनुसार, जम्मू-कश्मीर में कानून तोड़ने वाले किशोरों के मामलों में काफी बढ़ोतरी हुई है। 2020 में ऐसे 171 मामले दर्ज हुए थे, जो 2021 में बढ़कर 323 हो गए और 2022 में इनकी संख्या 361 तक पहुंच गई।
2024 में ‘इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरोसाइंसेज-कश्मीर’ द्वारा किशोर अपराधियों पर किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि इनके खिलाफ मुख्य रूप से यूएपीए (गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम), आर्म्स एक्ट और पोक्सो एक्ट के तहत मामले दर्ज किए गए थे।
केंद्रशासित प्रदेश के कानूनी और मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि न्याय प्रणाली में आने वाले किशोरों में से एक बड़ा हिस्सा ऐसे लोगों का है, जिन्होंने पहली बार अपराध किया है। इसके पीछे मुख्य कारण पारिवारिक कलह, गंभीर आर्थिक तंगी और माता-पिता के मार्गदर्शन की कमी है, न कि कोई आदतन आपराधिक प्रवृत्ति।


