Thursday, July 16, 2026
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चन्नी से नाराज राहुल गांधी और खड़गे ने मिलने से किया इनकार, कभी भी हो सकता है बड़ा एक्शन

पंजाब में विधानसभा चुनाव होने में अब महज 7 महीने का वक्त बचा है, लेकिन उससे ठीक पहले पंजाब कांग्रेस में अंदरूनी कलह और गुटबाजी अपने चरम पर पहुंच गई है। पार्टी की इस सिर फुटव्वल को लेकर अब कांग्रेस के केंद्रीय हाईकमान में भी गहरी दरार और मतभेद साफ दिखाई देने लगे हैं। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, पंजाब कांग्रेस के मौजूदा अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को पद से हटाने के मसले पर राहुल गांधी की टीम और कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की राय बिल्कुल अलग-अलग है। इस पूरी राजनीतिक रस्साकशी ने पंजाब में कांग्रेस की चुनावी तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

केसी वेणुगोपाल और बघेल वड़िंग के समर्थन में, खड़गे चाहते हैं बदलाव

सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल और पंजाब कांग्रेस प्रभारी भूपेश बघेल राजा वड़िंग को प्रधान की कुर्सी से हटाने के सख्त खिलाफ हैं। उनका मानना है कि चुनाव से ऐन पहले इस तरह का बदलाव पार्टी को बड़ा नुकसान पहुंचा सकता है। दूसरी तरफ, पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे पंजाब कांग्रेस में बड़े संगठनात्मक बदलाव को लेकर चर्चा करने के पक्ष में हैं। खड़गे और वेणुगोपाल के बीच इस मुद्दे पर एक घंटे की लंबी मीटिंग भी हुई। इसके तुरंत बाद खड़गे ने पंजाब प्रभारी बघेल को दिल्ली तलब किया और पंजाब की मौजूदा स्थिति पर तीखे सवाल-जवाब किए। हालांकि, इस लंबी पूछताछ के बाद बघेल को वापस छत्तीसगढ़ भेज दिया गया।

बागी गुट से नाराज राहुल और खड़गे, चन्नी को दिया बड़ा झटका

पंजाब में कांग्रेस के इस संकट का एक बड़ा कारण पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और उनका गुट भी है। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे दोनों ही पंजाब कांग्रेस के इस बागी (चन्नी) गुट से बेहद खफा हैं। स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई है कि पार्टी का शीर्ष नेतृत्व अब चन्नी से मुलाकात तक नहीं करना चाहता। इस पूरे प्रकरण पर आलाकमान का जो भी अंतिम फैसला होगा, वह सीधे केसी वेणुगोपाल के जरिए पंजाब कांग्रेस के सांसदों तक पहुंचा दिया जाएगा। माना जा रहा है कि राहुल गांधी अब किसी भी वक्त इस मामले में कोई बड़ा और कड़ा फैसला ले सकते हैं।

बाजवा के जरिए भेजा चन्नी को संदेश, बागी गुट ने भी दिखाए तेवर

इस पूरे घटनाक्रम के बीच बुधवार को हाईकमान ने पंजाब विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा को अचानक दिल्ली बुलाया था। वहां उनकी केसी वेणुगोपाल से अहम मुलाकात हुई। इस मुलाकात के बाद ऐसी अटकलें तेज हो गई थीं कि वड़िंग से इस्तीफा लेकर बाजवा को पंजाब कांग्रेस की कमान सौंपी जा सकती है। हालांकि, दिल्ली से लौटते ही बाजवा ने सबसे पहले पूर्व सीएम चरणजीत सिंह चन्नी से मुलाकात की। माना जा रहा है कि बाजवा के जरिए ही दिल्ली दरबार ने अपना कड़ा संदेश चन्नी तक पहुंचाया है।

इधर, पंजाब में चन्नी गुट भी शांत बैठने को तैयार नहीं है। चन्नी गुट ने कांग्रेस हाईकमान को आंखें दिखानी शुरू कर दी हैं। शक्ति प्रदर्शन के तौर पर चन्नी समर्थकों ने पूरे पंजाब में सोशल मीडिया पर ‘सारा पंजाब चन्नी दे नाल’ नाम से एक बड़ी मुहिम छेड़ दी है। हालांकि, इन तमाम राजनीतिक अटकलों और गुटबाजी के बीच पंजाब कांग्रेस प्रभारी भूपेश बघेल ने कड़े शब्दों में कहा है कि पंजाब में कोई बदलाव नहीं होने जा रहा है। उन्होंने साफ किया कि यह ‘गुड्डे-गुड्डी का खेल’ नहीं है और उन्होंने अपनी विस्तृत रिपोर्ट केसी वेणुगोपाल को सौंप दी है।

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