Saturday, February 28, 2026
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जनवरी से जून तक ट्रेनों से कटकर 254 लोगों की मौत, जानलेवा साबित हो रही है लापरवाही

छह माह में 254 लोगों की ट्रेनों की चपेट में आने से मौत हुई है। पिछले साल जनवरी से जून तक 256 लोगों की मौत हुई थी। रेलवे पुलिस बल (आरपीएफ) के अधिकारियों का कहना है कि मौतों का सबसे बड़ा कारण यह है कि लोग लापरवाही और गलत तरीके से पटरी पार करते हैं।

254 people died after being hit by trains from January to June.

राजधानी में जिस तरह से सड़क हादसों में हर वर्ष 1200 से 1400 लोगों की जान जाती है, ठीक उसी तरह रेल पटरियों पर भी लोग जान गवां रहे हैं। छह माह में 254 लोगों की ट्रेनों की चपेट में आने से मौत हुई है। पिछले साल जनवरी से जून तक 256 लोगों की मौत हुई थी। रेलवे पुलिस बल (आरपीएफ) के अधिकारियों का कहना है कि मौतों का सबसे बड़ा कारण यह है कि लोग लापरवाही और गलत तरीके से पटरी पार करते हैं।

आरपीएफ के अनुसार, पिछले वर्ष जनवरी से जून के बीच 147 लोग घायल हुए थे। इस साल छह माह में 122 लोग घायल हुए हैं। छह माह में गलत तरीके से पटरियों को पार करने के 654 मामले सामने आए हैं। इनमें से 650 लोगों को पकड़ा गया है। लोग शार्टकट के चक्कर में पटरियां पार करते हैं तो ट्रेनों की चपेट में आ जाते हैं। कई लोग ट्रेनों को देखे बिना पटरियां पार करते हैं तो कई लोग मोबाइल पर हेडफोन लगाकर बात करते हुए जान गंवा बैठते हैं।

आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि ट्रेन की चपेट में आने के दो प्रमुख कारण हो सकते हैं। पहला यह है कि कई हादसे ऐसे क्षेत्रों में हुए हैं जो औद्योगिक क्षेत्र हैं। पटरियों के दोनों तरफ फैक्ट्रियां है। ऐसे में लोगों फैक्ट्रियों में जाने के लिए पटरियां पार करते हैं। वहीं, दूसरा कारण आबादी वाले क्षेत्र हैं, जहां पर पटरियों के दोनों तरफ अतिक्रमण हैं। यहां पर भी लोग शार्टकर्ट के लिए पटरियां पार करते हैं। आरपीएफ अधिकारियों ने बताया कि लोगों को आरपीएफ की ओर से लगातार जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। साथ ही, गलत तरीके से पटरियां पार करने पर कार्रवाई भी की जाती है।

तीन रेल खंडों पर 27 फीसदी मौतें
आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष हुई कुल मौतों में से 27 फीसदी तीन रेल खंडों पर हुई हैं। इनमें सब्जी मंडी और आदर्श नगर स्टेशनों के बीच 77 मौतें, शाहदरा व पुरानी दिल्ली स्टेशनों के बीच 43 और साहिबाबाद जंक्शन से आनंद विहार टर्मिनल के बीच 21 मौतें हुईं हैं। तीनों रेल खंड हाॅटस्पाट के रूप में पहचाने गए हैं। यहां पर विशेष जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है।

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