पंजाब सरकार ने राज्य के कृषि क्षेत्र और जल प्रबंधन को मजबूत करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। सरकार ने अपनी सिंचाई नीतियों और प्रयासों के जरिए राज्य में नहरी पानी के दायरे को अभूतपूर्व रूप से बढ़ाकर 60.30 लाख एकड़ तक पहुंचा दिया है, जो कि पहले (2022 में) केवल 20.89 लाख एकड़ हुआ करता था।
किसानों के लिए वरदान बनी पहल
इस योजना के तहत राज्य के उन दूर-दराज और टेल-एंड (आखिरी छोर) के 1,500 से अधिक गांवों तक पहली बार नहरी पानी पहुंचाया गया है, जहां दशकों से सिंचाई के लिए केवल भूजल (Groundwater) पर निर्भर रहना पड़ता था। इस क्रांतिकारी बदलाव से किसानों को भूजल के अत्यधिक दोहन से राहत मिली है और खेती की लागत में भी कमी आई है।
क्यों उठाया गया यह कदम?
पंजाब में लगातार गिरते भूजल स्तर (Water Table) को बचाना और राज्य के हर खेत तक सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध कराना सरकार की मुख्य प्राथमिकता रही है। इसी उद्देश्य के तहत राज्य भर में बंद पड़ी और टूटी-फूटी नहरों, रजवाहों और खड्डों के पुनरुद्धार का काम युद्ध स्तर पर कराया गया, जिससे टेल-एरिया तक पानी की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित हो सकी।
इस बड़ी उपलब्धि से न केवल कृषि उत्पादन को बढ़ावा मिला है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और जल संचयन की दिशा में भी पंजाब सरकार का यह कदम मील का पत्थर साबित हो रहा है।


