बदलते मौसम और प्रदूषण के बीच त्वचा पर खुजली, जलन और रैशेज होना आम बात मानी जाती है। अधिकांश लोग ऐसी दिक्कतों को साधारण एलर्जी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं या बिना डॉक्टरी सलाह के कोई भी क्रीम लगा लेते हैं। लेकिन अगर यह परेशानी लंबे समय तक बनी रहे और तेजी से फैले, तो यह त्वचा की गंभीर ऑटोइम्यून बीमारी ‘सोरायसिस’ का संकेत हो सकती है। सोरायसिस एक क्रॉनिक (दीर्घकालिक) समस्या है, जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली (इम्यून सिस्टम) अत्यधिक सक्रिय होकर स्किन सेल्स के तेजी से बनने का कारण बनती है। इसके चलते त्वचा पर मोटी, लाल और चांदी जैसी सफेद पपड़ीदार परतें जमने लगती हैं, जो समय पर इलाज न मिलने पर पूरे शरीर को अपनी चपेट में ले सकती हैं।
सामान्य एलर्जी और सोरायसिस में क्या है अंतर?
कैलाश दीपक हॉस्पिटल की कंसलटेंट डर्मेटोलॉजिस्ट डॉ. जैस्मिन के अनुसार, लोग अक्सर एलर्जी, एक्जिमा और सोरायसिस के लक्षणों के बीच भ्रमित हो जाते हैं। सामान्य स्किन एलर्जी किसी एलर्जेन, धूल, रसायन या खास चीज के संपर्क में आने से होती है, जिसमें त्वचा पर हल्के लाल दाने, खुजली और सूजन दिखाई देती है। दूसरी ओर, एक्जिमा में आमतौर पर रूखापन और खुजली मुख्य रूप से होती है। इसके विपरीत, सोरायसिस में त्वचा पर स्पष्ट रूप से उभरे हुए गहरे लाल चकत्ते बनते हैं, जिन पर सिलवेरी-व्हाइट (चांदी जैसी सफेद) पपड़ी उतरती है।
जोड़ों, नाखूनों और स्कैल्प पर भी असर, हार्ट के लिए भी जोखिम
डॉक्टरों का कहना है कि सोरायसिस केवल ऊपरी त्वचा तक सीमित नहीं रहता। यह बीमारी सिर की त्वचा (स्कैल्प), नाखूनों और जोड़ों (जॉइंट्स) तक को गंभीर रूप से प्रभावित करती है, जिसे सोरियाटिक अर्थराइटिस कहा जाता है। सामान्य स्किन एलर्जी में ये सारे अंग प्रभावित नहीं होते। विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि सोरायसिस का संबंध हृदय संबंधी समस्याओं से भी देखा गया है। यदि मरीज में कोई संक्रमण हो या वह अत्यधिक मानसिक तनाव से गुजर रहा हो, तो यह बीमारी भड़ककर (ट्रिगर होकर) पूरे शरीर पर फैल सकती है। ऐसी आपात स्थिति में मरीज को तत्काल अस्पताल में भर्ती कराकर इलाज कराने की आवश्यकता होती है।
त्वचा को सूखने से बचाएं और तनाव से बनाएं दूरी
सोरायसिस के लक्षणों को नियंत्रित रखने और इसके फैलाव को रोकने के लिए नियमित देखभाल बेहद आवश्यक है। सबसे पहले त्वचा की नमी बनाए रखना जरूरी है, क्योंकि रूखापन बढ़ने से खुजली और पपड़ी की समस्या और गंभीर हो जाती है। नहाने के तुरंत बाद अच्छी गुणवत्ता वाले मॉइस्चराइजर का उपयोग त्वचा को शांत रखने में मदद करता है। इसके अलावा, मानसिक तनाव सोरायसिस का सबसे बड़ा ट्रिगर माना जाता है। योग, ध्यान (मेडिटेशन) और नियमित पर्याप्त नींद के जरिए तनाव का स्तर कम रखकर इसके प्रकोप से बचा जा सकता है।
खानपान में सुधार और गर्म पानी से परहेज की सलाह
सोरायसिस के मरीजों को अपनी दिनचर्या और खानपान में भी विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। बहुत गर्म पानी से नहाने और नहाते समय त्वचा को जोर से रगड़ने से जलन और रूखापन काफी बढ़ सकता है, इसलिए हमेशा गुनगुने पानी और सौम्य (माइल्ड) क्लींजर का ही प्रयोग करना चाहिए। साथ ही आहार में हरी पत्तेदार सब्जियां, ताजे फल, साबुत अनाज और हेल्दी फैट्स शामिल कर शरीर के वजन को नियंत्रित रखना चाहिए। संतुलित जीवनशैली और शुरुआती चरण में विशेषज्ञ डॉक्टर से परामर्श लेकर सोरायसिस को गंभीर रूप लेने से समय रहते रोका जा सकता है।


