पंजाब सरकार ने नशे के खिलाफ अभूतपूर्व अभियान युद्ध नशे के विरुद्ध चलाया। इस अभियान ने नशा तस्करों की कमर तोड़ दी है। इस मुहिम की शुरुआत के बाद, पंजाब पुलिस द्वारा डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (डीजीपी) पंजाब गौरव यादव के निर्देशों के तहत राज्य के सभी 28 पुलिस जिलों में रोजाना एक ही समय पर ऑपरेशन चलाए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने पुलिस कमिश्नरों, डिप्टी कमिश्नरों और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों को पंजाब को नशा मुक्त राज्य बनाने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत 68,389 एफआईआर दर्ज हुईं और 92,264 लोगों को गिरफ्तार किया गया। अधिकारियों ने 5,480 किलोग्राम हेरोइन जब्त की, जो देश में सबसे अधिक है। नशा तस्करों की 760 करोड़ रुपए की संपत्ति जब्त की गई और 64 हवाला ऑपरेटरों को गिरफ्तार किया गया। 1.5 लाख से अधिक नागरिकों ने गांव रक्षा समितियां बनाई, जिससे 600 से अधिक नशा तस्करों की गिरफ्तारी हुई। गांवों में 15,000 ‘पिंड दे पहरेदार’ तैनात किए गए हैं।
नशा मुक्ति केंद्रों की क्षमता 360 प्रतिशत बढ़ाकर 1,455 से 5,255 बिस्तरों तक कर दी गई है और कक्षा 9 से 12 तक के लिए नशा विरोधी पाठ्यक्रम शुरू किया गया है। राज्य के कई जिलों में ड्रग तस्करों की संपत्तियों पर कार्रवाई की जा चुकी है। इनमें मकान, व्यावसायिक इमारतें और कृषि भूमि जैसी संपत्तियां शामिल हैं, जिन्हें फ्रीज कर दिया गया है। पुलिस का कहना है कि इस कार्रवाई से समाज में एक स्पष्ट संदेश जा रहा है कि नशे के कारोबार से कमाई गई संपत्ति अब कानून से बच नहीं सकेगी। पंजाब अब अपने युवाओं को चिट्टे की भेंट नहीं चढऩे देगा। नशों से निपटने के लिए प्रवर्तन, नशा मुक्ति और रोकथाम—इन तीन सिद्धांतों पर आधारित बहु-आयामी रणनीति तैयार की गई, जिसके परिणाम अत्यंत उत्साहजनक रहे हैं। अभियान के तहत नशा आपूर्ति करने वालों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की गई और तस्करी नेटवर्क को ध्वस्त किया गया।
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