पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के ड्रीम प्रोजेक्ट ‘सड़क सुरक्षा बल’ (Road Safety Force – SSF) ने राज्य में सड़क हादसों को रोकने और दुर्घटना पीड़ितों को तुरंत चिकित्सा सहायता पहुँचाने के मामले में देश भर में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। ऐसा समर्पित बल गठित करने वाला पंजाब देश का पहला राज्य है।
50,000 से अधिक लोगों की बचाई जान
जनवरी 2024 में औपचारिक रूप से शुरू किए गए इस विशेष बल ने लगभग डेढ़ साल के भीतर 50,000 से अधिक सड़क दुर्घटना पीड़ितों को समय पर चिकित्सा सहायता पहुँचाकर उनकी जान बचाई है। SSF के कड़े प्रयासों के चलते राज्य के नेशनल और स्टेट हाईवे पर होने वाली दुर्घटनाओं की मृत्यु दर में लगभग 45% से 50% की भारी गिरावट दर्ज की गई है।
‘प्लैटिनम 10 मिनट’ का गोल्डन नियम
सड़क दुर्घटनाओं में मृत्यु का मुख्य कारण समय पर इलाज न मिलना होता है। SSF का पूरा ढांचा ‘प्लैटिनम 10 मिनट’ सिद्धांत पर काम करता है:
औसत रिस्पॉन्स टाइम: सूचना मिलते ही SSF की टीम महज 6 से 8 मिनट के भीतर दुर्घटनास्थल पर पहुँच जाती है।
ऑन-स्पॉट फर्स्ट एड: जवानों को गंभीर परिस्थितियों में तुरंत प्राथमिक उपचार देने और एम्बुलेंस के जरिए निकटतम अस्पताल पहुँचाने का विशेष प्रशिक्षण दिया गया है।
हाइटेक तकनीक और आधुनिक संसाधन
राज्य के 4,100 किलोमीटर से अधिक लंबे हाईवे नेटवर्क की सुरक्षा का जिम्मा SSF के पास है:
144 हाईटेक गाड़ियां: एसएसएफ के बेड़े में अत्यधिक आधुनिक टोयोटा पिकअप/एसयूवी वाहन शामिल हैं, जो हर 30 किलोमीटर के दायरे में 24 घंटे गश्त करते हैं।
स्मार्ट उपकरण: गाड़ियां बॉडीकैम, स्पीड गन, एआई आधारित कैमरे, ई-चालान और ब्रेथ एनालाइज़र से लैस हैं।
28% महिला जवानों की भागीदारी
SSF की एक और बड़ी खासियत इसमें महिलाओं की भागीदारी है। इस बल में कुल तैनात कर्मियों में लगभग 28% महिला जवान और महिला ड्राइवर्स शामिल हैं। यह बल न केवल सड़क दुर्घटनाओं में मदद करता है, बल्कि देर रात सफर करने वाली महिलाओं, पर्यटकों और स्कूली बच्चों को भी सुरक्षा प्रदान करता है।
केवल ट्रैफिक नहीं, मानवीय सेवा का जरिया
सड़क सुरक्षा के अलावा SSF कर्मियों ने आत्महत्या के कई मामलों को रोका है, चोरी किए गए वाहनों व माल को बरामद किया है और हाईवे पर फंसे यात्रियों को त्वरित राहत पहुँचाई है। केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय ने भी पंजाब सरकार की इस पहल की सराहना की है।


