Thursday, July 2, 2026
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3 महीने तक फ्री में बनेंगे सभी सर्टिफिकेट, अवैध कॉलोनियों को लेकर भी हुआ अहम ऐलान; पढ़ें पंजाब कैबिनेट के बड़े फैसले

पंजाब की भगवंत मान सरकार ने राज्य की जनता को बड़ी राहत देते हुए कई ऐतिहासिक कदम उठाए हैं। बुधवार को हुई अहम कैबिनेट बैठक के बाद, कैबिनेट मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इन जनहितैषी फैसलों की विस्तार से जानकारी दी। सरकार ने आम नागरिकों की जेब का बोझ कम करने के साथ-साथ किसानों और घर खरीदारों के लिए भी कई महत्वपूर्ण रियायतों का ऐलान किया है, जिससे प्रदेश के लाखों लोगों को सीधा फायदा पहुंचेगा।

अब 30 सितंबर तक बिल्कुल मुफ्त बनेंगे जरूरी सर्टिफिकेट

इस समय चुनाव आयोग द्वारा वोटर लिस्ट के संशोधन का काम चल रहा है, जिसके कारण लोगों को कई तरह के दस्तावेजों की जरूरत पड़ रही है। इसे देखते हुए पंजाब सरकार ने गरीब और ग्रामीण तबके को बड़ी आर्थिक राहत दी है। मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने बताया कि 1 जुलाई 2026 से 30 सितंबर 2026 तक रिहायशी, जाति, जन्म और शैक्षणिक योग्यता के सर्टिफिकेट बनवाने पर लगने वाली सुविधा फीस पूरी तरह से माफ कर दी गई है। पहले डोर-स्टेप डिलीवरी सेवाओं के लिए 70 रुपये और अन्य के लिए 50 रुपये फीस लगती थी, जो अब इन तीन महीनों के लिए एकदम फ्री होगी।

जमीन अधिग्रहण पर किसानों को मिलेगा ज्यादा फायदा

राज्य में विकास कार्यों के लिए अधिग्रहित की जाने वाली जमीन के मालिकों और किसानों को भी सरकार ने बड़ी राहत दी है। पुरानी नीति में बदलाव करते हुए, अब प्रति एकड़ जमीन के बदले मिलने वाले 200 गज के कमर्शियल प्लॉट का आकार बढ़ाकर 210 गज कर दिया गया है। यदि कोई व्यक्ति कमर्शियल प्लॉट नहीं लेना चाहता, तो उसे रिहायशी प्लॉट में 30 गज का अतिरिक्त फायदा देकर कुल 1630 गज का प्लॉट दिया जाएगा। कमर्शियल प्रोजेक्ट वाली जगहों पर भी 800 गज की सीमा को बढ़ाकर 840 गज कर दिया गया है। इसके अलावा, जिन लोगों की 1 एकड़ या उससे ज्यादा जमीन अधिग्रहित होगी, उन्हें बिना किसी नीलामी के सरकारी रिजर्व प्राइस पर एक अतिरिक्त प्लॉट लेने का विकल्प भी मिलेगा।

25 प्रतिशत से ज्यादा बनी अवैध कॉलोनियां होंगी पक्की

पंजाब भर में बिना मंजूरी के बनी अवैध कॉलोनियों के मुद्दे पर भी कैबिनेट ने एक बड़ा और स्पष्ट फैसला लिया है। नई नीति के तहत, जिन अवैध कॉलोनियों में कम से कम 25 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हो चुका है, उन्हें अब सरकार द्वारा नियमित (रेगुलर) किया जाएगा। इसके लिए रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) या डेवलपर को रिहायशी इलाके के लिए कलेक्टर रेट (डीसी रेट) का 5 फीसदी और कमर्शियल इलाके के लिए 10 फीसदी चार्ज जमा करवाना होगा। प्रक्रिया पूरी होने पर सरकार पहले प्रोविजनल सर्टिफिकेट जारी करेगी और साढ़े चार साल में कॉलोनी विकसित होने के बाद ही आगे प्लॉटों की खरीद-फरोख्त हो सकेगी।

प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री के लिए खत्म हुई NOC की टेंशन

सरकार के इस फैसले का सबसे बड़ा और सीधा फायदा उन आम लोगों को मिलेगा, जिन्होंने इन कॉलोनियों में अपनी गाढ़ी कमाई लगाई है। जो कॉलोनियां इस नई सरकारी प्रक्रिया के तहत नियमित हो जाएंगी, वहां के निवासियों या नए प्लॉट खरीदारों को अपनी प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री (सेल डीड) करवाने के लिए संबंधित अथॉरिटी से किसी भी प्रकार की NOC (नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट) लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी। हालांकि, चीमा ने स्पष्ट किया कि यह छूट केवल उन्हीं कॉलोनियों को मिलेगी, जिनके मुख्य मालिक या डेवलपर ने सरकार की इस नई नीति और प्रक्रिया का पूरी तरह से पालन किया होगा।

 

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