Friday, October 16, 2026
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कांग्रेस ने धीरेंद्र शास्त्री के खिलाफ दर्ज करवाई शिकायत, गिरफ्तारी की उठी मांग; जानें क्या है पूरा मामला

बागेश्वर धाम के प्रमुख धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री द्वारा दुर्गा पूजा के दौरान मांसाहारी भोजन छोड़ने की अपील को लेकर पश्चिम बंगाल में बड़ा राजनीतिक और सामाजिक विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस की पश्चिम बंगाल इकाई ने धीरेंद्र शास्त्री के खिलाफ पुलिस में औपचारिक शिकायत दर्ज कराते हुए तत्काल प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने और गिरफ्तारी की मांग की है। कांग्रेस का आरोप है कि बाबा के इस बयान से बंगालियों की धार्मिक और सांस्कृतिक भावनाएं आहत हुई हैं तथा इसका सीधा उद्देश्य राज्य के सामाजिक सौहार्द को बिगाड़ना है।

हावड़ा के कार्यक्रम में दिया था विवादित बयान, कांग्रेस ने भवानीपुर थाने में दी तहरीर

दक्षिण कोलकाता जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष प्रदीप प्रसाद ने कोलकाता के भवानीपुर थाने में लिखित शिकायत दी है। शिकायत में आरोप लगाया गया कि शास्त्री ने 5 सितंबर को हावड़ा में आयोजित एक धार्मिक समागम के दौरान बंगाली समुदाय की खान-पान परंपराओं पर आपत्तिजनक और अपमानजनक टिप्पणियां की थीं। कांग्रेस ने अपनी शिकायत में कहा कि धीरेंद्र शास्त्री ने दुर्गा पूजा के पावन अवसर पर मांसाहार का सेवन करने वाले श्रद्धालुओं को कथित तौर पर ‘पाखंडी’ और ‘ढोंगी’ करार दिया था। पार्टी का कहना है कि यह टिप्पणी समाज में अशांति फैलाने वाली और लोकतांत्रिक मर्यादाओं के पूरी तरह खिलाफ है।

‘दुर्गा पूजा में मांसाहार विवाद का विषय नहीं’: टीएमसी मंत्री ने दिलाई परंपरा की याद

इस विवाद के तूल पकड़ने के बाद राज्य की राजनीति में भी तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिली हैं। राज्य सरकार के वरिष्ठ मंत्री ने इस मुद्दे पर दो टूक कहा कि बंगाल में दुर्गा पूजा के दौरान मांसाहार का सेवन कोई नया या विवादित विषय नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बंगाल में प्राचीन काल से ही शक्ति पूजा के दौरान बकरे की बलि देने और उसे महाप्रसाद के रूप में ग्रहण करने की धार्मिक परंपरा रही है। मंत्री ने कहा कि निजी खान-पान हर व्यक्ति की अपनी पसंद है और किसी को भी यह तय करने का अधिकार नहीं होना चाहिए कि कौन क्या खाए।

भाजपा ने भी बनाई दूरी, संतों के निजी विचार बताकर साधी चुप्पी

बंगाली अस्मिता और पारंपरिक खान-पान की आदतों से जुड़े इस संवेदनशील मामले में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता भी बैकफुट पर नजर आ रहे हैं और उन्होंने धीरेंद्र शास्त्री के बयान से स्पष्ट दूरी बना ली है। नेताओं का मानना है कि संतों का अपना नजरिया होता है और वे स्वास्थ्य व सात्विकता के आधार पर शाकाहार की वकालत करते हैं, लेकिन इसे किसी पर थोपा नहीं जा सकता। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दुर्गा पूजा से ठीक पहले खान-पान को लेकर उठे इस विवाद ने राज्य में सांस्कृतिक पहचान की बहस को एक बार फिर गरमा दिया है।

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