Saturday, October 31, 2026
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पंजाब में पराली प्रबंधन योजना की बड़ी कामयाबी: पराली जलाने के मामलों में रिकॉर्ड गिरावट और किसानों को ₹600 करोड़ का सहायता पैकेज

पंजाब सरकार द्वारा राज्य को पराली की समस्या से मुक्त करने और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए चलाई जा रही ‘क्रॉप रेजिड्यू Management (CRM)’ योजना ने कृषि एवं पर्यावरण के क्षेत्र में नए मानक स्थापित किए हैं। सरकार के जमीनी प्रयासों, आधुनिक मशीनरी सब्सिडी और जागरूकता अभियानों के कारण राज्य में पराली जलाने (Stubble Burning) की घटनाओं में भारी गिरावट दर्ज की गई है।

मुख्य आंकड़े और ऐतिहासिक बदलाव
पराली जलाने के मामलों में रिकॉर्ड कमी: पंजाब कृषि विभाग के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2022 में पराली जलाने के मामलों की संख्या जो लगभग 49,922 थी, वह 2025 में घटकर 5,114 पर आ गई और वर्ष 2026 में इसमें अभूतपूर्व सुधार दर्ज किया गया है।

₹600 करोड़ का बजट प्लान: मान सरकार ने इस वित्त वर्ष में फसल अवशेष प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण के लिए ₹600 करोड़ का विशेष प्लान तैयार किया है।

21,000+ नई मशीनों की डिलीवरी: 2026 के सीजन में ही किसानों द्वारा 21,155 से अधिक आधुनिक पराली प्रबंधन उपकरण (जैसे सुपर सीडर, हैप्पी सीडर, बैलर) खरीदे गए हैं।
किसानों और समूहों को भारी सब्सिडी (50% से 80%)सरकार की नीति का सबसे बड़ा ध्यान छोटे व सीमांत किसानों को आर्थिक सहायता पहुँचाना है: व्यक्तिगत किसानों के लिए 50% छूट: individual किसानों को ‘सुपर सीडर’ और अन्य उपकरणों की खरीद पर 50% (अधिकतम ₹1.20 लाख तक) सब्सिडी दी जा रही है। समूहों और पंचायतों को 80% सहायता: किसान उत्पादक संगठनों (FPO), सहकारी समितियों, ग्राम पंचायतों और कस्टम हायरिंग सेंटर्स (CHC) को मशीनों के बेड़े पर 80% तक की भारी आर्थिक मदद दी जा रही है। 🌿 पर्यावरण, मिट्टी की सेहत और किसानों की अतिरिक्त आयजमीन की उपजाऊ क्षमता में सुधार: सुपर सीडर और हैप्पी सीडर से धान के अवशेषों को खेत के अंदर ही (In-situ) काटकर मिला दिया जाता है। इससे मिट्टी में जैविक कार्बन और नाइट्रोजन बढ़ता है, जिससे गेहूं की उपज में 5% से 10% तक की वृद्धि देखी जा रही है। पराली बेचने से कमाई (Ex-situ Management): राज्य में ‘बैलर’ (Baler) मशीनों की मदद से पराली की गांठें बनाई जा रही हैं। किसान इस पराली को बायो-सीएनजी (Bio-CNG) और बायोमास पावर प्लांट्स को बेचकर अतिरिक्त आय कमा रहे हैं। जल संरक्षण: मशीनों से सीधे बुवाई होने के कारण सिंचाई के लिए पानी की कम खपत होती है, जिससे राज्य में गिरते भूजल स्तर को संभालने में मदद मिल रही है। निष्कर्ष: पंजाब सरकार की CRM नीति ने न केवल उत्तर भारत में वायु प्रदूषण की चुनौती को कम किया है, बल्कि किसानों को बिना पराली जलाए आधुनिक तकनीक से कम लागत में अधिक फसल उगाने का अवसर दिया है।क्या आप इस योजना के आवेदन की प्रक्रिया, पोर्टल विवरण, या पंजाब सरकार की किसी अन्य नीति (जैसे कृषि बिजली सप्लाई या नहरी सिंचाई नेटवर्क) पर विस्तृत रिपोर्ट चाहते हैं?

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