भारत की 5 बड़ी दवा निर्माता कंपनियों को अमेरिकी बाजार से अपनी दवाओं के कई लॉट वापस मंगाने पड़ रहे हैं। इन कंपनियों में ग्लेनमार्क, सनफार्मा, जायडस, ग्रैन्यूल्स इंडिया और यूनिकेम जैसी दिग्गज फर्में शामिल हैं। अमेरिकी स्वास्थ्य नियामक, यूएस फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (USFDA) ने अपनी ताजा रिपोर्ट में खुलासा किया है कि इन दवाओं में मैन्युफैक्चरिंग से जुड़ी अलग-अलग खामियां पाई गई हैं।
USFDA की रिपोर्ट के अनुसार, ये सभी कंपनियां स्वेच्छा से प्रभावित उत्पादों को बाजार से हटा रही हैं। उदाहरण के तौर पर, मुंबई स्थित ग्लेनमार्क फार्मास्युटिकल्स को अपने गोवा प्लांट में बनी एक जेल (Azelaic Acid Gel) की 13,824 ट्यूब्स इसलिए वापस मंगानी पड़ीं, क्योंकि बाजार से इसकी बनावट में खुरदरापन (Gritty Texture) होने की शिकायतें मिली थीं। USFDA ने इसे ‘क्लास-II’ रिकॉल बताया है, जिसका मतलब है कि इसके इस्तेमाल से स्वास्थ्य पर कोई गंभीर खतरा तो नहीं, लेकिन अस्थायी समस्या हो सकती है।
इसी तरह, हैदराबाद की कंपनी ग्रैन्यूल्स इंडिया को भी एक दवा (Dextroamphetamine) की 49,000 से अधिक बोतलें वापस मंगानी पड़ी हैं, क्योंकि यह क्वालिटी और अशुद्धियों से जुड़े मानकों पर खरी नहीं उतर पाई।
मामले की गंभीरता इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि इस लिस्ट में दवा क्षेत्र के कई और बड़े नाम शामिल हैं। इनमें दिग्गज कंपनी सनफार्मा की अमेरिकी सब्सिडरी भी है, जो एक रीनल इमेजिंग एजेंट की 1,870 किट वापस मंगा रही है। इसी तरह, अहमदाबाद स्थित जायडस फार्मास्युटिकल्स को भी अपनी एंटीवायरल दवा ‘एंटेकाविर’ की 8,784 बोतलें बाजार से वापस बुलानी पड़ रही हैं। वहीं, एक अन्य कंपनी यूनिकेम फार्मास्युटिकल्स को अपनी दवाओं के लेबल में हुई गड़बड़ी के चलते उन्हें अमेरिकी बाजार से हटाना पड़ रहा है।
यह घटनाक्रम भारतीय दवा उद्योग की गुणवत्ता नियंत्रण प्रक्रियाओं पर एक बार फिर से सवाल खड़े करता है, खासकर जब यह दुनिया के सबसे बड़े और सबसे कड़े दवा बाजार, अमेरिका से जुड़ा हो।


