भारतीय जांच एजेंसियां अब विदेशों में छिपे अपराधियों के खिलाफ तेजी से कार्रवाई कर रही हैं। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को इंटरपोल की मदद से संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में छिपे एक वांछित आरोपी को भारत लाने में सफलता मिली है। आरोपी की पहचान अनिल कुमार रेड्डी के रूप में हुई है, जो आंध्र प्रदेश में कई आपराधिक मामलों में वांछित था।
यूएई से भारत लाया गया आरोपी
अनिल कुमार रेड्डी पर धोखाधड़ी, आपराधिक धमकी और अन्य गंभीर आरोप दर्ज हैं। आंध्र प्रदेश पुलिस को लंबे समय से उसकी तलाश थी, जांच से बचने के लिए वह देश छोड़कर यूएई में जाकर छिप गया था। आंध्र प्रदेश पुलिस के अनुरोध पर Central Bureau of Investigation ने 5 सितंबर 2022 को उसके खिलाफ इंटरपोल से रेड नोटिस जारी करवाया। यह नोटिस किसी भी देश की पुलिस को आरोपी की गिरफ्तारी के लिए सतर्क करता है।
सीबीआई की विशेष इकाई ने विदेश मंत्रालय और अबू धाबी के अधिकारियों के साथ मिलकर समन्वय किया। रेड नोटिस के आधार पर यूएई की सुरक्षा एजेंसियों ने अनिल रेड्डी को गिरफ्तार कर लिया। कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद उसे भारत प्रत्यर्पित करने का फैसला लिया गया। गुरुवार को दुबई पुलिस की एक टीम आरोपी को हैदराबाद के Rajiv Gandhi International Airport लेकर पहुंची। यहां जरूरी दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी की गई और फिर उसे आंध्र प्रदेश पुलिस के हवाले कर दिया गया।
मलेशिया से भी तीन आरोपी भेजे गए
यह पहला मामला नहीं है, जब भारत को विदेश से वांछित आरोपी सौंपे गए हों। हाल ही में एक अन्य कार्रवाई में मलेशिया के सहयोग से तीन अपराधियों को वापस भेजा गया था। इन तीनों के खिलाफ भी इंटरपोल रेड नोटिस जारी था। मलेशियाई अधिकारियों के मुताबिक, ये आरोपी संगठित अपराध से जुड़े गंभीर मामलों में शामिल थे। उन पर गैरकानूनी तरीकों से धन और प्रभाव हासिल करने के आरोप हैं।
जानकारी के अनुसार, ये तीनों यूनाइटेड किंगडम से मुंबई एयरपोर्ट पहुंचे थे। लेकिन रेड नोटिस जारी होने के कारण इमिग्रेशन अधिकारियों ने उन्हें भारत में प्रवेश की अनुमति नहीं दी। इसके बाद मलेशिया सरकार ने भारत से उन्हें वापस भेजने का अनुरोध किया। 25 जनवरी को रॉयल मलेशिया पुलिस की एक टीम मुंबई पहुंची। सीबीआई और अन्य भारतीय एजेंसियों के सहयोग से तीनों आरोपियों को सुरक्षित तरीके से मलेशियाई अधिकारियों को सौंप दिया गया।
अंतरराष्ट्रीय सहयोग से बढ़ी सख्ती
हाल के समय में भारत की जांच एजेंसियां इंटरपोल और अन्य देशों की कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ मिलकर भगोड़े अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर रही हैं। इससे यह साफ संकेत जाता है कि कानून से बचकर विदेश भाग जाना अब आसान नहीं है।