Friday, October 23, 2026
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पंजाब में अंतिम संस्कार के 20 दिन बाद जिंदा मिला युवक, परिवार वालों और पुलिस के उड़े होश

पंजाब के कपूरथला से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने परिवार के साथ-साथ पुलिस को भी हैरान कर दिया है। जिस युवक को मृत समझकर परिवार ने उसका अंतिम संस्कार कर दिया और अंतिम रस्में व भोग भी कर दिया, वही युवक करीब 20 दिन बाद कपूरथला केंद्रीय जेल में जिंदा मिला।

जेल कर्मचारी के फोन के बाद परिवार को जब इस बात की जानकारी मिली तो उन्हें पहले विश्वास ही नहीं हुआ। लेकिन जेल पहुंचने पर जब उन्होंने बेटे रवि कुमार को सामने जिंदा देखा तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई।

9 अगस्त को मिला था अज्ञात शव

पुलिस के मुताबिक, कादूपुर निवासी टीटी का 25 वर्षीय बेटा रवि कुमार 5 अगस्त से लापता था। परिवार ने कई दिनों तक उसकी तलाश की और बाद में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई।

इसी बीच 9 अगस्त को कांजली रोड के पास एक अज्ञात युवक का शव मिला। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम कराया। शव की हालत खराब होने के कारण चेहरा पहचान में नहीं आ रहा था।

पुलिस ने शव की पहचान के लिए रवि के परिवार को बुलाया। परिजनों ने कपड़ों के आधार पर शव की पहचान रवि के रूप में कर दी।

13 अगस्त को कर दिया अंतिम संस्कार

पहचान की प्रक्रिया पूरी होने के बाद पुलिस ने शव परिवार को सौंप दिया। परिवार ने उसे रवि कुमार का शव मानकर 13 अगस्त को पूरे रीति-रिवाज से अंतिम संस्कार कर दिया। इसके दो दिन बाद 15 अगस्त को अंतिम रस्में और भोग भी कर दिया गया।

परिवार को जरा भी अंदाजा नहीं था कि जिस बेटे को वे हमेशा के लिए खो चुके हैं, वह उस समय जेल में जिंदा था।

जेल कर्मचारी के फोन से खुला राज

मामले में अचानक उस समय नया मोड़ आया, जब कपूरथला केंद्रीय जेल के एक कर्मचारी ने परिवार को फोन कर बताया कि रवि कुमार जेल में बंद है।

शुरुआत में परिजनों को कर्मचारी की बात पर भरोसा नहीं हुआ। लेकिन जब उन्हें बताया गया कि रवि उनसे बात करना चाहता है, तो वे जेल पहुंचे। वहां बेटे को जिंदा देखकर परिवार के होश उड़ गए।

5 अगस्त से ही जेल में बंद था रवि

पुलिस जांच में सामने आया कि रवि कुमार 5 अगस्त से ही कपूरथला केंद्रीय जेल में बंद था, जबकि कांजली रोड पर अज्ञात शव 9 अगस्त को बरामद हुआ था।

पुलिस रिकॉर्ड में रवि से संबंधित कपूरथला और जालंधर सिटी की DDR एंट्रियां भी मौजूद होने की बात सामने आई है। परिवार के मुताबिक, रवि ने बताया कि उसे जालंधर पुलिस ने आवारागर्दी के एक मामले में पकड़ा था।

पुलिस अधिकारी के अनुसार, उसके खिलाफ BNSS की धारा 128 के तहत कार्रवाई की गई थी और इसके बाद उसे जेल भेज दिया गया था।

अब पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल

पूरे मामले ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। जब रवि 5 अगस्त से जेल में था तो 9 अगस्त को मिले अज्ञात शव की पहचान उसके रूप में कैसे हो गई? सिर्फ कपड़ों के आधार पर पहचान क्यों स्वीकार की गई? शव की पहचान की पुष्टि के लिए अन्य जरूरी प्रक्रियाएं क्यों नहीं अपनाई गईं?

DSP शीतल सिंह के अनुसार, पूरे मामले की जांच की जा रही है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि किस स्तर पर लापरवाही हुई। जिम्मेदार पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

आखिर किसका हुआ अंतिम संस्कार?

अब पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि कांजली रोड पर मिला शव आखिर किसका था? जिस युवक का परिवार ने रवि समझकर अंतिम संस्कार कर दिया, उसकी वास्तविक पहचान क्या है और वह शव वहां कैसे पहुंचा—इन सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।

पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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